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एआई और सतत विकास से भारत के इन्फ्रास्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव संभव: समर दावोस में इंडस्ट्री लीडर्स

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एआई और सतत विकास से भारत के इन्फ्रास्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव संभव: समर दावोस में इंडस्ट्री लीडर्स

सारांश

डालियान के समर दावोस मंच पर इंडस्ट्री विशेषज्ञों ने साफ संदेश दिया — भारत की ग्रीन एनर्जी परियोजनाएँ और एआई-संचालित रोबोटिक्स मिलकर देश के इन्फ्रास्ट्रक्चर को नई परिभाषा दे सकते हैं। मुंद्रा से खावड़ा तक के प्रोजेक्ट्स और शहरी सीवर प्रबंधन में एआई — दोनों मिलकर भारत की औद्योगिक तस्वीर बदल रहे हैं।

मुख्य बातें

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के समर दावोस ( डालियान, चीन ) में 24 जून को इंडस्ट्री लीडर्स ने एआई और सतत विकास की भूमिका पर चर्चा की।
जोर्गेन सैंडस्ट्रॉम (WEF) के अनुसार, गुजरात के मुंद्रा, कच्छ और खावड़ा में वर्टिकल इंटीग्रेशन आधारित ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स भारत की एनर्जी ट्रांजिशन की प्रतिबद्धता दर्शाते हैं।
इन परियोजनाओं से ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया उत्पादन को बढ़ावा मिलने की संभावना है, जो परिवहन और कृषि क्षेत्र के लिए उपयोगी होगा।
सोलिनास इंटीग्रिटी के सीईओ दिव्यांशु कुमार ने बताया कि एआई-पावर्ड रोबोटिक्स भारत में सीवर और पाइपलाइन रखरखाव को बेहतर बना रहे हैं और नगर निगमों की परिचालन लागत घटा रहे हैं।
WEF सामूहिक कार्रवाई को प्राथमिकता दे रहा है — कंपनियों और संस्थानों को एकजुट होकर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित तकनीक और सतत विकास की साझेदारी भारत के महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा दे सकती है — यह बात इंडस्ट्री विशेषज्ञों ने 24 जून को डालियान, चीन में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की 'एनुअल मीटिंग्स ऑफ द न्यू चैंपियंस' (समर दावोस) के दौरान कही। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के पास रिन्यूएबल एनर्जी और सस्टेनेबल औद्योगिक विकास के क्षेत्र में असाधारण संभावनाएँ हैं, जिन्हें एआई की मदद से और अधिक प्रभावशाली बनाया जा सकता है।

वर्टिकल इंटीग्रेशन: मुंद्रा और कच्छ के प्रोजेक्ट्स से सीख

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के 'ट्रांसफॉर्मिंग इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम प्रोग्राम' के प्रमुख जोर्गेन सैंडस्ट्रॉम ने बताया कि गुजरात के मुंद्रा और कच्छ रेगिस्तान के आसपास स्थित ऊर्जा परियोजनाओं तथा हैदराबाद में एनर्जी प्रोजेक्ट्स के दौरे के दौरान उन्होंने भारत में ग्रीन एनर्जी पहलों की व्यापकता को करीब से देखा।

सैंडस्ट्रॉम ने कहा, "मुंद्रा और कच्छ रेगिस्तान के आस-पास मैंने जो प्रोजेक्ट देखे हैं, वे वर्टिकल इंटीग्रेशन पर आधारित हैं। इसमें एक तरफ से साफ-सुथरी बिजली मिलती है और दूसरी तरफ ग्रीन अमोनिया, ग्रीन स्टील या इसी तरह के दूसरे साफ-सुथरे प्रोडक्ट या सर्विस मिलती हैं।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस मॉडल से शिपिंग और ट्रांसपोर्ट को अधिक स्वच्छ बनाया जा सकता है और उद्योगों का इलेक्ट्रिफिकेशन किया जा सकता है।

भारत की एनर्जी ट्रांजिशन की प्रतिबद्धता

सैंडस्ट्रॉम के अनुसार, गुजरात के खावड़ा इलाके में बड़े पैमाने पर स्थापित सोलर सिस्टम और हैदराबाद में पंप स्टोरेज परियोजनाएँ देश की ऊर्जा बदलाव के प्रति प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि इन बदलावों से आगे चलकर ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया के उत्पादन में मदद मिल सकती है, जिनका उपयोग परिवहन, कृषि और अन्य क्षेत्रों में होता है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन के लक्ष्य की ओर बढ़ रही है और रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता को तेज़ी से बढ़ाने पर ज़ोर दे रही है। सैंडस्ट्रॉम ने स्पष्ट किया कि पारंपरिक प्रणालियों से सस्टेनेबल मॉडल की ओर संक्रमण के लिए बड़े पैमाने पर योजना, तालमेल और एक व्यवस्थित दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है।

