29 सितंबर 2026
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एआई कौशल से युवाओं को लैस करना जरूरी: श्रम मंत्री डॉ. मांडविया, 1 करोड़ युवाओं को ट्रेनिंग का लक्ष्य

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एआई कौशल से युवाओं को लैस करना जरूरी: श्रम मंत्री डॉ. मांडविया, 1 करोड़ युवाओं को ट्रेनिंग का लक्ष्य

सारांश

श्रम मंत्री डॉ. मांडविया का संदेश साफ है — एआई युग में कौशलहीन युवा भारत के लिए सबसे बड़ा जोखिम है। 1 करोड़ युवाओं को एआई ट्रेनिंग का लक्ष्य, 101 करोड़ लोगों को सामाजिक सुरक्षा कवच, और 316 जिलों में 'श्रम संवाद' — यह सिर्फ घोषणाएँ नहीं, भारत के श्रम ढाँचे को नए सिरे से गढ़ने की कोशिश है।

मुख्य बातें

केंद्रीय श्रम मंत्री डॉ.
मनसुख मांडविया ने 28 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में युवाओं को एआई, ऑटोमेशन और रोबोटिक्स में प्रशिक्षित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस 2026 पर अगले एक वर्ष में 1 करोड़ युवाओं को एआई कौशल ट्रेनिंग देने की घोषणा की थी।
सामाजिक सुरक्षा का दायरा 2015 में 19% से बढ़कर अब 68% यानी 101 करोड़ लोगों तक पहुँचा; ILO ने इसे मान्यता दी।
'श्रम संवाद' अभियान के तहत अगले 90 दिनों में 36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 316 जिलों को कवर किया जाएगा।
2017-2023 के दौरान GDP में 1% वृद्धि पर रोजगार में 1.11% की बढ़ोतरी दर्ज — पहले यह अनुपात केवल 0.008% था।

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने 28 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि भारत की श्रम और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को बदलती आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप ढालना अनिवार्य है, और इसके केंद्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े कौशल का विस्तार होना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि देश के युवाओं को एआई, ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और अन्य अत्याधुनिक तकनीकों में दक्ष बनाए बिना भारत वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पीछे रह सकता है।

सम्मेलन में उद्घाटन भाषण

डॉ. मांडविया भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) और एम्प्लॉयर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (EFI) द्वारा आयोजित 'नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन इंडस्ट्रियल रिलेशंस एंड लेबर एंड अवॉर्ड्स 2026' का उद्घाटन कर रहे थे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2026 के स्वतंत्रता दिवस संबोधन का उल्लेख करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री ने लाल किले से घोषणा की थी कि अगले एक वर्ष में 1 करोड़ युवाओं को एआई से संबंधित कौशल की ट्रेनिंग दी जाएगी।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर स्वचालन के कारण पारंपरिक रोजगार के स्वरूप में तेज बदलाव हो रहे हैं और भारत जैसे युवा-बहुल देश के लिए कौशल-उन्नयन एक रणनीतिक अनिवार्यता बन चुका है।

सामाजिक सुरक्षा के दायरे में ऐतिहासिक विस्तार

मंत्री ने पिछले एक दशक में सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में हुई प्रगति के आँकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि 2015 में देश की केवल 19 प्रतिशत आबादी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में थी, जो अब बढ़कर 101 करोड़ लोग यानी लगभग 68 प्रतिशत आबादी तक पहुँच गई है। उन्होंने बताया कि इस उपलब्धि को अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने भी मान्यता दी है।

गौरतलब है कि यह विस्तार केवल संख्याओं तक सीमित नहीं है — इसमें असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिकों को पहली बार औपचारिक सुरक्षा कवच मिला है, जो भारत के श्रम सुधारों की दिशा में एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव माना जा रहा है।

उद्योग-श्रमिक सहयोग पर नई सोच

डॉ. मांडविया ने उस पुरानी धारणा को बदलने की अपील की जिसमें उद्योग-हितैषी नीतियों को मजदूर-विरोधी और श्रमिक-हितैषी नीतियों को उद्योग-विरोधी समझा जाता है। उन्होंने उद्योगों और कर्मचारियों दोनों से राष्ट्र निर्माण में साझेदार बनकर आगे बढ़ने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा, 'जहां संवाद है, वहां समाधान है।' यह टिप्पणी औद्योगिक संबंधों में लगातार संवाद और विचार-विमर्श की अहमियत को रेखांकित करती है।

