दक्षिण कोरिया में दो चीनी नागरिकों को सैन्य एयरबेस की जासूसी पर जेल की सजा, देश में पहली बार ऐसा फैसला
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण कोरिया की सुवोन जिला अदालत ने 15 मई 2025 को दो चीनी नागरिकों को दक्षिण कोरियाई और अमेरिकी सैन्य एयरबेस पर लड़ाकू विमानों की अवैध वीडियो रिकॉर्डिंग करने तथा एयर ट्रैफिक कंट्रोल संचार को इंटरसेप्ट करने की कोशिश के मामले में दोषी ठहराते हुए जेल की सजा सुनाई। यह दक्षिण कोरिया के इतिहास में पहली बार है जब किसी विदेशी नागरिक को आपराधिक कानून के तहत सामान्य राजद्रोह का दोषी पाया गया है।
क्या है मामला और किसे मिली कितनी सजा
अदालत ने 18 वर्षीय चीनी हाईस्कूल छात्र को किशोर कानून के तहत डेढ़ से दो साल की अनिश्चितकालीन जेल की सजा सुनाई। वहीं 20 वर्षीय चीनी युवक को दो साल की जेल की सजा दी गई। दोनों को सामान्य राजद्रोह के आरोप में दोषी पाया गया। अदालत ने अपराध में इस्तेमाल किए गए कैमरे और अन्य उपकरण भी जब्त करने का आदेश दिया।
मुख्य घटनाक्रम: कैसे हुई गिरफ्तारी
जाँच के अनुसार, दोनों आरोपियों ने 2024 की दूसरी छमाही से मार्च 2025 तक दक्षिण कोरिया की कई यात्राओं के दौरान देशभर के प्रमुख सैन्य ठिकानों पर उड़ान भरते और उतरते लड़ाकू विमानों की सैकड़ों विस्तृत तस्वीरें ली थीं। उस दौरान दोनों हाईस्कूल के छात्र थे।
इन्होंने सुवोन, ओसान, प्योंगटेक और चेओंगजू स्थित दक्षिण कोरियाई और अमेरिकी सैन्य ठिकानों के साथ-साथ इंचियोन, गिम्पो और जेजू के तीन प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों का भी दौरा किया था। मार्च 2025 में एक स्थानीय निवासी की शिकायत के बाद पुलिस ने सुवोन एयर बेस पर इन्हें गिरफ्तार किया था।
अदालत का आकलन: राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि दोनों ने ऐसे राजद्रोहपूर्ण कार्य किए जो दक्षिण कोरिया के सैन्य हितों को प्रभावित कर सकते थे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इन तस्वीरों के ज़रिए एयरबेस पर विमानों की तैनाती और उनके मुख्य अभियानों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी उजागर हुई, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर नुकसान पहुँचा। इसी आधार पर कड़ी सजा को आवश्यक बताया गया।
बुसान में एक और मामला विचाराधीन
गौरतलब है कि बुसान में एक अलग मामले में भी चीनी नागरिकों पर अमेरिकी विमानवाहक पोत की अवैध रिकॉर्डिंग करने का आरोप लगाया गया है। हालाँकि उस मामले में अभी तक कोई फैसला नहीं सुनाया गया है।
क्या होगा आगे
यह मामला दक्षिण कोरिया में सैन्य जासूसी कानूनों के कड़े क्रियान्वयन की दिशा में एक ऐतिहासिक मिसाल बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले के बाद दक्षिण कोरियाई अधिकारी सैन्य प्रतिष्ठानों के आसपास निगरानी और सुरक्षा प्रोटोकॉल और सख्त कर सकते हैं।