राजदूत विक्रम दोरैस्वामी की क्वानझोउ में अहम बैठक, भारत-चीन व्यापार व सांस्कृतिक सहयोग पर चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
भारत के चीन में राजदूत विक्रम दोरैस्वामी ने 9 जुलाई 2026 को क्वानझोउ के पार्टी सचिव झांग यिगोंग से सौहार्दपूर्ण मुलाकात की, जिसमें व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक क्षेत्रों में भारत-चीन द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा करने के अवसरों पर विस्तृत चर्चा हुई। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दोनों देश सीमा विवाद के बाद से कूटनीतिक संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं।
बैठक में क्या हुई चर्चा
बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि दोनों पक्षों ने भारत और क्वानझोउ के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख किया और इन साझा जड़ों के आधार पर भविष्य में सहयोग को और मजबूत करने की इच्छा जताई। दूतावास के अनुसार, 'दोनों ने व्यापार, निवेश और संस्कृति के क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर बात की।'
काइयुआन मंदिर का दौरा — सांस्कृतिक कूटनीति
राजदूत दोरैस्वामी और महावाणिज्य दूत गिंस मैटम ने फुजियान प्रांत के क्वानझोउ में स्थित 7वीं सदी के ऐतिहासिक काइयुआन मंदिर का दौरा किया। दूतावास ने बताया कि मंदिर के मुख्य मोंक वेन शी दे शेंग ने दोनों अधिकारियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। यह मंदिर भारत और चीन के बीच प्राचीन सांस्कृतिक संबंधों का जीवंत प्रमाण है — इसकी कला और वास्तुकला में स्थानीय तथा प्राचीन भारतीय परंपराओं की स्पष्ट छाप देखी जा सकती है।
सीपीआईएफए प्रमुख से मुलाकात
इससे एक दिन पहले, बुधवार को राजदूत दोरैस्वामी ने चाइनीज पीपल्स इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन अफेयर्स (CPIFA) के अध्यक्ष राजदूत वू केन से भी भेंट की। दूतावास के अनुसार, इस बैठक में लोगों के बीच आपसी संपर्क बढ़ाने में सीपीआईएफए की भूमिका की सराहना की गई — विशेष रूप से ट्रैक-2 और ट्रैक-1.5 संवादों के माध्यम से किए जा रहे प्रयासों की।
उपविदेश मंत्री से पहली औपचारिक मुलाकात
इसी सप्ताह राजदूत दोरैस्वामी ने चीन के विदेश मंत्रालय की उपमंत्री हुआ चुनयिंग से अपनी पहली औपचारिक बैठक की। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि दोनों देशों के नेताओं की उस साझा सोच को आगे बढ़ाया जाए, जिसका उद्देश्य भारत और चीन के बीच स्थिर, सकारात्मक और परस्पर लाभदायक संबंध स्थापित करना है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह कूटनीतिक सक्रियता ऐसे दौर में आई है जब भारत-चीन संबंध धीरे-धीरे सामान्य होने की दिशा में बढ़ रहे हैं। राजदूत स्तर पर इस तरह की बहु-स्तरीय बैठकें — राजनीतिक, सांस्कृतिक और जन-संपर्क — संकेत देती हैं कि दोनों देश द्विपक्षीय संवाद के नए अध्याय की नींव रखने की कोशिश कर रहे हैं।