धोलेरा में भारत का पहला चिप निर्माण संयंत्र: केंद्र ने अनुमोदन दिया

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धोलेरा में भारत का पहला चिप निर्माण संयंत्र: केंद्र ने अनुमोदन दिया

सारांश

गुजरात के धोलेरा में टाटा सेमीकंडक्टर द्वारा पहले चिप निर्माण संयंत्र की स्थापना के लिए केंद्र ने मंजूरी दी है। लगभग 21,000 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।

Key Takeaways

  • धोलेरा में भारत का पहला चिप निर्माण संयंत्र स्थापित होगा।
  • यह संयंत्र लगभग 66.166 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला होगा।
  • 21,000 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना।
  • सरकार ने एसईजेड नियमों में महत्वपूर्ण सुधार किए हैं।
  • भारत को एक प्रतिस्पर्धी सेमीकंडक्टर हब बनाने की दिशा में कदम।

नई दिल्ली, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्र सरकार ने गुजरात के धोलेरा में टाटा सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर (आईटी/आईटीईएस सहित) के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) स्थापित करने की अधिसूचना जारी की है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने इस संबंध में जानकारी दी है।

यह एसईजेड लगभग 66.166 हेक्टेयर भूमि पर विस्तारित होगा और इससे करीब 21,000 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। यह परियोजना इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और आईटी-आधारित सेवाओं को समर्थन देने के लिए तैयार की गई है, जिसमें आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और संचालन व लॉजिस्टिक्स को सरल बनाने के लिए विशेष अनुमति प्रणाली शामिल होगी। मंत्रालय के अनुसार, यह भारत का पहला चिप निर्माण (फैब्रिकेशन) प्लांट होगा।

सरकार ने पहले भी सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए एसईजेड कानून में कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य उच्च निवेश को आकर्षित करना, नवाचार को प्रोत्साहित करना और कारोबार करने में आसानी को बढ़ाना है, ताकि भारत वैश्विक स्तर पर एक प्रतिस्पर्धी सेमीकंडक्टर हब बन सके।

3 जून 2025 को जारी अधिसूचना के तहत, एसईजेड नियम, 2006 में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इसके अंतर्गत न्यूनतम भूमि की आवश्यकता को 50 हेक्टेयर से घटाकर 10 हेक्टेयर कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, भूमि से जुड़े नियमों में लचीलापन, मुफ्त सप्लाई को नेट फॉरेन एक्सचेंज में शामिल करना, और घरेलू बाजार (डीटीए) में बिक्री की अनुमति जैसे कदम भी उठाए गए हैं।

इन सुधारों के बाद, एसईजेड बोर्ड ने कई प्रमुख प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इनमें माइक्रोन सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का गुजरात के साणंद में सेमीकंडक्टर असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग प्लांट शामिल है, जिसमें लगभग 13,000 करोड़ रुपए का निवेश होगा। वहीं, एक्वस समूह कर्नाटक के धारवाड़ में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग एसईजेड स्थापित कर रहा है।

इसके अलावा, सीजी सेमी, कायन्स सेमीकॉन और हुबली ड्यूरेबल गुड्स क्लस्टर जैसे प्रस्तावों को भी मंजूरी मिली है, जो देश में सप्लाई चेन को मजबूती प्रदान करने, रोजगार बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद करेंगे।

इन सभी विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) का उद्देश्य भारत में एक मजबूत, प्रतिस्पर्धी और भविष्य के लिए तैयार सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण करना है। बयान में कहा गया है कि उद्योग की भागीदारी और नीति समर्थन के साथ ये कदम भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उत्पादन का एक बड़ा केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

Point of View

बल्कि भारत को वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर निर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण होंगे।
NationPress
17/04/2026

Frequently Asked Questions

धोलेरा में चिप निर्माण संयंत्र की स्थापना से क्या लाभ होंगे?
इस संयंत्र की स्थापना से करीब 21,000 लोगों को रोजगार मिलेगा और भारत में सेमीकंडक्टर उत्पादन में बढ़ोतरी होगी।
एसईजेड का क्या महत्व है?
विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) से निवेश में वृद्धि और कारोबार करने में आसानी होती है, जिससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है।
भारत को सेमीकंडक्टर हब बनाने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है?
सरकार ने सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए कई सुधार लागू किए हैं।
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