महाराष्ट्र के 19 जिलों के 83 तालुकों में 20+ दिन से बारिश नहीं, खरीफ फसलें संकट में
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के 19 जिलों के 83 तालुकों में 20 दिनों से अधिक समय से वर्षा नहीं हुई है, जिसके चलते खरीफ फसलें गंभीर संकट में हैं और कई जिले सूखे की कगार पर पहुँच गए हैं। मराठवाड़ा, विदर्भ और पश्चिमी महाराष्ट्र के बड़े हिस्से इस शुष्क दौर से सबसे बुरी तरह प्रभावित हैं।
कैबिनेट बैठक और सरकार की प्रतिक्रिया
मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और कई मंत्रियों ने स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। हालाँकि किसी तत्काल राहत पैकेज की घोषणा नहीं की गई, लेकिन फडणवीस ने राज्य के समूचे प्रशासनिक तंत्र को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया।
सरकार ने स्पष्ट किया कि सूखे की औपचारिक घोषणा अभी नहीं की जा सकती। नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड (NDRF) के दिशानिर्देशों और केंद्रीय सूखा प्रबंधन नियमों के अनुसार, फसल क्षति का आधिकारिक सर्वे (पंचनामा) 5 अक्टूबर 2026 के बाद ही किया जा सकता है। कृषि विभाग ने कैबिनेट को बताया कि समय से पहले सर्वे करने पर प्रभावित किसान केंद्रीय सहायता पैकेज के लिए अयोग्य हो सकते हैं।
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले और मुख्यमंत्री ने सभी जिला कलेक्टरों को शुरुआती राहत प्रस्ताव तैयार करने का आदेश दिया है। प्रभावित जिलों के स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि मौजूदा बाँधों के जलभंडार को सख्ती से केवल पेयजल के लिए आरक्षित रखा जाए।
फसल नुकसान की तस्वीर
राज्य कृषि विभाग की क्षेत्र-वार रिपोर्ट के अनुसार, बीड में बोए गए क्षेत्र का 37.21 प्रतिशत खराब हो चुका है; जालना में 27.83 प्रतिशत और छत्रपति संभाजीनगर में 7.06 प्रतिशत फसल प्रभावित हुई है।
लातूर, धाराशिव और परभणी में हल्की मिट्टी वाली भूमि पर सोयाबीन, मूँग, उड़द और कपास की फसलें सूख रही हैं। इन फसलों में 'येलो मोज़ेक वायरस' का व्यापक प्रकोप भी देखा गया है। सोलापुर, सतारा, सांगली और अहिल्यानगर के वर्षा-निर्भर क्षेत्रों में पैदावार में 20 से 25 प्रतिशत की गिरावट की आशंका है।
विदर्भ में अमरावती, अकोला, बुलढाणा और वाशिम के कई तालुकों में 2 से 3 सप्ताह तक बारिश नहीं हुई है और सोयाबीन व कपास की फसलों पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। नागपुर, चंद्रपुर और गढ़चिरौली के कुछ हिस्सों में धान की रोपाई में देरी हो गई है। उत्तरी महाराष्ट्र के नंदुरबार में सामान्य वर्षा का मात्र 46.6 प्रतिशत बारिश ही हुई है।
सरकार की तात्कालिक तैयारियाँ
5 अक्टूबर को आधिकारिक सर्वे शुरू होने की प्रतीक्षा करते हुए राज्य सरकार आपातकालीन राहत सूचियाँ तैयार कर रही है, पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता का आकलन कर रही है और किसानों को बची हुई खरीफ फसलों की सुरक्षात्मक सिंचाई का मार्गदर्शन दे रही है। यह ऐसे समय में आया है जब सोलापुर, कोल्हापुर, बीड, लातूर, धाराशिव, परभणी, हिंगोली, अकोला, वाशिम, अमरावती, वर्धा, नागपुर और चंद्रपुर जैसे जिलों में वर्षा की भारी कमी दर्ज की गई है।
गौरतलब है कि धुले और जलगाँव के कुछ हिस्सों में हाल में हुई बारिश से खरीफ फसलों को थोड़ी राहत ज़रूर मिली है।
विपक्ष की माँग
कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार, सोलापुर की सांसद प्रणति शिंदे और शिवसेना (UBT) के नेताओं ने प्रभावित जिलों में तत्काल सूखा घोषित करने की माँग की है। विपक्ष का कहना है कि 19 जिलों और 83 से अधिक तहसीलों में बारिश की भारी कमी है, चारे और पानी की किल्लत का खतरा गहराता जा रहा है।
विपक्ष ने माँग की है कि मॉनसून के बाद की औपचारिक समय-सीमा का इंतजार किए बिना तुरंत आपातकालीन राहत पैकेज जारी किया जाए, फसल ऋण माफ किए जाएँ और चारा शिविर व टैंकर से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
आगे क्या होगा
5 अक्टूबर 2026 के बाद आधिकारिक पंचनामा शुरू होने पर सूखे की आधिकारिक घोषणा और केंद्रीय सहायता की प्रक्रिया तय होगी। तब तक जिला प्रशासन हाई अलर्ट पर है और सरकार राहत की रूपरेखा तैयार कर रही है।