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फ्लोर टेस्ट के बाद NDA का बड़ा हमला: 'तेजस्वी की विपक्ष में भी भूमिका होगी सीमित'

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फ्लोर टेस्ट के बाद NDA का बड़ा हमला: 'तेजस्वी की विपक्ष में भी भूमिका होगी सीमित'

सारांश

बिहार विधानसभा में फ्लोर टेस्ट जीतने के बाद एनडीए नेताओं ने तेजस्वी यादव पर तीखे हमले किए। राम कृपाल यादव ने कहा कि विपक्ष में भी तेजस्वी की भूमिका सीमित हो सकती है। विजय कुमार सिन्हा और संजय सरावगी ने सरकार की स्थिरता और विकास के संकल्प को दोहराया।

मुख्य बातें

24 अप्रैल को बिहार विधानसभा में फ्लोर टेस्ट संपन्न हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार ने बहुमत साबित किया।
पूर्व मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि तेजस्वी यादव की विपक्ष में भी भूमिका सीमित हो सकती है।
पूर्व उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने दोहराया कि बिहार में एनडीए सरकार भविष्य में भी बनी रहेगी।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने विश्वास मत को ऐतिहासिक पड़ाव बताते हुए विकास कार्यों को नई गति देने की बात कही।
जदयू अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने नीतीश कुमार के सुशासन मॉडल को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।
एनडीए नेताओं ने राजद पर आरोप लगाया कि विपक्ष के पास ठोस मुद्दों का अभाव है और वह केवल जनता को भ्रमित करने में लगा है।

पटना, 24 अप्रैल: बिहार विधानसभा में फ्लोर टेस्ट सफलतापूर्वक पार करने के बाद एनडीए के वरिष्ठ नेताओं ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और राजद पर जोरदार हमला बोला। नेताओं ने न केवल सरकार की मजबूती का दावा किया, बल्कि यह भी कहा कि आने वाले वर्षों में विपक्ष की भूमिका और भी सिकुड़ती जाएगी।

राम कृपाल यादव का तेजस्वी पर तंज

बिहार सरकार के पूर्व मंत्री राम कृपाल यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को सर्वसम्मति से मिले समर्थन पर बधाई दी। उन्होंने तेजस्वी यादव पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्हें फिलहाल किसी बात की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि आगामी कई वर्षों तक वे सत्ता के करीब भी नहीं पहुंच पाएंगे।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि स्थिति ऐसी बन सकती है जहां विपक्ष में भी तेजस्वी यादव की भूमिका सीमित होकर रह जाए — यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया।

विजय कुमार सिन्हा और संजय सरावगी का बयान

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सभी विधायकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बिहार में एनडीए की सरकार पहले भी थी, आज भी है और भविष्य में भी बनी रहेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में विकसित भारत, विकसित बिहार के संकल्प को दोहराया।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि एक जमीनी कार्यकर्ता का मुख्यमंत्री पद तक पहुंचना पार्टी की विचारधारा की जीत है। तेजस्वी के बयानों पर उन्होंने कहा कि केवल बयानबाजी से राजनीति नहीं चलती — सरकार के पास ठोस जनादेश और संसाधन दोनों हैं।

जदयू अध्यक्ष का सुशासन मॉडल पर जोर

जनता दल यूनाइटेड के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने फ्लोर टेस्ट को एक औपचारिक संवैधानिक प्रक्रिया बताते हुए कहा कि परिणाम पहले से तय था। उन्होंने स्पष्ट किया कि नीतीश कुमार के सुशासन और विकास मॉडल को और अधिक गति से आगे बढ़ाया जाएगा।

विपक्ष पर सामूहिक हमला

एनडीए के अनेक नेताओं ने एकजुट होकर राजद और तेजस्वी यादव पर निशाना साधा। उनका कहना था कि विपक्ष के पास ठोस मुद्दों का सर्वथा अभाव है और वह केवल आलोचना तक सिमट कर रह गया है।

नेताओं ने यह भी कहा कि एनडीए के पास पूर्ण बहुमत होने की जानकारी सबको पहले से थी और सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना तय था। उनके अनुसार विपक्ष का एकमात्र काम जनता को भ्रमित करना रह गया है।

राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह

गौरतलब है कि बिहार में 2025 के अंत या 2026 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। ऐसे में यह फ्लोर टेस्ट महज एक संवैधानिक औपचारिकता नहीं, बल्कि एनडीए के लिए चुनावी ताकत प्रदर्शन का अवसर भी बन गया।

विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी यादव पर किए जा रहे व्यक्तिगत हमले दरअसल राजद को मनोवैज्ञानिक रूप से कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा हैं। आने वाले हफ्तों में सम्राट चौधरी सरकार का पहला नीतिगत एजेंडा और बजट प्राथमिकताएं तय होंगी, जो यह स्पष्ट करेंगी कि नई सरकार विकास के दावों को जमीन पर कैसे उतारती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि 2026 विधानसभा चुनाव से पहले राजद को मनोवैज्ञानिक रूप से कमजोर करने की सुनियोजित रणनीति दिखती है। दिलचस्प यह है कि जिस बिहार में जंगलराज बनाम सुशासन की राजनीति दशकों से चल रही है, वहां सत्तापक्ष अब विपक्ष की प्रासंगिकता पर ही सवाल उठा रहा है। हालांकि बिहार में रोजगार, पलायन और स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत अभी भी चुनौती बनी हुई है जिसे विकास के नारों से ढका नहीं जा सकता। असली परीक्षा फ्लोर टेस्ट नहीं, बल्कि अगले चुनाव में जनता का फैसला होगा।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार विधानसभा में फ्लोर टेस्ट कब हुआ और परिणाम क्या रहा?
बिहार विधानसभा में फ्लोर टेस्ट 24 अप्रैल को हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने बहुमत साबित किया। एनडीए के पास पूर्ण बहुमत था इसलिए परिणाम पहले से तय माना जा रहा था।
तेजस्वी यादव की भूमिका सीमित होने की बात किसने और क्यों कही?
पूर्व मंत्री राम कृपाल यादव ने यह बयान दिया। उनका कहना था कि तेजस्वी यादव आने वाले कई वर्षों तक सत्ता में नहीं आ पाएंगे और विपक्ष में भी उनकी भूमिका सिकुड़ सकती है।
विजय कुमार सिन्हा ने फ्लोर टेस्ट के बाद क्या कहा?
पूर्व उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि बिहार में एनडीए की सरकार पहले भी थी, आज भी है और आगे भी रहेगी। उन्होंने विकसित भारत, विकसित बिहार के लक्ष्य को दोहराया।
बिहार में अगले विधानसभा चुनाव कब होने की संभावना है?
बिहार में अगले विधानसभा चुनाव 2025 के अंत या 2026 की शुरुआत में होने की संभावना है। इसी पृष्ठभूमि में फ्लोर टेस्ट के बाद एनडीए का आक्रामक रुख राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने फ्लोर टेस्ट को लेकर क्या कहा?
उमेश सिंह कुशवाहा ने फ्लोर टेस्ट को एक औपचारिक संवैधानिक प्रक्रिया बताया और कहा कि परिणाम पहले से तय था। उन्होंने नीतीश कुमार के सुशासन मॉडल को आगे बढ़ाने की बात कही।
राष्ट्र प्रेस
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