भारत में एआई कौशल की बढ़ती मांग: इंजीनियरिंग और आईटी से हुई आगे
सारांश
Key Takeaways
- एआई कौशल की मांग पारंपरिक इंजीनियरिंग और आईटी से बढ़ी है।
- 82%25 नियोक्ता कुशल प्रतिभा की कमी का सामना कर रहे हैं।
- रिपोर्ट में एआई साक्षरता और एआई मॉडल डेवलपमेंट को चुनौतीपूर्ण कौशल बताया गया है।
- कंपनियाँ विभिन्न रणनीतियाँ अपनाकर इस कमी को पूरा करने का प्रयास कर रही हैं।
- प्रतिभा की कमी ऑटोमोबाइल और आईटी सेवाओं जैसे क्षेत्रों में सबसे अधिक है।
नई दिल्ली, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत में पहली बार एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से संबंधित कौशल की मांग पारंपरिक इंजीनियरिंग और आईटी क्षमताओं को पीछे छोड़ चुकी है। अब एआई स्किल्स नियोक्ताओं के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण कौशल बन गए हैं। शुक्रवार को जारी की गई मैनपावरग्रुप की रिपोर्ट में यह तथ्य उजागर हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 82 प्रतिशत नियोक्ताओं ने 2026 में कुशल प्रतिभा की खोज में कठिनाई का सामना करने की बात कही है।
इसमें उल्लेख है कि एआई साक्षरता और एआई मॉडल डेवलपमेंट जैसी क्षमताएं सबसे कठिन कौशलों में शामिल हैं। पिछले वर्ष की तुलना में प्रतिभा की कमी का दबाव बढ़ा है, जो वैश्विक औसत 72 प्रतिशत से काफी अधिक है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विश्व स्तर पर जिन कौशलों की सबसे अधिक कमी है, उनमें एआई साक्षरता, एआई मॉडल डेवलपमेंट, इंजीनियरिंग, सेल्स और मार्केटिंग तथा मैन्युफैक्चरिंग और प्रोडक्शन शामिल हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि एआई से जुड़े कौशल अब वैश्विक स्तर पर दुर्लभ हो गए हैं।
भारत उन देशों में है जहाँ प्रतिभा की कमी सबसे अधिक है। इस सूची में स्लोवाकिया (87 प्रतिशत), ग्रीस (84 प्रतिशत) और जापान (84 प्रतिशत) भी शामिल हैं।
41 देशों के 39,000 से अधिक नियोक्ताओं पर किए गए इस शोध में यह पाया गया है कि वैश्विक स्तर पर भर्ती में थोड़ी राहत मिली है, जो 2025 में 74 प्रतिशत से घटकर 72 प्रतिशत हो गई है, लेकिन एआई कौशल के लिए प्रतिस्पर्धा बेहद तीव्र हो गई है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि संगठनों को उन्नत तकनीकी विशेषज्ञता के साथ-साथ आवश्यक सॉफ्ट स्किल्स की भी कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे स्किल मिसमैच की समस्या बढ़ रही है।
मैनपावरग्रुप इंडिया और मिडिल ईस्ट के मैनेजिंग डायरेक्टर संदीप गुलाटी ने कहा, "भारत में 82 प्रतिशत टैलेंट की कमी यह दर्शाती है कि श्रम बाजार में यह बदलाव अस्थायी नहीं, बल्कि संरचनात्मक है।"
रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियां इस चुनौती का सामना करने के लिए विभिन्न रणनीतियाँ अपना रही हैं। लगभग 37 प्रतिशत कंपनियाँ कर्मचारियों को अपस्किल और रीस्किल करने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं, 35 प्रतिशत नए टैलेंट पूल की तलाश में हैं, 26 प्रतिशत ने बेहतर कार्य समय की पेशकश की है, और 25 प्रतिशत ने लोकेशन फ्लेक्सिबिलिटी प्रदान की है।
यह टैलेंट की कमी लगभग सभी उद्योगों में देखी जा रही है। सबसे अधिक दबाव ऑटोमोबाइल (94 प्रतिशत), सूचना एवं वित्त या बीमा (85 प्रतिशत), प्रोफेशनल, वैज्ञानिक और तकनीकी सेवाएं, निर्माण और रियल एस्टेट तथा टेक और आईटी सेवाओं (84 प्रतिशत) में है।