सामूहिक कार्रवाई पर WEF का जोर

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की औद्योगिक भूमिका पर बोलते हुए सैंडस्ट्रॉम ने कहा कि आर्थिक विकास के लिए केवल उद्योग ही नहीं, बल्कि कई नीतिगत क्षेत्रों पर भी एक साथ ध्यान देने की ज़रूरत है। उन्होंने बताया कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम सामूहिक कार्रवाई को प्राथमिकता दे रहा है और कंपनियों तथा संस्थानों को अलग-थलग काम करने के बजाय मिलकर काम करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। गौरतलब है कि यह वैश्विक मंच ऐसे समय में इस एजेंडे को आगे बढ़ा रहा है जब दुनियाभर में औद्योगिक डीकार्बनाइज़ेशन की गति तेज़ हो रही है।

एआई से शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रबंधन में क्रांति

सोलिनास इंटीग्रिटी के फाउंडर और सीईओ दिव्यांशु कुमार ने शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रबंधन में एआई की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एआई-संचालित रोबोटिक समाधान पूरे भारत में सीवर और पाइपलाइन के रखरखाव के तरीके को बदल रहे हैं।

कुमार के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भूमिगत सीवर और जल नेटवर्क में रुकावट, रिसाव और संरचनात्मक कमियों का सटीक पता लगाने में सहायक है। रोबोटिक निरीक्षण से नगर निगमों को इन्फ्रास्ट्रक्चर का रखरखाव अधिक कुशलता से करने और परिचालन लागत घटाने में मदद मिल रही है — जो भारत के तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण कदम है।

विशेषज्ञों का मानना है कि एआई और सतत विकास का यह संयोजन आने वाले वर्षों में भारत के इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी स्थान दिला सकता है, बशर्ते नीतिगत समर्थन और निजी निवेश एक साथ आगे बढ़ें।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि मुंद्रा और खावड़ा जैसे 'शोकेस प्रोजेक्ट्स' से मिली सीख देश के बाकी हिस्सों तक कब और कैसे पहुँचेगी। ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया की संभावनाएँ वास्तविक हैं, परंतु इनकी व्यावसायिक व्यवहार्यता अभी भी लागत और ग्रिड इन्फ्रास्ट्रक्चर की बाधाओं से जूझ रही है। एआई-रोबोटिक्स से शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रबंधन में जो बदलाव की बात हो रही है, वह तभी व्यापक असर दिखाएगी जब नगर निगमों के पास तकनीक अपनाने की क्षमता और बजट दोनों हों — जो अभी अधिकांश छोटे शहरों में सीमित है। वैश्विक मंचों पर भारत की तारीफ और ज़मीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई को पाटना ही असली चुनौती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

समर दावोस 2026 में भारत के इन्फ्रास्ट्रक्चर पर क्या चर्चा हुई?
डालियान (चीन) में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के समर दावोस में 24 जून को इंडस्ट्री लीडर्स ने कहा कि एआई तकनीक और सतत विकास मिलकर भारत के क्रिटिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। मुंद्रा, खावड़ा और हैदराबाद की ग्रीन एनर्जी परियोजनाओं को भारत की एनर्जी ट्रांजिशन के उदाहरण के रूप में पेश किया गया।
वर्टिकल इंटीग्रेशन मॉडल भारत की ऊर्जा क्षेत्र के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
वर्टिकल इंटीग्रेशन मॉडल में एक ही प्रणाली से स्वच्छ बिजली उत्पादन के साथ-साथ ग्रीन अमोनिया, ग्रीन स्टील जैसे उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं। WEF के जोर्गेन सैंडस्ट्रॉम के अनुसार, यह मॉडल शिपिंग, ट्रांसपोर्ट और उद्योगों के इलेक्ट्रिफिकेशन को बढ़ावा दे सकता है और दीर्घकालिक आर्थिक विकास सुनिश्चित कर सकता है।
एआई भारत में सीवर और पाइपलाइन प्रबंधन को कैसे बदल रहा है?
सोलिनास इंटीग्रिटी के सीईओ दिव्यांशु कुमार के अनुसार, एआई-पावर्ड रोबोटिक सिस्टम भूमिगत सीवर और जल नेटवर्क में रुकावट, रिसाव और संरचनात्मक कमियों का सटीक पता लगाते हैं। इससे नगर निगमों को इन्फ्रास्ट्रक्चर का रखरखाव अधिक कुशलता से करने और परिचालन लागत घटाने में मदद मिल रही है।
भारत में ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया का भविष्य क्या है?
WEF के जोर्गेन सैंडस्ट्रॉम के अनुसार, भारत की मौजूदा सोलर और रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाओं से आगे चलकर ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया के उत्पादन को बल मिल सकता है। इनका उपयोग परिवहन, कृषि और अन्य क्षेत्रों में किया जा सकता है, जिससे भारत की डीकार्बनाइज़ेशन यात्रा को गति मिलेगी।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम भारत के औद्योगिक बदलाव में क्या भूमिका निभा रहा है?
WEF का 'ट्रांसफॉर्मिंग इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम प्रोग्राम' कंपनियों और संस्थानों को सामूहिक कार्रवाई के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। फोरम का जोर इस बात पर है कि आर्थिक विकास के लिए केवल उद्योग नहीं, बल्कि नीतिगत क्षेत्रों में भी समन्वित प्रयास ज़रूरी हैं।
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