डिजिटल निगरानी से पोषण अभियान में 14 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों और 9 करोड़ लाभार्थियों का समावेश

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डिजिटल निगरानी से पोषण अभियान में 14 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों और 9 करोड़ लाभार्थियों का समावेश

सारांश

सरकार ने पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन के माध्यम से 14 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों की निगरानी की शुरुआत की है, जो 9 करोड़ लाभार्थियों को सीधा लाभ पहुंचा रही है। यह पोषण अभियान का एक नया युग है।

Key Takeaways

  • डिजिटल निगरानी से आंगनवाड़ी केंद्रों की संख्या 14 लाख से अधिक हुई है।
  • 9 करोड़ लाभार्थियों की रियल-टाइम निगरानी संभव हुई है।
  • तकनीकी और सामुदायिक भागीदारी पर जोर दिया गया है।
  • मिशन पोषण 2.0 में सेवा की गुणवत्ता में सुधार किया गया है।
  • कमजोर वर्गों को समग्र सहायता प्रदान करने के लिए पोषण को विभिन्न क्षेत्रों से जोड़ा गया है।

नई दिल्ली, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। सरकार ने मंगलवार को जानकारी दी कि पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन जैसे डिजिटल उपकरणों के माध्यम से देशभर के 14 लाख से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों और लगभग 9 करोड़ लाभार्थियों की लगभग रियल-टाइम निगरानी अब संभव हो गई है।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि पोषण अभियान के 8 साल पूरे होने पर, इसके 'जन आंदोलन' मॉडल ने पूरे देश में नागरिकों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पोषण माह और पोषण पखवाड़ा जैसे अभियानों के माध्यम से अब तक 150 करोड़ से अधिक गतिविधियां आयोजित की जा चुकी हैं।

बयान में यह भी कहा गया है कि यह मिशन पोषण से संबंधित समस्याओं का समाधान खोजने के लिए तकनीकी, बेहतर तालमेल (कन्वर्जेंस) और समुदाय की भागीदारी पर जोर देता है।

कार्यक्रम के विकास ने यह स्पष्ट किया है कि विभिन्न क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय, प्रभावी सेवा वितरण और लोगों की आदतों में बदलाव लाने के निरंतर प्रयास पोषण सुधार के लिए आवश्यक हैं।

'मिशन पोषण 2.0' में सुधार के साथ सेवा की गुणवत्ता में वृद्धि, बच्चों की प्रारंभिक देखभाल को बढ़ावा देने और अंतिम स्तर तक सेवाएं पहुंचाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

सरकार ने यह भी बताया कि इस मिशन के अंतर्गत पोषण को स्वास्थ्य, शिक्षा, प्रारंभिक बाल देखभाल और सामुदायिक भागीदारी के साथ जोड़ा गया है ताकि कमजोर वर्गों को समग्र सहायता मिल सके।

8 मार्च 2018 को आरंभ हुआ 'पोषण अभियान' भारत के दृष्टिकोण में एक महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आया है। पहले, पोषण को केवल कल्याण योजना माना जाता था, अब इसे मानव संसाधन विकास, सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) और दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि से जोड़ा जा रहा है।

इस मिशन के तहत 26 से अधिक मंत्रालयों और विभागों को एक साथ लाकर पोषण सुधार के लिए एकीकृत संरचना विकसित की गई है, जिसमें स्वच्छता, शिक्षा, जल, महिला सशक्तिकरण और आय जैसे पहलुओं पर समग्र रूप से कार्य किया जा रहा है।

सबसे महत्वपूर्ण यह है कि पोषण अभियान को 'लाइफसाइकिल' और 'प्रिवेंटिव' यानी रोकथाम के दृष्टिकोण से तैयार किया गया है। इसका ध्यान कुपोषण के इलाज पर नहीं, बल्कि उसे रोकने पर है।

यह मिशन विशेष रूप से बच्चे के जीवन के पहले 1,000 दिनों (गर्भावस्था से लेकर 2 वर्ष की आयु तक) पर ध्यान केंद्रित करता है, जो शारीरिक विकास, मानसिक विकास और भविष्य की सेहत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

इसके अतिरिक्त, आंगनवाड़ी केंद्रों, सरकारी स्कूलों और ग्राम पंचायतों में 'पोषण वाटिका' यानी न्यूट्री-गार्डन भी बनाए जा रहे हैं, जिससे लोगों को सस्ते और आसानी से उपलब्ध पौष्टिक फल, सब्जियां और औषधीय पौधे मिल सकें।

Point of View

जो तकनीकी क्षेत्र में नवाचार को दर्शाता है। यह न केवल लाभार्थियों की संख्या को बढ़ाता है, बल्कि समग्र पोषण स्थिति में सुधार की दिशा में भी एक मजबूत कदम है।
NationPress
14/04/2026

Frequently Asked Questions

पोषण अभियान क्या है?
पोषण अभियान एक सरकारी पहल है जो देश में कुपोषण को कम करने और लोगों को पोषण संबंधी सेवाएं प्रदान करने के लिए शुरू की गई है।
डिजिटल टूल्स का उपयोग कैसे किया जा रहा है?
डिजिटल टूल्स जैसे पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन के माध्यम से आंगनवाड़ी केंद्रों और लाभार्थियों की निगरानी की जा रही है।
पोषण अभियान के लाभार्थी कौन हैं?
पोषण अभियान के लाभार्थियों में मुख्य रूप से बच्चे, गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली माताएं शामिल हैं।
क्या पोषण अभियान केवल सरकारी है?
नहीं, यह अभियान सामुदायिक भागीदारी और विभिन्न मंत्रालयों के सहयोग से चलाया जा रहा है।
पोषण वाटिका क्या है?
पोषण वाटिका एक प्रकार का न्यूट्री-गार्डन है, जिसमें पौष्टिक फलों, सब्जियों और औषधीय पौधों का उत्पादन किया जाता है।
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