17 जुलाई 2026
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भारत-थाईलैंड रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने पर जोर, राजदूत पुनीत अग्रवाल ने बैंकॉक में कई बैठकें कीं

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भारत-थाईलैंड रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने पर जोर, राजदूत पुनीत अग्रवाल ने बैंकॉक में कई बैठकें कीं

सारांश

राजदूत पुनीत अग्रवाल ने 16 जुलाई को बैंकॉक में थाईलैंड के विदेश मंत्रालय और व्यापार प्रतिनिधि से अलग-अलग बैठकें कीं। एजेंडे में व्यापार बाधाएं हटाना, निवेश बढ़ाना और लोगों के बीच संपर्क शामिल रहा — जो पिछले साल स्थापित रणनीतिक साझेदारी को ज़मीन पर उतारने की कोशिश है।

मुख्य बातें

राजदूत पुनीत अग्रवाल ने 16 जुलाई को बैंकॉक में थाई विदेश मंत्रालय की महानिदेशक उरासा मोंगकोलनाविन से मुलाकात की।
उसी दिन गवर्नमेंट हाउस में थाईलैंड के व्यापार प्रतिनिधि चुटिनटोर्न गोंगसाकडी से भी बैठक हुई; टैरिफ और नॉन-टैरिफ बाधाएं हटाने पर ज़ोर।
30 जून को राजदूत ने थाईलैंड के विदेश मंत्री सिहासक फुआंगकेटकेओ से भी मुलाकात की थी।
PM मोदी की पिछले वर्ष अप्रैल में बैंकॉक यात्रा के दौरान दोनों देशों ने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया था।
भारत-थाईलैंड राजनयिक संबंध 1947 से हैं; 2022 में 75वीं वर्षगांठ मनाई गई।

भारत के थाईलैंड में राजदूत पुनीत अग्रवाल ने 16 जुलाई को बैंकॉक में थाईलैंड के विदेश मंत्रालय की दक्षिण एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका मामलों की महानिदेशक उरासा मोंगकोलनाविन से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों पक्षों ने उच्च स्तरीय दौरों, व्यापार-निवेश, जन स्वास्थ्य, पारंपरिक चिकित्सा और लोगों के बीच आपसी संपर्क समेत कई विषयों पर विचार-विमर्श किया, ताकि भारत-थाईलैंड रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ किया जा सके।

मुख्य बैठकें और चर्चा के विषय

राजदूत अग्रवाल ने उसी दिन गवर्नमेंट हाउस में थाईलैंड के व्यापार प्रतिनिधि चुटिनटोर्न गोंगसाकडी से भी भेंट की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को प्रगाढ़ बनाने, शुल्क (टैरिफ) एवं गैर-शुल्क (नॉन-टैरिफ) बाधाओं को दूर करने और दोनों पक्षों के लिए लाभकारी संतुलित व्यापार को प्रोत्साहित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

थाईलैंड में भारतीय दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर जानकारी दी कि बातचीत में दोनों देशों की ताकत वाले क्षेत्रों की पहचान करने और परस्पर लाभकारी व्यापार संतुलन बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने पर सहमति बनी।

पिछली बैठकों का क्रम

30 जून को राजदूत अग्रवाल ने थाईलैंड के उपप्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री सिहासक फुआंगकेटकेओ से मुलाकात की थी। उस बैठक में रणनीतिक साझेदारी को व्यापार-निवेश, धार्मिक-सांस्कृतिक संबंधों, कनेक्टिविटी परियोजनाओं और क्षेत्रीय मुद्दों पर सहयोग के ज़रिए आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई थी।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष अप्रैल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैंकॉक यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को औपचारिक रूप से रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया था। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति अधिक सक्रिय हो रही है।

द्विपक्षीय संबंधों की पृष्ठभूमि

भारत और थाईलैंड के बीच राजनयिक संबंध 1947 में स्थापित हुए थे और 2022 में दोनों देशों ने इन संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया। दशकों पुरानी इस मित्रता की जड़ें सांस्कृतिक, धार्मिक और व्यापारिक आदान-प्रदान में गहरी हैं।

इससे पहले मार्च में प्रधानमंत्री मोदी ने थाईलैंड के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल को बधाई दी थी और मिलकर काम करने की इच्छा जताई थी, जो दोनों देशों के नेतृत्व स्तर पर बेहतर समन्वय का संकेत है।

आगे की राह

इन बैठकों की शृंखला दर्शाती है कि भारत थाईलैंड के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को केवल कूटनीतिक घोषणाओं तक सीमित न रखकर व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य और कनेक्टिविटी जैसे ठोस क्षेत्रों में भी मूर्त रूप देना चाहता है। आने वाले महीनों में उच्च स्तरीय दौरों और द्विपक्षीय समझौतों की संभावना बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

व्यापार प्रतिनिधि और उपप्रधानमंत्री स्तर पर — महज़ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं लगती; यह 'एक्ट ईस्ट' नीति को कागज़ से निकालकर व्यापार वार्ता की मेज़ पर लाने की कोशिश है। लेकिन असली कसौटी यह है कि टैरिफ और नॉन-टैरिफ बाधाएं हटाने की बात कब ठोस समझौतों में बदलती है — क्योंकि भारत-थाईलैंड व्यापार अपनी क्षमता से काफी नीचे है। रणनीतिक साझेदारी का दर्जा मिले एक साल से भी कम हुआ है, और इतनी जल्दी राजदूत स्तर की बहु-बैठकें संकेत देती हैं कि दोनों पक्ष गति बनाए रखना चाहते हैं — पर नतीजे अभी आने बाकी हैं।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजदूत पुनीत अग्रवाल ने बैंकॉक में किन-किन अधिकारियों से मुलाकात की?
16 जुलाई को उन्होंने थाईलैंड के विदेश मंत्रालय की महानिदेशक उरासा मोंगकोलनाविन और व्यापार प्रतिनिधि चुटिनटोर्न गोंगसाकडी से अलग-अलग बैठकें कीं। इससे पहले 30 जून को उन्होंने थाईलैंड के उपप्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री सिहासक फुआंगकेटकेओ से भी मुलाकात की थी।
भारत-थाईलैंड रणनीतिक साझेदारी कब और कैसे स्थापित हुई?
पिछले वर्ष अप्रैल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैंकॉक यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को औपचारिक रूप से रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया। यह भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति के तहत दक्षिण-पूर्व एशिया में संबंध गहरे करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।
इन बैठकों में व्यापार के किन मुद्दों पर चर्चा हुई?
बातचीत में टैरिफ और नॉन-टैरिफ बाधाओं को दूर करना, दोनों देशों की ताकत वाले क्षेत्रों की पहचान करना और संतुलित व्यापार को बढ़ावा देना प्रमुख विषय रहे। निवेश, जन स्वास्थ्य, पारंपरिक चिकित्सा और कनेक्टिविटी परियोजनाएं भी एजेंडे में शामिल थीं।
भारत और थाईलैंड के बीच राजनयिक संबंध कितने पुराने हैं?
दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध 1947 में स्थापित हुए थे। 2022 में दोनों देशों ने इन संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाया।
थाईलैंड के नए प्रधानमंत्री के साथ भारत के संबंध कैसे हैं?
मार्च में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने थाईलैंड के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल को बधाई दी थी और मिलकर काम करने की इच्छा जताई थी। यह दोनों देशों के नेतृत्व स्तर पर निरंतर संवाद का संकेत है।
राष्ट्र प्रेस
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