यून सुक येओल पर ड्रोन घुसपैठ के आरोप: सोल कोर्ट शुक्रवार को सुनाएगी फैसला
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल के खिलाफ ड्रोन घुसपैठ से जुड़े आरोपों पर सोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट इस सप्ताह शुक्रवार को फैसला सुनाने वाली है। अधिकारियों ने 7 जून 2026 को यह जानकारी दी। यून पर दुश्मन को फायदा पहुँचाने और अपने अधिकारों के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप हैं।
मुख्य आरोप क्या हैं
यून पर आरोप है कि उन्होंने अक्टूबर 2024 में दक्षिण कोरियाई सेना को प्योंगयांग के ऊपर ड्रोन उड़ाने का आदेश दिया था। जाँचकर्ताओं के अनुसार, यह कदम 3 दिसंबर 2024 को मार्शल लॉ लागू करने के लिए एक बहाना तैयार करने की कथित रणनीति का हिस्सा था। विशेष जाँच दल का कहना है कि इस ड्रोन घुसपैठ से उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच सैन्य तनाव बढ़ा और सैन्य गोपनीय जानकारी भी उजागर हुई।
सज़ा की माँग और पूछताछ
विशेष जाँच दल की प्रमुख चो यून-सुक ने यून के लिए 30 साल की जेल की सज़ा की माँग की है। इससे पहले यून सत्ता के दुरुपयोग और नागरिक अधिकारों में बाधा डालने के आरोपों को लेकर पूछताछ के लिए ग्वाचोन स्थित विशेष जाँच दल के कार्यालय पहुँचे थे — सुबह करीब 10 बजे पहुँचकर शाम करीब 4:30 बजे निकले। फरवरी में जाँच दल के गठन के बाद यह उनकी पहली आधिकारिक पेशी थी। पूछताछ के दौरान यून ने कथित तौर पर मुख्य आरोपों से इनकार किया।
अन्य आरोपियों पर भी फैसला संभव
अदालत इसी सप्ताह पूर्व रक्षा मंत्री किम योंग-ह्यून, पूर्व डिफेंस काउंटरइंटेलिजेंस कमांड प्रमुख योओ इन-ह्युंग और पूर्व ड्रोन ऑपरेशंस कमांड प्रमुख मेजर जनरल किम योंग-डे के मामलों पर भी फैसला सुना सकती है। पूर्व रक्षा मंत्री पर उस दौरान ड्रोन अभियान का नेतृत्व करने, सत्ता के दुरुपयोग और सैन्य प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुँचाने के आरोप हैं।
पृष्ठभूमि: पहले भी मिल चुकी है सज़ा
गौरतलब है कि फरवरी 2026 में एक अदालत यून को उनके असफल मार्शल लॉ प्रयास के मामले में पहले ही उम्रकैद की सज़ा सुना चुकी है। यह उस मामले में आया पहला न्यायिक फैसला था। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण कोरिया की राजनीतिक व्यवस्था मार्शल लॉ विवाद के बाद से गहरे संकट में है। शुक्रवार का फैसला यून के खिलाफ कानूनी कार्यवाही में एक और निर्णायक मोड़ होगा।