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वांग यी और थाईलैंड विदेश मंत्री की ऐतिहासिक बैठक: चीन-थाईलैंड संबंधों को मिली नई दिशा

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वांग यी और थाईलैंड विदेश मंत्री की ऐतिहासिक बैठक: चीन-थाईलैंड संबंधों को मिली नई दिशा

सारांश

बैंकॉक में चीन-थाईलैंड विदेश मंत्री परामर्श तंत्र की तीसरी बैठक में वांग यी और सिहासक ने रणनीतिक सहयोग, 'एक चीन' नीति, सीमा-पार अपराध और लैनकांग-मेकोंग सहयोग पर सहमति जताई। चीन ने थाईलैंड-कंबोडिया विवाद में मध्यस्थता की पेशकश भी की।

मुख्य बातें

25 अप्रैल 2025 को बैंकॉक में चीन-थाईलैंड विदेश मंत्री परामर्श तंत्र की तीसरी बैठक आयोजित हुई।
वांग यी और सिहासक फुआंगकेटकेओ ने रणनीतिक सहयोग, व्यापार और सीमा-पार अपराध पर सहमति जताई।
चीन ने थाईलैंड-कंबोडिया सीमा विवाद में मध्यस्थता मंच उपलब्ध कराने की पेशकश की।
थाईलैंड ने 'एक चीन' सिद्धांत के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
दोनों देशों ने लैनकांग-मेकोंग सहयोग और पूर्वी एशियाई क्षेत्रीय सहयोग पर विचार-विमर्श किया।
यह बैठक अमेरिका-चीन व्यापार तनाव के बीच दक्षिण-पूर्व एशिया में चीन की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता का हिस्सा है।

बैंकॉक, 25 अप्रैल। चीन-थाईलैंड विदेश मंत्री परामर्श तंत्र की तीसरी बैठक शुक्रवार को बैंकॉक में संपन्न हुई, जिसमें चीनी विदेश मंत्री वांग यी और थाईलैंड के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री सिहासक फुआंगकेटकेओ ने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देने पर व्यापक सहमति जताई। यह बैठक ऐसे समय हुई जब दोनों देश अपने कूटनीतिक संबंधों की 50वीं वर्षगांठ के बाद एक नए रणनीतिक चरण में प्रवेश कर रहे हैं।

बैठक की पृष्ठभूमि और महत्व

वांग यी ने बैठक में रेखांकित किया कि बीते वर्ष दोनों देशों ने अपने राजनयिक संबंधों की 50वीं वर्षगांठ मनाई थी। इस अवसर पर थाईलैंड के राजा महा वजीरालोंगकोर्न ने अपनी पहली चीन यात्रा के दौरान राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ 'साझा भविष्य वाले चीन-थाईलैंड समुदाय' के निर्माण पर ऐतिहासिक सहमति बनाई थी।

उन्होंने बताया कि चीन इस वर्ष अपनी 15वीं पंचवर्षीय योजना (2026–2030) के पहले वर्ष में प्रवेश कर चुका है, जबकि थाईलैंड की नई सरकार भी अपने कार्यकाल के प्रारंभिक दौर में है। दोनों देशों के लिए यह संयोग सहयोग को नई गति देने का सुनहरा अवसर है।

रणनीतिक सहयोग और साझा प्राथमिकताएं

वांग यी ने स्पष्ट किया कि चीन, थाईलैंड को अपनी पड़ोसी कूटनीति में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान देता है। दोनों देश आपसी सम्मान, समानता और सहयोग के सिद्धांतों पर चलते हुए संबंधों को प्रगाढ़ बना रहे हैं।

उन्होंने थाईलैंड से चीन के शांतिपूर्ण पुनर्मिलन के प्रति समर्थन जारी रखने की अपेक्षा व्यक्त की। दोनों पक्षों ने उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान बनाए रखने, सीमा-पार अपराधों पर संयुक्त कार्रवाई और वैश्विक पहलों को साझा रूप से आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।

थाईलैंड-कंबोडिया सीमा विवाद में चीन की मध्यस्थता की पेशकश

वांग यी ने अंतरराष्ट्रीय विवादों को बल के बजाय संवाद से सुलझाने के चीन के रुख को दोहराया। उन्होंने थाईलैंड और कंबोडिया दोनों से संयम बरतने, वार्ता के अनुकूल माहौल तैयार करने और सीमा विवाद को शीघ्र सुलझाने का आह्वान किया।

उन्होंने यह भी कहा कि चीन दोनों पड़ोसी देशों के बीच विश्वास बहाली के लिए एक मंच उपलब्ध कराने को तैयार है। यह पेशकश दक्षिण-पूर्व एशिया में चीन की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता को दर्शाती है।

