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यून सुक योल के महाभियोग-विरोधी पादरी से मिले अमेरिकी विदेश विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, बुसान में हुई बैठक

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यून सुक योल के महाभियोग-विरोधी पादरी से मिले अमेरिकी विदेश विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, बुसान में हुई बैठक

सारांश

अमेरिकी विदेश विभाग के तीन वरिष्ठ अधिकारी बुसान पहुँचे और यून सुक योल के महाभियोग के विरोधी पादरी सोन ह्यून-बो से मिले — यह बैठक तब हुई जब इसी सप्ताह यून के खिलाफ ड्रोन-मार्शल लॉ षड्यंत्र मामले में अदालती फैसला आने वाला है और विशेष वकील ने 30 साल की सजा की माँग की है।

मुख्य बातें

अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारी राइली बार्न्स , जूली टर्नर और व्हाइट हाउस की बेल्सिस रोमेरो ने बुसान में पादरी सोन ह्यून-बो से मुलाकात की।
यह बैठक अमेरिकी पक्ष की पहल पर हुई; करीब एक महीने पहले संपर्क किया गया था।
चर्चा में धार्मिक संस्थाओं को भंग करने संबंधी प्रस्तावित कानून और भेदभाव-विरोधी कानून पर बहस शामिल रही।
पादरी सोन ' सेव कोरिया ' संगठन के प्रमुख हैं; उन्हें इस वर्ष 6 महीने की निलंबित जेल सजा मिली।
सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट इस शुक्रवार को यून सुक योल के मामले में फैसला सुनाएगा; विशेष वकील ने 30 वर्ष की सजा की माँग की है।

अमेरिकी विदेश विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने 8 जून 2026 को दक्षिण कोरिया के बुसान स्थित सेगेरो चर्च का दौरा किया और वरिष्ठ पादरी सोन ह्यून-बो से मुलाकात की — यही वे पादरी हैं जिन्होंने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल के महाभियोग के विरोध में रैलियों का नेतृत्व किया था। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब यून दिसंबर 2024 की असफल मार्शल लॉ घोषणा से जुड़े मामलों में जेल में बंद हैं और इसी सप्ताह उनके खिलाफ अदालती फैसला आने की संभावना है।

बैठक में कौन शामिल हुए

सेगेरो चर्च के अनुसार, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में लोकतंत्र, मानवाधिकार और श्रम मामलों के लिए विदेश विभाग के सहायक सचिव राइली बार्न्स, कार्यवाहक उप सहायक सचिव जूली टर्नर और व्हाइट हाउस की फेथ लाइजन बेल्सिस रोमेरो शामिल थीं। बुसान, सियोल से लगभग 330 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है।

चर्च ने बताया कि यह मुलाकात अमेरिकी पक्ष की पहल पर हुई थी और संपर्क करीब एक महीने पहले किया गया था।

बातचीत के मुख्य विषय

दोनों पक्षों के बीच दक्षिण कोरिया से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई। इनमें धार्मिक संस्थाओं को भंग करने से संबंधित प्रस्तावित कानून, व्यापक भेदभाव-विरोधी कानून पर चल रही बहस और अन्य विषय शामिल थे। गौरतलब है कि ये मुद्दे दक्षिण कोरिया में रूढ़िवादी ईसाई समुदाय के लिए अत्यंत संवेदनशील रहे हैं।

पादरी सोन ह्यून-बो: पृष्ठभूमि

पादरी सोन ह्यून-बो 'सेव कोरिया' नामक एक रूढ़िवादी ईसाई नागरिक संगठन का नेतृत्व करते हैं। इस संगठन ने दिसंबर 2024 में यून की असफल मार्शल लॉ घोषणा के बाद उनके महाभियोग के विरोध में बड़े पैमाने पर रैलियाँ आयोजित की थीं।

पादरी सोन पर पिछले वर्ष के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान अवैध चुनाव प्रचार करने का आरोप लगा था। इस वर्ष उन्हें छह महीने की जेल की सजा सुनाई गई, हालाँकि यह सजा एक वर्ष के लिए निलंबित कर दी गई।

