भारत-थाईलैंड रणनीतिक साझेदारी: बैंकॉक में व्यापार-निवेश बढ़ाने पर उच्चस्तरीय चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
भारत और थाईलैंड ने 30 जून 2026 को बैंकॉक में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को नई ऊँचाई देने के लिए उच्चस्तरीय वार्ता की। इस बैठक का नेतृत्व थाईलैंड के उप प्रधानमंत्री सिहासक फुआंगकेटकेओ और थाईलैंड में भारत के राजदूत पुनीत अग्रवाल ने किया। यह बैठक दोनों देशों के बीच गहराती रणनीतिक साझेदारी को और ठोस रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
रणनीतिक साझेदारी की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि पिछले साल अप्रैल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बैंकॉक दौरे के दौरान दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को औपचारिक रूप से रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया था। यह दोनों देशों के 1947 में स्थापित राजनयिक संबंधों की स्वाभाविक परिणति थी। 2022 में दोनों देशों ने कूटनीतिक संबंधों की 75वीं वर्षगाँठ भी मनाई थी।
PM मोदी का थाई नेतृत्व को संदेश
इससे पहले मार्च में प्रधानमंत्री मोदी ने थाईलैंड के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल को बधाई देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा था, "अनुतिन चर्नविराकुल को थाईलैंड राज्य के प्रधानमंत्री चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई। मैं उनके साथ मिलकर काम करने का इंतजार कर रहा हूँ। साथ मिलकर, हम भारत-थाईलैंड रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करेंगे। हमारे संबंध साझा सभ्यता की विरासत, करीबी सांस्कृतिक जुड़ाव और लोगों के बीच मजबूत संबंधों पर आधारित हैं। भारत और थाईलैंड अपने लोगों के लिए शांति, तरक्की और खुशहाली की साझा उम्मीदों में एकजुट हैं।" उल्लेखनीय है कि भूमजैथाई पार्टी के उम्मीदवार चर्नविराकुल को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बहुमत मिलने के बाद थाईलैंड का प्रधानमंत्री पुनः चुना गया था।
साझेदारी के प्रमुख क्षेत्र
थाईलैंड में स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, दोनों देशों के संबंध बहुआयामी हैं और इनमें व्यापार व निवेश, रक्षा व सुरक्षा, कनेक्टिविटी, संस्कृति व पर्यटन, शिक्षा, विज्ञान व तकनीक तथा लोगों के बीच आदान-प्रदान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। विशेष रूप से थाईलैंड की 'एक्ट वेस्ट' नीति भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति की पूरक है, जो दोनों देशों को स्वाभाविक रणनीतिक साझेदार बनाती है।
एक्ट ईस्ट नीति का महत्व
भारत की एक्ट ईस्ट नीति एशिया-प्रशांत क्षेत्र, विशेषकर दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ आर्थिक, रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को सुदृढ़ करने की एक प्रमुख कूटनीतिक पहल है। थाईलैंड इस नीति के केंद्र में है और दोनों देशों के बीच यह तालमेल पूरे आसियान क्षेत्र में भारत की उपस्थिति को मजबूत करता है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने और दक्षिण-पूर्व एशिया में रणनीतिक पैठ बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। दोनों देशों के बीच चल रही यह उच्चस्तरीय वार्ता व्यापार और निवेश के नए द्वार खोलने के साथ-साथ रक्षा सहयोग को भी नई दिशा दे सकती है।