1 जुलाई 2026
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भारत-यूएनईएससीएपी साझेदारी: राजदूत पुनीत अग्रवाल ने बैंकॉक में शोंबी शार्प से की अहम बैठक

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भारत-यूएनईएससीएपी साझेदारी: राजदूत पुनीत अग्रवाल ने बैंकॉक में शोंबी शार्प से की अहम बैठक

सारांश

थाईलैंड में भारत के राजदूत पुनीत अग्रवाल ने 30 जून को बैंकॉक में यूएनईएससीएपी के उप-कार्यकारी सचिव शोंबी शार्प से मुलाकात की। व्यापार, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, नवीकरणीय ऊर्जा और आपदा जोखिम न्यूनीकरण में साझा विशेषज्ञता का लाभ उठाने पर सहमति बनी।

मुख्य बातें

राजदूत पुनीत अग्रवाल ने 30 जून 2026 को बैंकॉक में यूएनईएससीएपी के उप-कार्यकारी सचिव शोंबी शार्प से परिचयात्मक बैठक की।
वार्ता में व्यापार , डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर , नवीकरणीय ऊर्जा और आपदा जोखिम न्यूनीकरण में सहयोग पर जोर दिया गया।
अप्रैल 2026 में भारत ने यूएनईएससीएपी के 82वें सत्र में सक्रिय भागीदारी निभाई थी।
भारत यूएनईएससीएपी की क्षेत्रीय संस्थाओं को स्वैच्छिक आर्थिक सहयोग देता है और क्षमता विकास कार्यक्रमों का समर्थन करता है।
भारत में यूएनईएससीएपी के दो प्रमुख केंद्र — एशिया एंड पैसिफिक सेंटर फॉर ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी और दक्षिण एवं दक्षिण-पश्चिम एशिया उप-क्षेत्रीय कार्यालय — स्थित हैं।

भारत के थाईलैंड में राजदूत पुनीत अग्रवाल ने 30 जून 2026 को बैंकॉक में संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक आयोग एशिया और प्रशांत (यूएनईएससीएपी) के साझेदारी एवं समन्वय के उप-कार्यकारी सचिव शोंबी शार्प से परिचयात्मक मुलाकात की। इस बैठक में दोनों पक्षों ने भारत और यूएनईएससीएपी के बीच बहुआयामी सहयोग को और गहरा करने के रास्ते तलाशे।

बैठक में किन विषयों पर हुई चर्चा

वार्ता में खासतौर पर व्यापार, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, नवीकरणीय ऊर्जा और आपदा जोखिम न्यूनीकरण जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित रही। दोनों पक्षों ने इन क्षेत्रों में अपनी-अपनी विशेषज्ञता को मिलाकर अधिकतम लाभ उठाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।

थाईलैंड स्थित भारतीय दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की गई पोस्ट में कहा, 'राजदूत पुनीत अग्रवाल ने यूएनईएससीएपी के कार्यकारी सचिव कार्यालय में साझेदारी और समन्वय के उप-कार्यकारी सचिव शोंबी शार्प से परिचयात्मक मुलाकात की। इस दौरान भारत और यूएनईएससीएपी के बीच सहयोग बढ़ाने पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ। साथ ही व्यापार, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, नवीकरणीय ऊर्जा और आपदा जोखिम कम करने जैसे क्षेत्रों में दोनों पक्षों की विशेषज्ञता का बेहतर इस्तेमाल करने पर भी चर्चा हुई।'

यूएनईएससीएपी के 82वें सत्र में भारत की भूमिका

गौरतलब है कि इससे पहले अप्रैल 2026 में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने यूएनईएससीएपी के 82वें सत्र में सक्रिय भागीदारी निभाई थी। इस सत्र का विषय था — 'किसी को भी पीछे न छोड़ना: एशिया और प्रशांत क्षेत्र में हर उम्र के लोगों के लिए समावेशी समाज की दिशा में आगे बढ़ना।'

भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने सत्र की चर्चाओं में रचनात्मक योगदान दिया और 2030 एजेंडा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता तथा सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को लागू करने में यूएनईएससीएपी के साथ भारत के सुदृढ़ सहयोग को रेखांकित किया।

