यूएनईएससीएपी सीईडी-9 सत्र में भारत ने जलवायु कार्रवाई और सतत विकास पर रखा पक्ष
सारांश
मुख्य बातें
बैंकॉक में 2 जुलाई 2026 को आयोजित यूनाइटेड नेशंस इकोनॉमिक एंड सोशल कमीशन फॉर एशिया एंड द पैसिफिक (यूएनईएससीएपी) की पर्यावरण और विकास समिति (सीईडी-9) के 9वें सत्र में भारत ने अपना आधिकारिक वक्तव्य प्रस्तुत किया। बैंकॉक स्थित भारतीय दूतावास की प्रथम सचिव जगप्रीत कौर ने राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जलवायु परिवर्तन से निपटने की भारत की प्रतिबद्धताओं को रेखांकित किया।
भारत की प्रमुख पहलें
जगप्रीत कौर के वक्तव्य में भारत की कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय पहलों का उल्लेख किया गया। इनमें इंटरनेशनल सोलर अलायंस (आईएसए), लाइफस्टाइल फॉर द एनवायरनमेंट (एलआईएफई) मूवमेंट, कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (सीडीआरआई) और ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस (जीबीए) शामिल हैं। ये पहलें वैश्विक जलवायु सहयोग में भारत की सक्रिय भूमिका को दर्शाती हैं।
गौरतलब है कि भारत इन बहुपक्षीय मंचों पर न केवल अपनी घरेलू नीतियों को साझा करता है, बल्कि विकासशील देशों की ओर से एक सामूहिक आवाज़ भी उठाता है।
विकासशील देशों के लिए वित्तीय सहायता की माँग
भारत के वक्तव्य में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन से निपटने और अनुकूलन (अडैप्टेशन) के लिए पर्याप्त, समय पर और भरोसेमंद वित्तीय सहायता मिलनी चाहिए। यह माँग ऐसे समय में आई है जब वैश्विक जलवायु वित्त के वादे और उनकी वास्तविक पूर्ति के बीच की खाई को लेकर विकासशील देशों में असंतोष बढ़ रहा है।
सीईडी-9 सत्र का एजेंडा
यूएनईएससीएपी के अनुसार, सीईडी-9 में सीईडी-7 मंत्री स्तरीय घोषणा में निर्धारित प्राथमिक क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा की जाएगी। इस सत्र में विशेष ध्यान तीन बड़े पर्यावरणीय संकटों — जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता की हानि और प्रदूषण — से एकीकृत रूप से निपटने पर केंद्रित रहेगा।
साथ ही, सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को गति देने के लिए नीतियों के बेहतर समन्वय पर भी विचार-विमर्श होगा।
समिति की भूमिका और संरचना
पर्यावरण और विकास समिति, यूएनईएससीएपी की एक सहायक संस्था है जो हर दो वर्ष में बैठक करती है। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय रुझानों की समीक्षा करना, प्राथमिकताएँ तय करना और सरकारों, नागरिक समाज, निजी क्षेत्र तथा संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है। हर चार वर्ष में यह बैठक मंत्री स्तर पर आयोजित होती है ताकि उच्च-स्तरीय नीतिगत मार्गदर्शन सुनिश्चित हो सके।
आगे की राह
इस सत्र में भारत की सक्रिय भागीदारी यह संकेत देती है कि नई दिल्ली बहुपक्षीय पर्यावरण मंचों पर अपनी उपस्थिति और प्रभाव को और मज़बूत करने की दिशा में अग्रसर है। विशेषज्ञों का मानना है कि आईएसए और जीबीए जैसी पहलों के ज़रिए भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में हरित ऊर्जा नेतृत्व की एक विश्वसनीय भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।