'श्रम संवाद' अभियान: 316 जिलों तक पहुँच

श्रम मंत्रालय ने श्रम संहिताओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए 'श्रम संवाद' नामक एक व्यापक अभियान शुरू किया है। इसके तहत अगले 90 दिनों में सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 316 जिलों के औद्योगिक क्षेत्रों को कवर किया जाएगा। यह अभियान श्रमिकों और नियोक्ताओं दोनों को नए श्रम कानूनों की जानकारी देने पर केंद्रित है।

आर्थिक वृद्धि और रोजगार का सकारात्मक अनुपात

भारत की 7.8 प्रतिशत की जीडीपी विकास दर का उल्लेख करते हुए डॉ. मांडविया ने बताया कि हाल के वर्षों में आर्थिक वृद्धि के साथ रोजगार के अवसरों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने आँकड़ों के अनुसार बताया कि 2017 से 2023 के दौरान अर्थव्यवस्था में 1 प्रतिशत की वृद्धि के साथ रोजगार में 1.11 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि इससे पहले यह अनुपात मात्र 0.008 प्रतिशत था — एक उल्लेखनीय सुधार जिसे सरकार अपनी नीतियों की सफलता के प्रमाण के रूप में पेश कर रही है।

आगे देखें तो 'श्रम संवाद' अभियान की सफलता और एआई कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम का क्रियान्वयन यह तय करेगा कि ये घोषणाएँ जमीनी स्तर पर कितना बदलाव ला पाती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 1 करोड़ युवाओं को एआई ट्रेनिंग का लक्ष्य किस गुणवत्ता और किस समयसीमा में पूरा होगा। भारत में कौशल विकास कार्यक्रमों का इतिहास बताता है कि प्रमाण-पत्र बाँटना और रोजगार-योग्य कौशल देना दो अलग बातें हैं। 'श्रम संवाद' जैसे अभियान जागरूकता तो फैला सकते हैं, पर जब तक श्रम संहिताओं का राज्य-स्तरीय क्रियान्वयन अधूरा है, तब तक इनकी व्यावहारिक उपयोगिता सीमित रहेगी — यह वह पहलू है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नजरअंदाज करती है।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. मनसुख मांडविया ने युवाओं के लिए एआई कौशल पर क्या कहा?
केंद्रीय श्रम मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने 28 सितंबर 2026 को कहा कि भारत के युवाओं को एआई, ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और आधुनिक तकनीकों में प्रशिक्षित करना अनिवार्य है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की उस घोषणा का भी उल्लेख किया जिसमें अगले एक वर्ष में 1 करोड़ युवाओं को एआई कौशल ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा गया है।
भारत में सामाजिक सुरक्षा का दायरा अब कितना है?
डॉ. मांडविया के अनुसार, 2015 में देश की केवल 19 प्रतिशत आबादी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में थी, जो अब बढ़कर 101 करोड़ लोग यानी करीब 68 प्रतिशत हो गई है। इस उपलब्धि को अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने भी मान्यता दी है।
'श्रम संवाद' अभियान क्या है और इसका दायरा कितना है?
'श्रम संवाद' श्रम मंत्रालय का एक जागरूकता अभियान है जिसका उद्देश्य नई श्रम संहिताओं के बारे में नियोक्ताओं और श्रमिकों को जानकारी देना है। इसके तहत अगले 90 दिनों में देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 316 जिलों के औद्योगिक क्षेत्रों को कवर किया जाएगा।
2017 से 2023 के बीच भारत में रोजगार वृद्धि का अनुपात क्या रहा?
आँकड़ों के अनुसार, 2017 से 2023 के दौरान अर्थव्यवस्था में 1 प्रतिशत की वृद्धि के साथ रोजगार में 1.11 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे पहले यह अनुपात मात्र 0.008 प्रतिशत था, जो एक बड़े सुधार का संकेत है।
CII और EFI के सम्मेलन में श्रम मंत्री ने उद्योग-श्रमिक संबंधों पर क्या अपील की?
डॉ. मांडविया ने उस पुरानी सोच को बदलने की जरूरत बताई जिसमें उद्योग-हितैषी नीतियों को मजदूर-विरोधी माना जाता है। उन्होंने उद्योगों और कर्मचारियों दोनों से राष्ट्र निर्माण में साझेदार बनकर एकजुट होकर आगे बढ़ने की अपील की और कहा कि 'जहां संवाद है, वहां समाधान है।'
राष्ट्र प्रेस
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