भारत-यूएनईएससीएपी साझेदारी: राजदूत पुनीत अग्रवाल ने बैंकॉक में शोंबी शार्प से की अहम बैठक
सारांश
मुख्य बातें
भारत के थाईलैंड में राजदूत पुनीत अग्रवाल ने 30 जून 2026 को बैंकॉक में संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक आयोग एशिया और प्रशांत (यूएनईएससीएपी) के साझेदारी एवं समन्वय के उप-कार्यकारी सचिव शोंबी शार्प से परिचयात्मक मुलाकात की। इस बैठक में दोनों पक्षों ने भारत और यूएनईएससीएपी के बीच बहुआयामी सहयोग को और गहरा करने के रास्ते तलाशे।
बैठक में किन विषयों पर हुई चर्चा
वार्ता में खासतौर पर व्यापार, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, नवीकरणीय ऊर्जा और आपदा जोखिम न्यूनीकरण जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित रही। दोनों पक्षों ने इन क्षेत्रों में अपनी-अपनी विशेषज्ञता को मिलाकर अधिकतम लाभ उठाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।
थाईलैंड स्थित भारतीय दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की गई पोस्ट में कहा, 'राजदूत पुनीत अग्रवाल ने यूएनईएससीएपी के कार्यकारी सचिव कार्यालय में साझेदारी और समन्वय के उप-कार्यकारी सचिव शोंबी शार्प से परिचयात्मक मुलाकात की। इस दौरान भारत और यूएनईएससीएपी के बीच सहयोग बढ़ाने पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ। साथ ही व्यापार, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, नवीकरणीय ऊर्जा और आपदा जोखिम कम करने जैसे क्षेत्रों में दोनों पक्षों की विशेषज्ञता का बेहतर इस्तेमाल करने पर भी चर्चा हुई।'
यूएनईएससीएपी के 82वें सत्र में भारत की भूमिका
गौरतलब है कि इससे पहले अप्रैल 2026 में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने यूएनईएससीएपी के 82वें सत्र में सक्रिय भागीदारी निभाई थी। इस सत्र का विषय था — 'किसी को भी पीछे न छोड़ना: एशिया और प्रशांत क्षेत्र में हर उम्र के लोगों के लिए समावेशी समाज की दिशा में आगे बढ़ना।'
भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने सत्र की चर्चाओं में रचनात्मक योगदान दिया और 2030 एजेंडा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता तथा सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को लागू करने में यूएनईएससीएपी के साथ भारत के सुदृढ़ सहयोग को रेखांकित किया।
भारत और यूएनईएससीएपी के दीर्घकालिक संबंध
भारत और यूएनईएससीएपी के बीच दशकों पुराने मज़बूत संबंध हैं। भारत, यूएनईएससीएपी की क्षेत्रीय संस्थाओं को स्वैच्छिक आर्थिक सहयोग प्रदान करता है और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा देने वाले क्षमता विकास कार्यक्रमों का समर्थन करता है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में यूएनईएससीएपी के दो प्रमुख केंद्र स्थित हैं — एशिया एंड पैसिफिक सेंटर फॉर ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी और दक्षिण एवं दक्षिण-पश्चिम एशिया के लिए उप-क्षेत्रीय कार्यालय — जो इस साझेदारी की गहराई को दर्शाते हैं।
आगे क्या होगा
इस परिचयात्मक बैठक के बाद दोनों पक्षों के बीच चिन्हित क्षेत्रों में ठोस सहयोग कार्यक्रमों को आकार देने की उम्मीद है। डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की बढ़ती वैश्विक साख इस साझेदारी को और अधिक प्रासंगिक बनाती है।