25 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

केप टाउन में रितु खंडूरी ने 69वें कॉमनवेल्थ सम्मेलन में रखा भारत-उत्तराखंड का पक्ष, एआई व जलवायु पर चर्चा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
केप टाउन में रितु खंडूरी ने 69वें कॉमनवेल्थ सम्मेलन में रखा भारत-उत्तराखंड का पक्ष, एआई व जलवायु पर चर्चा

सारांश

उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूरी भूषण ने केप टाउन के 69वें कॉमनवेल्थ संसदीय सम्मेलन में पाँचवीं बार भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने जलवायु चर्चा में उत्तराखंड की 'बारह अनाज' परंपरा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखा, जिसने कई देशों के प्रतिनिधियों का ध्यान खींचा।

मुख्य बातें

रितु खंडूरी भूषण ने 13 से 19 सितंबर 2026 के बीच केप टाउन, दक्षिण अफ्रीका में आयोजित 69वें कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री कॉन्फ्रेंस में भारत और उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व किया।
यह उनका कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन में पाँचवीं बार भारत का प्रतिनिधित्व था; उन्हें एग्जीक्यूटिव कमेटी में नामित किया गया।
उन्होंने कॉमनवेल्थ वुमन पार्लियामेंटेरियन्स की इंटरजेनरेशनल इक्वलिटी चर्चा की अध्यक्षता की, जिसमें कनाडा और बांग्लादेश समेत कई देश शामिल थे।
भारत में महिलाओं के लिए 33% और उत्तराखंड में जिला पंचायत स्तर पर 50% आरक्षण का उदाहरण वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया।
जलवायु सत्र में टिहरी के जड़धार गांव की 'बारह अनाज' पारंपरिक कृषि पद्धति पर कई देशों के प्रतिनिधियों ने अलग से जानकारी माँगी।

उत्तराखंड विधानसभा की अध्यक्ष एवं कोटद्वार विधायक रितु खंडूरी भूषण ने दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में 13 से 19 सितंबर 2026 के बीच आयोजित 69वें कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री कॉन्फ्रेंस में भारत और उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व किया। इस अंतरराष्ट्रीय संसदीय मंच पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), जलवायु परिवर्तन, इंटरजेनरेशनल इक्वलिटी और राजनीति में महिलाओं व युवाओं की भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।

पाँचवीं बार भारत का प्रतिनिधित्व

रितु खंडूरी भूषण ने बताया कि यह उनकी पाँचवीं बार कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन में भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर रहा। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के प्रति आभार व्यक्त किया, जिनके नामांकन पर उन्हें सम्मेलन की एग्जीक्यूटिव कमेटी में स्थान मिला।

उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका में विभिन्न देशों के जनप्रतिनिधियों के साथ हुई बातचीत और अनुभवों का आदान-प्रदान उनके लिए अत्यंत समृद्ध अनुभव रहा।

युवाओं की राजनीतिक भागीदारी पर चर्चा की अध्यक्षता

खंडूरी को कॉमनवेल्थ वुमन पार्लियामेंटेरियन्स की इंटरजेनरेशनल इक्वलिटी से जुड़ी चर्चा की अध्यक्षता करने का अवसर मिला, जिसमें कनाडा, बांग्लादेश समेत कई देशों के प्रतिनिधि शामिल थे। चर्चा में यह प्रश्न केंद्र में रहा कि युवाओं को संसदीय राजनीति की ओर किस प्रकार आकर्षित किया जाए और उन्हें किस तरह की शिक्षा व प्रशिक्षण प्रदान किया जाए।

विभिन्न देशों ने इस विषय पर अपने अनुभव साझा किए — इस उद्देश्य से कि युवा पीढ़ी आगे चलकर संसद और शासन में प्रभावी योगदान दे सके।

महिला आरक्षण: भारत और उत्तराखंड का उदाहरण

सम्मेलन में जेंडर पैरिटी यानी महिलाओं की समान राजनीतिक भागीदारी पर भी विस्तृत चर्चा हुई। रितु खंडूरी भूषण ने भारत और उत्तराखंड का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि देश में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था है, जबकि उत्तराखंड में जिला पंचायत स्तर पर 50 प्रतिशत आरक्षण लागू है।

इसके परिणामस्वरूप राज्य में मेयर, जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लॉक प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य, बीडीसी सदस्य और वार्ड सदस्य जैसे पदों पर महिलाओं की उल्लेखनीय उपस्थिति देखने को मिल रही है। सम्मेलन में विभिन्न देशों की बेस्ट प्रैक्टिसेज भी साझा की गईं।

उत्तराखंड की 'बारह अनाज' परंपरा को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान

जलवायु परिवर्तन पर आयोजित सत्र में रितु खंडूरी ने उत्तराखंड की पारंपरिक कृषि पद्धति 'बारह अनाज' सिस्टम का उल्लेख किया। उन्होंने इसे मिट्टी और पर्यावरण के लिए अत्यंत उपयोगी पारंपरिक व्यवस्था बताया, जिसमें एक साथ 12 प्रकार के बीज या अनाज बोए जाते हैं।

