गोल्ड लोन में तीन वर्षों में चार गुना वृद्धि, औसत लोन राशि 2 लाख रुपए तक पहुँची

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गोल्ड लोन में तीन वर्षों में चार गुना वृद्धि, औसत लोन राशि 2 लाख रुपए तक पहुँची

सारांश

गोल्ड लोन में हाल के वर्षों में चार गुना वृद्धि ने भारतीय वित्तीय परिदृश्य को बदल दिया है। औसत लोन राशि बढ़कर 2 लाख रुपए हो गई है, जो उधारकर्ताओं की मांग में वृद्धि और गोल्ड लोन की स्वीकार्यता को दर्शाता है। जानिए इस वृद्धि के पीछे के कारण और इसके प्रभाव।

Key Takeaways

  • गोल्ड लोन में चार गुना वृद्धि हुई है।
  • औसत लोन राशि 2 लाख रुपए तक पहुँच गई है।
  • उधारकर्ताओं की मांग में वृद्धि और स्वीकृति को दर्शाता है।
  • एनबीएफसी की गोल्ड लोन हिस्सेदारी बढ़ी है।
  • प्रति खाता औसत गोल्ड लोन बैलेंस में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

नई दिल्ली, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पिछले तीन वर्षों में भारत में गोल्ड लोन में चार गुना वृद्धि हुई है, और औसत लोन राशि अब लगभग 2 लाख रुपए तक पहुँच गई है। यह उधारकर्ताओं की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि और गोल्ड लोन की बढ़ती स्वीकृति को दर्शाता है। यह जानकारी मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में प्रदान की गई।

ट्रांसयूनियन सिबिल द्वारा प्रस्तुत एक रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2022 से गोल्ड लोन बैलेंस में लगभग चार गुना वृद्धि हुई है। इससे भारत के रिटेल लोन पोर्टफोलियो में गोल्ड लोन की हिस्सेदारी 5.9 प्रतिशत से बढ़कर दिसंबर 2025 तक लगभग 11 प्रतिशत होने का अनुमान है।

रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि गोल्ड लोन में यह वृद्धि उधारकर्ताओं की बढ़ती स्वीकृति, टिकट राशि में बढ़ोतरी, उधारदाताओं की सहभागिता में वृद्धि और उधारकर्ताओं के प्रोफाइल में परिवर्तन के कारण हुई है। इस क्षेत्र में महिलाओं और बेहतर क्रेडिट इतिहास वाले व्यक्तियों सहित अधिक उपभोक्ता शामिल हो रहे हैं।

इसके अलावा, नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (एनबीएफसी) की गोल्ड लोन बैलेंस में हिस्सेदारी मार्च 2022 में 7 प्रतिशत से बढ़कर दिसंबर 2025 में 11 प्रतिशत होने की उम्मीद है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने भी अपनी स्थिति को मजबूत किया है, जिनकी हिस्सेदारी इसी अवधि में 57 प्रतिशत से बढ़कर 62 प्रतिशत हो गई है।

प्रति खाता औसत गोल्ड लोन बैलेंस मार्च 2022 में 1.1 लाख रुपए से बढ़कर दिसंबर 2025 में 1.9 लाख रुपए होने का अनुमान है।

लोन देने की मात्रा में 2022 की पहली तिमाही से 2.3 गुना वृद्धि हुई है, जबकि लोन मूल्य लगभग 5 गुना बढ़ गया है। औसत लोन वैल्यू 2022 की पहली तिमाही में 90,000 रुपए से बढ़कर 2025 की चौथी तिमाही में 1.96 लाख रुपए होने का अनुमान है।

लोन लेने वालों की प्रोफाइल में महत्वपूर्ण बदलाव आया है, जिसमें प्राइम और प्राइम से अधिक लोन लेने वालों का हिस्सा 2022 में 43 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में लगभग 52 प्रतिशत होने का अनुमान है, जबकि नए लोन लेने वाले ग्राहकों का हिस्सा 12 प्रतिशत से घटकर 6 प्रतिशत हो गया है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि उधारकर्ताओं का लीवरेज भी बढ़ा है, प्रति उधारकर्ता औसत बकाया राशि दिसंबर 2022 में 1.9 लाख रुपए से बढ़कर दिसंबर 2025 में 3.1 लाख रुपए होने का अनुमान है। 2.5 लाख रुपए से अधिक के ऋण वाले उधारकर्ताओं का हिस्सा 2022 में 10 प्रतिशत से बढ़कर 14 प्रतिशत हो गया है।

ट्रांसयूनियन सीआईबीएल के एमडी और सीईओ भावेश जैन ने कहा कि भारत में सोने का हमेशा से गहरा वित्तीय और सांस्कृतिक महत्व रहा है, लेकिन अब हम गोल्ड लोन के उपयोग में एक संरचनात्मक बदलाव देख रहे हैं।

उन्होंने कहा, "गोल्ड लोन तेजी से मुख्यधारा में आ रहे हैं और संगठित, सुलभ सुरक्षित लोन का रूप ले रहे हैं। इनकी तीव्र वृद्धि उधारदाताओं के आत्मविश्वास और उपभोक्ताओं की बढ़ती स्वीकृति दोनों को दर्शाती है।"

Point of View

बल्कि गोल्ड लोन की स्वीकृति में भी एक नया मोड़ है। विभिन्न वर्गों के उपभोक्ता अब इस विकल्प को अपना रहे हैं, जिससे यह क्षेत्र और भी मजबूत हो रहा है।
NationPress
16/04/2026

Frequently Asked Questions

गोल्ड लोन की वृद्धि के मुख्य कारण क्या हैं?
गोल्ड लोन की वृद्धि के प्रमुख कारण उधारकर्ताओं की बढ़ती स्वीकृति, टिकट राशि में वृद्धि और उधारदाताओं की भागीदारी में वृद्धि हैं।
गोल्ड लोन की औसत राशि कितनी है?
गोल्ड लोन की औसत राशि वर्तमान में लगभग 2 लाख रुपए है।
गोल्ड लोन की हिस्सेदारी में परिवर्तन कैसे हुआ है?
गोल्ड लोन की हिस्सेदारी 5.9 प्रतिशत से बढ़कर 11 प्रतिशत होने की उम्मीद है, जिसका मुख्य कारण उपभोक्ताओं की बदलती प्रोफाइल है।
गोल्ड लोन और एनबीएफसी की भूमिका क्या है?
एनबीएफसी ने गोल्ड लोन में अपनी हिस्सेदारी को बढ़ाया है, जो मार्च 2022 में 7 प्रतिशत से बढ़कर 11 प्रतिशत होने की उम्मीद है।
गोल्ड लोन लेने वालों की प्रोफाइल में क्या बदलाव आया है?
गोल्ड लोन लेने वालों की प्रोफाइल में बदलाव आया है, जिसमें प्राइम और प्राइम से अधिक लोन लेने वालों का हिस्सा बढ़ा है।
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