आतंकवाद के खिलाफ भारत के प्रयासों की यूएन ने की सराहना, सिबी जॉर्ज ने UNOCT प्रमुख से की अहम बैठक
सारांश
Key Takeaways
- सिबी जॉर्ज ने 23 अप्रैल को न्यूयॉर्क में यूएनओसीटी के कार्यवाहक अवर महासचिव एलेक्जेंडर जौएव से मुलाकात की।
- यूएन ने वैश्विक आतंकवाद-विरोधी प्रयासों में भारत के दीर्घकालिक योगदान और कैपेसिटी-बिल्डिंग समर्थन की सराहना की।
- 26 जून से 2 जुलाई 2026 तक होने वाले काउंटर-टेररिज्म वीक की तैयारियों पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी।
- जी-77 की चेयरपर्सन लॉरा डुपुई लासेरे से मुलाकात में दक्षिण-दक्षिण सहयोग और ग्लोबल साउथ की एकजुट आवाज पर जोर दिया गया।
- भारत-यूएन डेवलपमेंट पार्टनरशिप फंड के माध्यम से ग्लोबल साउथ के विकास में भारत की भूमिका पर भी चर्चा हुई।
- भारत यूएन पीसकीपिंग ऑपरेशन में ऐतिहासिक रूप से सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक है, जिसे इस दौरे में पुनः रेखांकित किया गया।
न्यूयॉर्क, 23 अप्रैल: वैश्विक आतंकवाद-विरोधी मोर्चे पर भारत की भूमिका को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली है। भारत के विदेश सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद-विरोधी कार्यालय (यूएनओसीटी) के कार्यवाहक अवर महासचिव एलेक्जेंडर जौएव से न्यूयॉर्क में महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में आतंकवाद के वैश्विक खतरे से निपटने में भारत और यूएनओसीटी के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक में क्या हुई चर्चा
विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए बताया कि सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने काउंटर-टेररिज्म के कार्यवाहक अवर महासचिव एलेक्जेंडर जौएव से मुलाकात की और आतंकवाद के खतरे से निपटने में यूएनओसीटी के साथ भारत के मजबूत सहयोग पर चर्चा की।
बैठक के दौरान कार्यवाहक अवर महासचिव जौएव ने वैश्विक काउंटर-टेररिज्म प्रयासों में भारत के दीर्घकालिक योगदान की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से यूएनओसीटी को दिए गए भारत के समर्थन और कैपेसिटी-बिल्डिंग पहलों में उसकी सक्रिय भागीदारी का उल्लेख किया।
काउंटर-टेररिज्म वीक 2026 की तैयारी
दोनों पक्षों ने 26 जून से 2 जुलाई 2026 तक आयोजित होने वाले काउंटर-टेररिज्म वीक की तैयारियों और आपसी सहयोग को और प्रगाढ़ बनाने के तरीकों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। यूएनओसीटी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि जौएव ने वैश्विक काउंटर-टेररिज्म कोशिशों में भारत की लंबे समय से चली आ रही भूमिका के लिए आभार व्यक्त किया, जिसमें यूएनओसीटी और कैपेसिटी-बिल्डिंग कार्यक्रमों को समर्थन शामिल है।
यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत लंबे समय से सीमा-पार आतंकवाद का शिकार रहा है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाता रहा है। यूएन स्तर पर इस सराहना को भारत की कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
जी-77 अध्यक्ष से मुलाकात और दक्षिण-दक्षिण सहयोग
सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने इसके अलावा उरुग्वे की स्थायी प्रतिनिधि और जी-77 की चेयरपर्सन लॉरा डुपुई लासेरे से भी मुलाकात की। इस बातचीत में दक्षिण-दक्षिण सहयोग को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता तथा आर्थिक एवं विकास संबंधी चुनौतियों पर यूएन में ग्लोबल साउथ की एकजुट आवाज बुलंद करने पर जोर दिया गया।
भारत के स्थायी मिशन ने बताया कि दोनों नेताओं ने भारत-यूएन डेवलपमेंट पार्टनरशिप फंड जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से ग्लोबल साउथ के विकास को गति देने में नई दिल्ली की प्रतिबद्धता पर भी विस्तृत चर्चा की।
यूएन में भारत की व्यापक कूटनीतिक सक्रियता
न्यूयॉर्क में अपने व्यस्त दौरे की शुरुआत सिबी जॉर्ज ने यूएन कॉम्प्लेक्स में महात्मा गांधी की प्रतिमा को श्रद्धांजलि अर्पित करके की। इस दौरे में उन्होंने कई यूएन अधिकारियों और विभिन्न देशों के राजनयिकों से मुलाकात की।
उनकी प्रमुख बैठकों में ऑपरेशनल समर्थन के अंडर-सेक्रेटरी-जनरल अतुल खरे और राजनीतिक एवं शांति स्थापना मामलों के असिस्टेंट सेक्रेटरी-जनरल खालिद खियारी के साथ वार्ता शामिल रही। अतुल खरे के साथ बैठक में यूएन पीसकीपिंग ऑपरेशन के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता को एक बार फिर रेखांकित किया गया।
गौरतलब है कि भारत ऐतिहासिक रूप से यूएन शांति सेना अभियानों में सबसे अधिक सैनिक भेजने वाले देशों में से एक रहा है, जो वैश्विक शांति और सुरक्षा के प्रति उसकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
आने वाले महीनों में काउंटर-टेररिज्म वीक (26 जून–2 जुलाई 2026) की तैयारियों में भारत की भूमिका और भी केंद्रीय होने की संभावना है, जो अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी ढांचे में नई दिल्ली के बढ़ते कद को और पुख्ता करेगी।