यून सुक येओल पर दक्षिण कोरिया के सुप्रीम कोर्ट का फैसला 10 जुलाई को, मार्शल लॉ मामले में पहली सर्वोच्च सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण कोरिया का सुप्रीम कोर्ट अगले गुरुवार, 10 जुलाई 2025 को दोपहर 2 बजे पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने के मामले में अपना फैसला सुनाएगा। यह 3 दिसंबर 2024 को मार्शल लॉ की घोषणा से जुड़े मामलों में यून के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय की पहली सुनवाई होगी। कानूनी सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है।
मुख्य आरोप और मामले का पृष्ठभूमि
यून पर आरोप है कि जनवरी 2025 में उन्होंने अपने सुरक्षा कर्मियों को जाँच अधिकारियों द्वारा गिरफ्तारी वारंट लागू करने से रोकने का निर्देश दिया था। इसके अतिरिक्त, उन पर नौ कैबिनेट मंत्रियों को मार्शल लॉ योजना की पूर्व-समीक्षा बैठक में न बुलाकर उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करने का भी आरोप है। कथित तौर पर मार्शल लॉ हटाए जाने के बाद प्रक्रियागत खामियों को छिपाने के लिए सरकारी दस्तावेजों में बदलाव और उन्हें नष्ट करने का भी मामला दर्ज है।
अपीलीय अदालत का पूर्व फैसला
अप्रैल 2025 में अपीलीय अदालत ने इन आरोपों में यून को दोषी ठहराते हुए सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। यह निचली अदालत की पाँच वर्ष की सजा से दो वर्ष अधिक थी, हालाँकि विशेष अभियोजन पक्ष ने 10 वर्ष की सजा की माँग की थी। फिलहाल यून जेल में बंद हैं।
अन्य मुकदमे और सज़ाएँ
मार्शल लॉ लागू करने की कथित साजिश के जरिए विद्रोह का नेतृत्व करने के मामले में यून के खिलाफ एक अलग मुकदमा भी अपीलीय अदालत में विचाराधीन है, जिसमें निचली अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
इससे पहले जून 2025 में सोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने यून को 30 वर्ष के कारावास की अलग सजा सुनाई थी। अदालत ने माना कि अक्टूबर 2024 में यून ने उत्तर कोरिया को उकसाने और सीमा पर तनाव बढ़ाने के उद्देश्य से उत्तर कोरिया में ड्रोन भेजने के अभियान को मंजूरी दी थी — ताकि 3 दिसंबर 2024 को मार्शल लॉ की घोषणा का माहौल तैयार किया जा सके। अदालत ने उन्हें दुश्मन को लाभ पहुँचाने और पद के दुरुपयोग का दोषी ठहराया।
यून की कानूनी टीम ने ड्रोन मामले के फैसले के कुछ ही घंटों बाद अपील दायर कर दी। उनके वकीलों का तर्क है कि उत्तर कोरिया द्वारा कचरा ले जाने वाले गुब्बारे भेजे जाने के जवाब में ड्रोन भेजने की कार्रवाई वैध थी। अदालत ने इस दलील को यह कहते हुए खारिज किया कि इस अभियान से दक्षिण कोरिया की सैन्य संपत्तियाँ उजागर हुईं, जिससे देश के सुरक्षा हितों को नुकसान पहुँचा।
सहयोगियों को मिली सज़ाएँ
ड्रोन ऑपरेशन से जुड़े मामले में पूर्व रक्षा मंत्री किम योंग-ह्यून को 30 वर्ष, पूर्व रक्षा प्रतिविद्रोह कमान प्रमुख यो इन-ह्युंग को 15 वर्ष और ड्रोन ऑपरेशन कमान के पूर्व प्रमुख किम योंग-डे को तीन वर्ष की सजा सुनाई गई, जिसे पाँच वर्ष के लिए निलंबित कर दिया गया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपियों ने सैन्य मनोवैज्ञानिक रणनीति अपनाकर राष्ट्रीय सुरक्षा संकट की स्थिति पैदा करने की योजना बनाई थी और इसे जनता के विश्वास के साथ विश्वासघात करार दिया।
आगे क्या होगा
सुप्रीम कोर्ट का 10 जुलाई का फैसला न्यायिक प्रक्रिया में बाधा के आरोप में यून की सज़ा को अंतिम रूप दे सकता है या उसमें बदलाव कर सकता है। गौरतलब है कि विद्रोह के मुख्य मामले में अपीलीय सुनवाई अभी जारी है, इसलिए यून के कानूनी संकट का पूर्ण समाधान अभी दूर है।