दाभोलकर हत्या मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने सचिन अंदुरे को दी जमानत, जांच में खामियों का दिया हवाला
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 18 अगस्त 2026 को तर्कसंगत नागरिकता आंदोलन के प्रमुख डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा पाए सचिन अंदुरे को जमानत दे दी और उनकी सजा पर रोक लगा दी। न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल और न्यायमूर्ति रंजीतसिंह भोसले की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। दाभोलकर परिवार की ओर से जमानत के विरोध में दाखिल याचिका को अदालत ने स्वीकार नहीं किया।
मुख्य घटनाक्रम
अंदुरे ने विशेष अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी। उनकी ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता नितिन प्रधान ने अदालत में दलील दी कि मामले में जांच प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण कमियां थीं। बचाव पक्ष के अनुसार, सीबीआई ने इस मामले में पहचान परेड नहीं कराई थी और प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयानों में भी विरोधाभास था — कुछ गवाहों ने अंदुरे को घटनास्थल पर देखने का दावा किया, जबकि अन्य ने उनकी उपस्थिति से इनकार किया।
पूर्व में मिली जमानत से जुड़ा संदर्भ
गौरतलब है कि यह इस मामले में पहली जमानत नहीं है। इससे पहले अप्रैल 2026 में इसी मामले के एक अन्य दोषी शरद कलस्कर को भी बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। इसके अलावा, विशेष अदालत इस मामले में डॉ. वीरेंद्र तावड़े, अधिवक्ता संजीव पुनालेकर और विक्रम भावे को पहले ही बरी कर चुकी है। यह ऐसे समय में आया है जब दाभोलकर हत्याकांड की जांच और मुकदमे की प्रक्रिया पर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं।
सनातन संस्था की प्रतिक्रिया
इस फैसले का सनातन संस्था ने स्वागत किया है। संस्था के प्रवक्ता अभय वर्तक ने कहा कि अदालत का फैसला 'सत्य की जीत' है। वर्तक ने यह भी दावा किया कि दाभोलकर की हत्या के बाद बिना ठोस सबूतों के वैचारिक आधार पर संस्था और हिंदुत्व से जुड़े लोगों को निशाना बनाया गया — हालांकि यह संस्था का अपना पक्ष है। वर्तक ने यह भी बताया कि अंदुरे की गिरफ्तारी के समय उनकी बेटी केवल छह महीने की थी, जो अब आठ वर्ष की हो चुकी है।
दाभोलकर परिवार का पक्ष
दाभोलकर परिवार ने जमानत का विरोध करते हुए अलग याचिका दाखिल की थी, जिसे अदालत ने अस्वीकार कर दिया। परिवार का रुख स्पष्ट रहा है कि दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। इस फैसले के बाद परिवार की ओर से कोई तत्काल बयान सामने नहीं आया।
आगे क्या
अंदुरे की जमानत पर रोक की अपील की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह मामला अभी उच्च न्यायालय में विचाराधीन है और अपील की सुनवाई जारी रहेगी। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, जमानत का अर्थ दोषमुक्ति नहीं है — अंतिम फैसला अपील की सुनवाई पूरी होने के बाद ही आएगा।