साणंद में PM मोदी ने किया भारत के तीसरे सेमीकंडक्टर प्लांट का उद्घाटन, चिप निर्माण में आत्मनिर्भरता को नई रफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 जुलाई 2026 को गुजरात के साणंद में सीजी सेमी आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (OSAT) सुविधा का औपचारिक उद्घाटन किया — जो भारत का तीसरा चालू सेमीकंडक्टर प्लांट है। इस प्लांट में चिप पैकेजिंग का व्यावसायिक उत्पादन आज से शुरू हो गया है, जिसे सरकार देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक निर्णायक कदम बता रही है।
मुख्य घटनाक्रम
उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, '5 साल पहले भारत ने संकल्प लिया था कि देश को सेमीकंडक्टर हब बनाएंगे। हम 'डिजाइन इंडिया, मेक इन इंडिया' के मंत्र को लेकर आगे बढ़े और आज देश के तीसरे सेमीकंडक्टर प्लांट में भी चिप पैकेजिंग का कॉमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो रहा है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि 2024 में इस प्लांट का शिलान्यास हुआ था, अगस्त 2025 में परीक्षण चिप का कार्य आरंभ हुआ और अब पूर्ण व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो गया है।
मोदी ने इस परियोजना को भारत, जापान और थाईलैंड के उद्योग साझेदारों के संयुक्त प्रयास का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यावसायिक उद्यम नहीं, बल्कि 'टेक्नोलॉजी, भरोसे और साझेदारी का ऐसा मॉडल है, जो भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा को नई गति देने वाला है।'
सरकार की प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस अवसर पर कहा कि पिछले 60 वर्षों से देश में चिप उद्योग विकसित करने की कोशिशें चल रही थीं, लेकिन अब यह सपना साकार हो रहा है। उन्होंने बताया कि इससे पहले 28 फरवरी को पहला और 31 मार्च को दूसरा सेमीकंडक्टर प्लांट चालू किया गया था। वैष्णव ने यह भी कहा कि केंद्रीय कैबिनेट ने कुल 12 सेमीकंडक्टर प्लांट को मंजूरी दी है, जिनमें से तीन में अब व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका है।
आम जनता और उद्योग पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब भारत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए आयातित चिप पर भारी निर्भरता से जूझ रहा है। सीजी सेमी OSAT सुविधा के चालू होने से घरेलू चिप निर्माण क्षमता बढ़ेगी और आयात-निर्भरता में कमी आने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि इससे भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला में एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में उभरेगा।
गौरतलब है कि सेमीकंडक्टर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स — स्मार्टफोन से लेकर रक्षा प्रणालियों तक — की रीढ़ हैं। वैश्विक चिप संकट के बाद से अमेरिका, यूरोपीय संघ और चीन सहित तमाम देश घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने की होड़ में हैं।
क्या होगा आगे
सरकार के अनुसार, मंजूरी प्राप्त 12 प्लांटों में से शेष नौ परियोजनाएँ विभिन्न चरणों में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरी तरह चालू होने पर भारत की चिप निर्माण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। भारत-जापान-थाईलैंड की त्रिपक्षीय साझेदारी का यह मॉडल भविष्य की परियोजनाओं के लिए एक संदर्भ बिंदु बन सकता है।