यून सुक योल के खिलाफ अदालती कार्यवाही

अधिकारियों के अनुसार, सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट इस सप्ताह शुक्रवार को पूर्व राष्ट्रपति यून के खिलाफ दर्ज मामले में फैसला सुनाएगा। यून पर आरोप है कि उन्होंने अक्टूबर 2024 में दक्षिण कोरियाई सेना को प्योंगयांग के ऊपर ड्रोन उड़ाने का आदेश दिया था — कथित तौर पर 3 दिसंबर 2024 को मार्शल लॉ लागू करने के लिए माहौल बनाने की नीयत से।

यून पर दुश्मन को लाभ पहुँचाने और अधिकारों के दुरुपयोग सहित कई गंभीर आरोप हैं। विशेष वकील चो यून-सुक की टीम ने यून के लिए 30 वर्ष की जेल की सजा की माँग की है।

व्यापक संदर्भ

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दक्षिण कोरिया की राजनीति में धार्मिक और नागरिक संगठनों की भूमिका पर तीखी बहस चल रही है। अमेरिकी विदेश विभाग का इस स्तर पर एक विवादास्पद धार्मिक-राजनीतिक व्यक्तित्व से सीधे संपर्क करना, अमेरिका-दक्षिण कोरिया संबंधों में नई परतें जोड़ता है। आने वाले दिनों में अदालती फैसले के साथ यह मामला और अधिक राजनीतिक महत्व ग्रहण कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि समर्थक इसे धार्मिक अधिकारों की वैध पैरवी मानते हैं। असली सवाल यह है कि क्या वाशिंगटन सियोल में न्यायिक प्रक्रिया के समानांतर अपने राजनीतिक संपर्क सूत्र तैयार कर रहा है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिकी अधिकारी पादरी सोन ह्यून-बो से क्यों मिले?
सेगेरो चर्च के अनुसार यह बैठक अमेरिकी पक्ष की पहल पर हुई और इसमें धार्मिक संस्थाओं को भंग करने संबंधी प्रस्तावित कानून, भेदभाव-विरोधी कानून और दक्षिण कोरिया से जुड़े अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई। अमेरिकी विदेश विभाग ने करीब एक महीने पहले संपर्क किया था।
पादरी सोन ह्यून-बो कौन हैं?
पादरी सोन ह्यून-बो बुसान के सेगेरो चर्च के वरिष्ठ पादरी और रूढ़िवादी ईसाई नागरिक संगठन 'सेव कोरिया' के प्रमुख हैं। उन्होंने दिसंबर 2024 में यून सुक योल की असफल मार्शल लॉ घोषणा के बाद महाभियोग के विरोध में बड़ी रैलियाँ आयोजित की थीं। उन पर अवैध चुनाव प्रचार का आरोप सिद्ध हुआ और इस वर्ष उन्हें 6 महीने की निलंबित जेल सजा मिली।
यून सुक योल के खिलाफ क्या आरोप हैं और फैसला कब आएगा?
यून पर आरोप है कि उन्होंने अक्टूबर 2024 में प्योंगयांग के ऊपर ड्रोन भेजने का आदेश दिया ताकि 3 दिसंबर 2024 को मार्शल लॉ लागू करने के लिए माहौल बनाया जा सके। उन पर दुश्मन को लाभ पहुँचाने और अधिकारों के दुरुपयोग सहित कई आरोप हैं। सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट इस शुक्रवार को फैसला सुनाएगा।
विशेष वकील ने यून के लिए कितनी सजा की माँग की है?
विशेष वकील चो यून-सुक की टीम ने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल के लिए 30 वर्ष की जेल की सजा की माँग की है। यह माँग मार्शल लॉ षड्यंत्र और ड्रोन ऑपरेशन से जुड़े आरोपों पर आधारित है।
दक्षिण कोरिया में यून सुक योल का महाभियोग क्यों हुआ था?
दिसंबर 2024 में यून सुक योल द्वारा अचानक मार्शल लॉ लागू करने की असफल कोशिश के बाद दक्षिण कोरिया की संसद ने उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पारित किया था। इसके बाद उन्हें पद से हटाया गया और वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
राष्ट्र प्रेस
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