उन्होंने टिहरी के जड़धार गांव का उदाहरण दिया, जहाँ देवी और विजय ने इस परंपरा को छोटे स्तर पर पुनर्जीवित किया और एक छोटे भू-भाग में 12 तरह के बीज लगाए। इस पद्धति का सबसे बड़ा लाभ यह है कि अलग-अलग फसलों की जल-आवश्यकता भिन्न होती है — अत्यधिक वर्षा में अधिक जल सहन करने वाली फसल और सूखे में कम पानी में पनपने वाली फसल दोनों की उपज सुनिश्चित होती है।

कुछ फसलें भूमि के नीचे विकसित होती हैं और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखती हैं। सम्मेलन में यह पारंपरिक मॉडल सुनकर कनाडा, बांग्लादेश समेत कई देशों के प्रतिनिधियों ने उनसे अलग से विस्तृत जानकारी माँगी। गौरतलब है कि आधुनिक विज्ञान भी आज ऐसी बहुफसली पद्धतियों के पर्यावरणीय महत्व को स्वीकार कर रहा है, जबकि उत्तराखंड के पूर्वजों ने इसे सदियों पहले ही व्यावहारिक रूप दे दिया था।

भारत की वैश्विक संसदीय उपस्थिति

यह सम्मेलन ऐसे समय में हुआ जब भारत वैश्विक जलवायु वार्ताओं में अपनी पारंपरिक कृषि विरासत को आधुनिक समाधान के रूप में प्रस्तुत करने की दिशा में सक्रिय है। खंडूरी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर उत्तराखंड की परंपराओं और अनुभवों को रखना उनके लिए गर्व और संतोष का विषय रहा।

आगे भी ऐसे अंतरराष्ट्रीय संसदीय मंचों पर भारत की सांस्कृतिक और नीतिगत विरासत को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की आवश्यकता बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह ध्यान देने योग्य है कि इस परंपरा को अंतरराष्ट्रीय मान्यता तो मिल रही है, लेकिन उत्तराखंड में ही इसका व्यापक पुनरुद्धार अभी सीमित दायरे में है। महिला आरक्षण के आँकड़े प्रभावशाली हैं, परंतु प्रतिनिधित्व और वास्तविक निर्णय-शक्ति के बीच की खाई को पाटना अभी शेष है — यह वह प्रश्न है जो अंतरराष्ट्रीय संसदीय मंचों पर भी उठना चाहिए।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

69वाँ कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री कॉन्फ्रेंस कहाँ और कब हुआ?
69वाँ कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री कॉन्फ्रेंस दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में 13 से 19 सितंबर 2026 के बीच आयोजित हुआ। इसमें एआई, जलवायु परिवर्तन, इंटरजेनरेशनल इक्वलिटी और राजनीति में महिलाओं व युवाओं की भागीदारी जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
रितु खंडूरी भूषण ने सम्मेलन में क्या प्रमुख भूमिका निभाई?
रितु खंडूरी भूषण को सम्मेलन की एग्जीक्यूटिव कमेटी में नामित किया गया और उन्होंने कॉमनवेल्थ वुमन पार्लियामेंटेरियन्स की इंटरजेनरेशनल इक्वलिटी चर्चा की अध्यक्षता की। यह उनका पाँचवाँ अवसर था जब उन्होंने कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
उत्तराखंड की 'बारह अनाज' परंपरा क्या है और इसे सम्मेलन में क्यों उठाया गया?
'बारह अनाज' उत्तराखंड की पारंपरिक कृषि पद्धति है जिसमें एक साथ 12 प्रकार के बीज या अनाज बोए जाते हैं। यह जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीली पद्धति है क्योंकि इसमें अत्यधिक या कम वर्षा दोनों स्थितियों में कोई न कोई फसल सफल रहती है, और मिट्टी की गुणवत्ता भी बनी रहती है।
उत्तराखंड में महिला राजनीतिक भागीदारी की क्या स्थिति है?
उत्तराखंड में जिला पंचायत स्तर पर महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था है, जो राष्ट्रीय स्तर के 33 प्रतिशत से अधिक है। इसके परिणामस्वरूप मेयर, जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लॉक प्रमुख और वार्ड सदस्य जैसे पदों पर महिलाओं की उल्लेखनीय उपस्थिति है।
जड़धार गांव का 'बारह अनाज' प्रयोग क्या है?
टिहरी जिले के जड़धार गांव में देवी और विजय ने 'बारह अनाज' परंपरा को छोटे स्तर पर पुनर्जीवित किया और एक छोटे भू-भाग में 12 तरह के बीज लगाए। इस उदाहरण को रितु खंडूरी ने केप टाउन सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन की चर्चा के दौरान प्रस्तुत किया, जिसने कई देशों के प्रतिनिधियों का ध्यान खींचा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले