दक्षिण कोरिया: अपीलीय अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को झूठी गवाही के आरोप से बरी किया
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण कोरिया की सोल हाईकोर्ट ने बुधवार, 16 सितंबर 2026 को पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को पूर्व प्रधानमंत्री हान डक-सू के विद्रोह से जुड़े मुकदमे में झूठी गवाही देने के आरोप से बरी कर दिया। अदालत ने माना कि 3 दिसंबर 2024 को मार्शल लॉ लागू करने से पूर्व कैबिनेट बैठक बुलाने के यून के दावे को झूठा नहीं कहा जा सकता। यह फैसला मई में निचली अदालत द्वारा दिए गए बरी करने के निर्णय के अनुरूप है।
अदालत का तर्क
सोल हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा, 'यह मानना मुश्किल है कि आरोपी, अपने पद और अनुभव को देखते हुए, यह नहीं जानते थे कि मार्शल लॉ की घोषणा से पहले कैबिनेट बैठक में इस पर चर्चा होना जरूरी है।' अदालत ने यह भी जोड़ा कि ऐसा प्रतीत होता है कि यून ने मार्शल लॉ लागू करने के लिए कम से कम आवश्यक कानूनी शर्तों को पूरा करने की कोशिश की थी।
यह ऐसे समय में आया है जब पूर्व राष्ट्रपति पर कई समानांतर मुकदमे चल रहे हैं और उनका राजनीतिक भविष्य दाँव पर है।
अभियोजन पक्ष का आरोप
विशेष अभियोजक चो यून-सुक की टीम ने आरोप लगाया था कि यून ने शुरुआत में केवल छह कैबिनेट मंत्रियों को अपने कार्यालय बुलाया था। टीम के अनुसार, बाद में हान डक-सू के सुझाव पर यून ने बैठक के लिए आवश्यक गणपूर्ति (कोरम) पूरी करने हेतु अतिरिक्त मंत्रियों को बुलाया। अभियोजन पक्ष ने यून पर 1 करोड़ वॉन (लगभग 7,332 अमेरिकी डॉलर) के जुर्माने की मांग की थी।
हालाँकि, अपीलीय अदालत ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए कहा कि यून स्वयं भी — हान डक-सू के सुझाव से स्वतंत्र रूप से — अतिरिक्त कैबिनेट सदस्यों को बुलाने का इरादा रखते थे।
यून के खिलाफ अन्य मुकदमे
गौरतलब है कि पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल इस समय जेल में हैं। फरवरी 2026 में एक जिला अदालत ने उन्हें 3 दिसंबर 2024 को थोड़े समय के लिए मार्शल लॉ लागू कर विद्रोह का नेतृत्व करने के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। उस फैसले के खिलाफ अपील पर सुनवाई अभी भी जारी है।
झूठी गवाही के आरोप से बरी होना एक अलग और सीमित राहत है — विद्रोह के मुख्य मामले पर यह फैसला कोई प्रभाव नहीं डालता।
राजनीतिक और कानूनी संदर्भ
यह मामला दक्षिण कोरिया के लोकतांत्रिक इतिहास में एक अभूतपूर्व राजनीतिक संकट से जुड़ा है। 3 दिसंबर 2024 को यून द्वारा मार्शल लॉ की घोषणा के कुछ घंटों के भीतर ही संसद ने इसे खारिज कर दिया था, और इसके बाद यून को पद से हटाए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई। यह दक्षिण कोरिया के इतिहास में किसी राष्ट्रपति के खिलाफ सबसे गंभीर कानूनी कार्यवाहियों में से एक बनी हुई है।
आगे क्या होगा
विद्रोह के मुख्य आरोप पर अपीलीय सुनवाई अभी जारी है और उसका फैसला दक्षिण कोरिया की राजनीति को गहराई से प्रभावित कर सकता है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, झूठी गवाही का यह बरी होना यून के कानूनी बचाव पक्ष को मनोवैज्ञानिक राहत दे सकता है, परंतु आजीवन कारावास की मुख्य सजा को पलटने की राह अभी लंबी है।