एआई और रोबोटिक्स से बदलेगी खेती: SKUAST सम्मेलन में एलजी मनोज सिन्हा का वैश्विक नेतृत्व का आह्वान
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 5 अक्टूबर 2026 को श्रीनगर के शालीमार स्थित एसकेयूएएसटी-कश्मीर में आयोजित एक प्रमुख कृषि सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत को खाद्य सुरक्षा की सीमाओं से आगे निकलकर कृषि क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभानी होगी। उन्होंने एआई, रोबोटिक्स और स्मार्ट तकनीक को भविष्य की खेती का आधार बताया।
सम्मेलन और उसके विषय
इंडियन सोसायटी ऑफ एग्रीकल्चरल इंजीनियर्स (आईएसएई) का 60वाँ वार्षिक डायमंड जुबली सम्मेलन 5 से 7 अक्टूबर 2026 तक आयोजित हो रहा है। इस सम्मेलन के दो केंद्रीय विषय हैं — 'स्मार्ट खेती में महिलाओं के नेतृत्व वाले इंजीनियरिंग इनोवेशन' और 'जेन-ज़ी खेती के लिए एआई और रोबोटिक्स'। इसके साथ ही स्मार्ट खेती पर एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी भी आयोजित की जा रही है।
कार्यक्रम में एसकेयूएएसटी-कश्मीर के कुलपति, आईएसएई के पदाधिकारी, वैज्ञानिक, छात्र और देशभर से आए किसान शामिल हुए। गौरतलब है कि यह आयोजन ऐसे समय पर हो रहा है जब देशभर में कृषि-तकनीक को लेकर नीतिगत चर्चाएँ तेज़ हो रही हैं।
महिलाओं और युवा किसानों पर जोर
उपराज्यपाल सिन्हा ने कहा कि महिलाएं कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों की रीढ़ हैं और इनोवेशन में उनका नेतृत्व एक टिकाऊ भविष्य का निर्माण करेगा। उन्होंने सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया, ताकि छोटे और सीमांत किसानों को सुलभ तकनीक, एआई और रोबोटिक्स से सशक्त बनाया जा सके और जेन-ज़ी किसानों के लिए खेती को स्मार्ट, टिकाऊ और मुनाफे वाला बनाया जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर ने कृषि के समग्र विकास में बड़ी प्रगति की है और एसकेयूएएसटी-कश्मीर कृषि इनोवेशन में एक प्रमुख संस्थान के रूप में उभरा है।
भारत की कृषि में वैश्विक स्थिति
भारत दालों, मोटे अनाजों, सूखे प्याज, नारियल और मसालों के उत्पादन में विश्व में पहले स्थान पर है, जबकि चावल, गेहूं, फल, सब्ज़ियाँ, गन्ना, कपास और चाय उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात वित्त वर्ष 2024-25 में 51.1 अरब डॉलर तक पहुँच गया, जिसमें प्रोसेस्ड फूड की हिस्सेदारी 20.4 प्रतिशत रही।
'इंदौर घोषणा' को अपनाने के बाद भारत ने बीज अधिकारों और डिजिटल खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण ब्रिक्स पहलों का नेतृत्व किया और मृदा क्षरण व मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए 'ब्रिक्स लैंड रेस्टोरेशन पार्टनरशिप' की शुरुआत की।
तकनीक और नीतिगत प्रयास
2,500 से अधिक एग-टेक स्टार्टअप्स के सहयोग से भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्पेस एप्लिकेशन, प्रिसिजन फार्मिंग और ड्रोन तकनीक — जिसमें 'नमो ड्रोन दीदी' जैसी पहल शामिल है — को अपना रहा है। नेचुरल फार्मिंग पर नेशनल मिशन, सॉइल हेल्थ कार्ड, पीएम-कुसुम (सौर-ऊर्जा चालित फार्म पंप) और नैनो फर्टिलाइजर (नैनो-यूरिया एवं नैनो-डीएपी) जैसी पहलें टिकाऊ और कम-उत्सर्जन वाली खेती को बढ़ावा दे रही हैं।
2026-27 के केंद्रीय बजट में कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के लिए ₹1.45 लाख करोड़ (₹1,45,429 करोड़) आवंटित किए गए हैं। ई-नॉम प्लेटफॉर्म 1,656 मंडियों में 1.8 करोड़ किसानों को जोड़ता है, जबकि एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड डिजिटल सार्वजनिक ढाँचे को और मज़बूत कर रहा है।
यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब भारतीय कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी-आधारित परिवर्तन को गति देने के लिए नीतिगत और संस्थागत प्रयास दोनों तेज़ हो रहे हैं।