भारत और यूएनईएससीएपी के दीर्घकालिक संबंध

भारत और यूएनईएससीएपी के बीच दशकों पुराने मज़बूत संबंध हैं। भारत, यूएनईएससीएपी की क्षेत्रीय संस्थाओं को स्वैच्छिक आर्थिक सहयोग प्रदान करता है और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा देने वाले क्षमता विकास कार्यक्रमों का समर्थन करता है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत में यूएनईएससीएपी के दो प्रमुख केंद्र स्थित हैं — एशिया एंड पैसिफिक सेंटर फॉर ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी और दक्षिण एवं दक्षिण-पश्चिम एशिया के लिए उप-क्षेत्रीय कार्यालय — जो इस साझेदारी की गहराई को दर्शाते हैं।

आगे क्या होगा

इस परिचयात्मक बैठक के बाद दोनों पक्षों के बीच चिन्हित क्षेत्रों में ठोस सहयोग कार्यक्रमों को आकार देने की उम्मीद है। डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की बढ़ती वैश्विक साख इस साझेदारी को और अधिक प्रासंगिक बनाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

आलोचकों का कहना है कि ऐसी परिचयात्मक बैठकें अक्सर ठोस परिणामों में नहीं बदलतीं जब तक कि समयबद्ध कार्ययोजना न हो। भारत की एसडीजी प्रतिबद्धता और घरेलू कार्यान्वयन की गति के बीच की खाई पर ध्यान देना ज़रूरी है — यह साझेदारी तभी सार्थक होगी जब द्विपक्षीय कार्यक्रम वास्तविक क्षमता हस्तांतरण तक पहुँचें।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजदूत पुनीत अग्रवाल और शोंबी शार्प की बैठक किस बारे में थी?
30 जून 2026 को बैंकॉक में हुई इस बैठक में भारत और यूएनईएससीएपी के बीच व्यापार, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, नवीकरणीय ऊर्जा और आपदा जोखिम न्यूनीकरण के क्षेत्रों में सहयोग को मज़बूत करने पर चर्चा हुई। यह एक परिचयात्मक बैठक थी जिसमें आगे के सहयोग की रूपरेखा तय करने पर सहमति बनी।
यूएनईएससीएपी का 82वां सत्र किस विषय पर था और भारत ने इसमें क्या भूमिका निभाई?
अप्रैल 2026 में आयोजित यूएनईएससीएपी के 82वें सत्र का विषय था 'किसी को भी पीछे न छोड़ना: एशिया और प्रशांत क्षेत्र में हर उम्र के लोगों के लिए समावेशी समाज।' भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने इसमें सक्रिय भागीदारी की और 2030 एजेंडा तथा सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
भारत और यूएनईएससीएपी के बीच किस तरह के संबंध हैं?
भारत और यूएनईएससीएपी के बीच दीर्घकालिक सहयोग है। भारत यूएनईएससीएपी की क्षेत्रीय संस्थाओं को स्वैच्छिक आर्थिक सहयोग देता है और क्षमता विकास कार्यक्रमों का समर्थन करता है। भारत में यूएनईएससीएपी के दो प्रमुख केंद्र भी स्थित हैं।
भारत में यूएनईएससीएपी के कौन-से केंद्र स्थित हैं?
भारत में यूएनईएससीएपी के दो प्रमुख केंद्र हैं — एशिया एंड पैसिफिक सेंटर फॉर ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी और दक्षिण एवं दक्षिण-पश्चिम एशिया के लिए उप-क्षेत्रीय कार्यालय। ये दोनों केंद्र भारत और इस क्षेत्र के देशों के बीच तकनीकी और नीतिगत सहयोग को बढ़ावा देते हैं।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भारत-यूएनईएससीएपी सहयोग क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत ने यूपीआई, आधार और डिजिलॉकर जैसे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल में वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई है। यूएनईएससीएपी के माध्यम से इन अनुभवों को एशिया-प्रशांत क्षेत्र के अन्य देशों के साथ साझा करना भारत की 'ग्लोबल साउथ' नेतृत्व की भूमिका को मज़बूत करता है।
राष्ट्र प्रेस
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