थाईलैंड का रुख: 'एक चीन' नीति पर दृढ़ प्रतिबद्धता

थाईलैंड के उप प्रधानमंत्री सिहासक फुआंगकेटकेओ ने कहा कि उनका देश चीन के साथ संबंधों को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है और 'एक चीन' सिद्धांत का दृढ़ता से पालन करता है। उन्होंने व्यापार, संपर्क, ऑनलाइन जुआ और साइबर धोखाधड़ी के विरुद्ध द्विपक्षीय सहयोग को और सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता जताई।

दोनों पक्षों ने लैनकांग–मेकोंग सहयोग तंत्र और पूर्वी एशियाई क्षेत्रीय सहयोग पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया। यह सहयोग तंत्र मेकोंग नदी से जुड़े छह देशों को एकजुट करता है और इस क्षेत्र में चीन के प्रभाव का एक प्रमुख माध्यम है।

व्यापक संदर्भ: दक्षिण-पूर्व एशिया में चीन की कूटनीतिक रणनीति

गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय हुई है जब अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध अपने चरम पर है और चीन दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ संबंध प्रगाढ़ करने में तेजी से जुटा है। आसियान देशों को साधना बीजिंग की रणनीतिक प्राथमिकता बन गई है।

थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा विवाद में चीन की मध्यस्थता की पेशकश इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि दोनों ही देश चीन के करीबी माने जाते हैं। विश्लेषकों के अनुसार यह कदम क्षेत्रीय विवादों में अमेरिकी प्रभाव को सीमित करने की चीन की व्यापक योजना का हिस्सा है।

आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच 15वीं पंचवर्षीय योजना के तहत नई परियोजनाओं की घोषणा और लैनकांग-मेकोंग सहयोग के अंतर्गत ठोस कदमों की उम्मीद की जा रही है।

(साभार– चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध के बीच बीजिंग की 'पड़ोस-पहले' रणनीति का व्यावहारिक प्रदर्शन है। थाईलैंड-कंबोडिया विवाद में मध्यस्थता की पेशकश करके चीन एक तीर से दो निशाने साध रहा है — दोनों देशों पर अपनी पकड़ मजबूत करना और क्षेत्र में अमेरिकी कूटनीतिक स्थान को सीमित करना। यह उल्लेखनीय है कि जिस समय चीन 'शांतिपूर्ण पुनर्मिलन' और 'संवाद से विवाद सुलझाने' का संदेश दे रहा है, उसी समय दक्षिण चीन सागर में उसकी सैन्य गतिविधियां जारी हैं — यह विरोधाभास नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। भारत के नजरिए से देखें तो दक्षिण-पूर्व एशिया में चीन का बढ़ता प्रभाव नई दिल्ली की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' के लिए एक सीधी चुनौती है।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चीन-थाईलैंड विदेश मंत्री परामर्श तंत्र की तीसरी बैठक कब और कहाँ हुई?
यह बैठक 25 अप्रैल 2025 को बैंकॉक, थाईलैंड में आयोजित हुई। इसमें चीनी विदेश मंत्री वांग यी और थाईलैंड के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री सिहासक फुआंगकेटकेओ ने भाग लिया।
इस बैठक में किन मुद्दों पर सहमति बनी?
दोनों देशों ने रणनीतिक सहयोग, उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान, सीमा-पार अपराध, ऑनलाइन जुआ और साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ सहयोग पर सहमति जताई। साथ ही लैनकांग-मेकोंग सहयोग और पूर्वी एशियाई क्षेत्रीय सहयोग पर भी विचार-विमर्श हुआ।
थाईलैंड-कंबोडिया सीमा विवाद में चीन की क्या भूमिका है?
वांग यी ने दोनों देशों से संयम बरतने और वार्ता का माहौल बनाने का आह्वान किया। चीन ने विश्वास बहाली के लिए मध्यस्थता मंच उपलब्ध कराने की पेशकश की है।
थाईलैंड ने 'एक चीन' नीति पर क्या कहा?
थाईलैंड के उप प्रधानमंत्री सिहासक ने स्पष्ट किया कि उनका देश 'एक चीन' सिद्धांत का दृढ़ता से पालन करता है और चीन के साथ संबंधों को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।
चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना का थाईलैंड से क्या संबंध है?
चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना (2026–2030) इस वर्ष शुरू हो रही है और थाईलैंड की नई सरकार भी अपने प्रारंभिक कार्यकाल में है। दोनों देशों ने इस समयावधि को रणनीतिक सहयोग को नई गति देने के अवसर के रूप में देखा है।
राष्ट्र प्रेस
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