19 अगस्त 2026
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दाभोलकर हत्या मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने सचिन अंदुरे को दी जमानत, जांच में खामियों का दिया हवाला

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दाभोलकर हत्या मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने सचिन अंदुरे को दी जमानत, जांच में खामियों का दिया हवाला

सारांश

दाभोलकर हत्याकांड में आजीवन कारावास पाए सचिन अंदुरे को बॉम्बे हाईकोर्ट ने जमानत दे दी — जांच में पहचान परेड न होने और गवाहों के बयानों में विरोधाभास को आधार बनाया गया। यह इस मामले में दूसरी बड़ी जमानत है; इससे पहले शरद कलस्कर को अप्रैल 2026 में राहत मिली थी।

मुख्य बातें

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 18 अगस्त 2026 को दाभोलकर हत्या मामले में दोषी सचिन अंदुरे को जमानत दी और सजा पर रोक लगाई।
फैसला न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल और न्यायमूर्ति रंजीतसिंह भोसले की खंडपीठ ने सुनाया।
बचाव पक्ष ने सीबीआई द्वारा पहचान परेड न कराने और गवाहों के बयानों में विरोधाभास का हवाला दिया।
इससे पहले अप्रैल 2026 में सह-दोषी शरद कलस्कर को भी हाईकोर्ट से जमानत मिली थी।
सनातन संस्था ने फैसले का स्वागत किया; दाभोलकर परिवार की जमानत-विरोधी याचिका अदालत ने खारिज की।
विशेष अदालत इस मामले में डॉ.
वीरेंद्र तावड़े , संजीव पुनालेकर और विक्रम भावे को पहले ही बरी कर चुकी है।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 18 अगस्त 2026 को तर्कसंगत नागरिकता आंदोलन के प्रमुख डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा पाए सचिन अंदुरे को जमानत दे दी और उनकी सजा पर रोक लगा दी। न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल और न्यायमूर्ति रंजीतसिंह भोसले की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। दाभोलकर परिवार की ओर से जमानत के विरोध में दाखिल याचिका को अदालत ने स्वीकार नहीं किया।

मुख्य घटनाक्रम

अंदुरे ने विशेष अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी। उनकी ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता नितिन प्रधान ने अदालत में दलील दी कि मामले में जांच प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण कमियां थीं। बचाव पक्ष के अनुसार, सीबीआई ने इस मामले में पहचान परेड नहीं कराई थी और प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयानों में भी विरोधाभास था — कुछ गवाहों ने अंदुरे को घटनास्थल पर देखने का दावा किया, जबकि अन्य ने उनकी उपस्थिति से इनकार किया।

पूर्व में मिली जमानत से जुड़ा संदर्भ

गौरतलब है कि यह इस मामले में पहली जमानत नहीं है। इससे पहले अप्रैल 2026 में इसी मामले के एक अन्य दोषी शरद कलस्कर को भी बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। इसके अलावा, विशेष अदालत इस मामले में डॉ. वीरेंद्र तावड़े, अधिवक्ता संजीव पुनालेकर और विक्रम भावे को पहले ही बरी कर चुकी है। यह ऐसे समय में आया है जब दाभोलकर हत्याकांड की जांच और मुकदमे की प्रक्रिया पर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं।

सनातन संस्था की प्रतिक्रिया

इस फैसले का सनातन संस्था ने स्वागत किया है। संस्था के प्रवक्ता अभय वर्तक ने कहा कि अदालत का फैसला 'सत्य की जीत' है। वर्तक ने यह भी दावा किया कि दाभोलकर की हत्या के बाद बिना ठोस सबूतों के वैचारिक आधार पर संस्था और हिंदुत्व से जुड़े लोगों को निशाना बनाया गया — हालांकि यह संस्था का अपना पक्ष है। वर्तक ने यह भी बताया कि अंदुरे की गिरफ्तारी के समय उनकी बेटी केवल छह महीने की थी, जो अब आठ वर्ष की हो चुकी है।

दाभोलकर परिवार का पक्ष

दाभोलकर परिवार ने जमानत का विरोध करते हुए अलग याचिका दाखिल की थी, जिसे अदालत ने अस्वीकार कर दिया। परिवार का रुख स्पष्ट रहा है कि दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। इस फैसले के बाद परिवार की ओर से कोई तत्काल बयान सामने नहीं आया।

आगे क्या

अंदुरे की जमानत पर रोक की अपील की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह मामला अभी उच्च न्यायालय में विचाराधीन है और अपील की सुनवाई जारी रहेगी। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, जमानत का अर्थ दोषमुक्ति नहीं है — अंतिम फैसला अपील की सुनवाई पूरी होने के बाद ही आएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह यह है कि जमानत और बरी होना अलग-अलग कानूनी श्रेणियाँ हैं — लेकिन जनमानस में दोनों एक ही संदेश देते हैं।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सचिन अंदुरे को बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत क्यों मिली?
बॉम्बे हाईकोर्ट ने जांच प्रक्रिया में कथित खामियों — जैसे सीबीआई द्वारा पहचान परेड न कराना और प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयानों में विरोधाभास — को आधार बनाते हुए अंदुरे को जमानत दी और उनकी आजीवन कारावास की सजा पर रोक लगाई।
दाभोलकर हत्या मामला क्या है?
डॉ. नरेंद्र दाभोलकर अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के संस्थापक थे, जिनकी 20 अगस्त 2013 को पुणे में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले की जांच सीबीआई ने की और विशेष अदालत ने सचिन अंदुरे सहित कुछ आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
क्या इस मामले में पहले भी जमानत मिली है?
हाँ, अप्रैल 2026 में इसी मामले के एक अन्य दोषी शरद कलस्कर को भी बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। इसके अलावा, विशेष अदालत डॉ. वीरेंद्र तावड़े, अधिवक्ता संजीव पुनालेकर और विक्रम भावे को पहले ही बरी कर चुकी है।
सनातन संस्था ने इस फैसले पर क्या कहा?
सनातन संस्था के प्रवक्ता अभय वर्तक ने फैसले को 'सत्य की जीत' बताया और दावा किया कि दाभोलकर हत्या के बाद बिना ठोस सबूतों के वैचारिक आधार पर संस्था से जुड़े लोगों को निशाना बनाया गया। यह संस्था का अपना पक्ष है।
दाभोलकर परिवार का इस जमानत पर क्या रुख था?
दाभोलकर परिवार ने जमानत का विरोध करते हुए हाईकोर्ट में अलग याचिका दाखिल की थी, लेकिन अदालत ने उसे स्वीकार नहीं किया और अंदुरे को जमानत दे दी।
राष्ट्र प्रेस
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