सचिन वाझे को एंटीलिया-हिरेन मामले में जमानत, पाँच जिलों में प्रवेश पर रोक
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई की विशेष राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) अदालत ने 29 सितंबर को 2021 के एंटीलिया विस्फोटक मामले और कारोबारी मनसुख हिरेन हत्याकांड में बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाझे को जमानत दे दी। विशेष न्यायाधीश चकोर एस. बाविस्कर ने वाझे की जमानत अर्जी स्वीकार करते हुए यह आदेश जारी किया। हालाँकि, अन्य लंबित मामलों के कारण उनके तत्काल रिहा होने की संभावना नहीं है।
जमानत का आधार
अदालत ने जमानत देने में लंबी हिरासत को प्रमुख आधार माना। वाझे 13 मार्च 2021 से न्यायिक हिरासत में हैं — यानी वे करीब साढ़े पाँच वर्षों से जेल में बंद हैं। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि मामले में 320 गवाह हैं और चार्जशीट 14,000 से अधिक पृष्ठों की है, जिससे शीघ्र सुनवाई पूरी होने की संभावना कम है।
इसके अतिरिक्त, अदालत ने समानता (पैरिटी) के आधार को भी ध्यान में रखा। मामले के अन्य प्रमुख सह-आरोपियों — मुंबई पुलिस के पूर्व अधिकारी प्रदीप शर्मा और सुनील माने — को पहले ही सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय से जमानत मिल चुकी है।
यूएपीए के आरोपों पर अदालत की टिप्पणी
अदालत ने गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत लगाए गए आरोपों पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत के अनुसार, वाहन में बिना डेटोनेटर के रखी गई जिलेटिन की छड़ों से प्रथम दृष्टया किसी प्रत्यक्ष आतंकी कृत्य या देश की आर्थिक सुरक्षा के लिए खतरे का मामला स्पष्ट नहीं होता। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि इस मामले में अंबानी परिवार के किसी भी सदस्य या किसी पीड़ित का बयान अब तक दर्ज नहीं किया गया है।
जमानत की शर्तें
वाझे को ₹1 लाख के व्यक्तिगत मुचलके और इतनी ही राशि के स्थानीय जमानतदार के आधार पर जमानत दी गई है। जमानत की शर्तों के अनुसार, मुख्य गवाहों के बयान दर्ज होने तक उन्हें बृहन्मुंबई, नवी मुंबई, रायगढ़, ठाणे और पालघर जिलों के अधिकार क्षेत्र में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी।
अदालत के आदेश के सात दिनों के भीतर वाझे को इन पाँच जिलों से बाहर अपने प्रस्तावित आवास का पता प्रस्तुत करना होगा। उन्हें अपना पासपोर्ट NIA के पास जमा करना होगा और प्रत्येक रविवार दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच अपने स्थानीय पुलिस स्टेशन में उपस्थिति दर्ज करानी होगी। NIA या पुलिस द्वारा फोन अथवा वीडियो कॉल किए जाने पर उन्हें अपनी लोकेशन साझा करना भी अनिवार्य होगा।
मामले की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि 2021 में उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित आवास एंटीलिया के निकट एक वाहन में विस्फोटक सामग्री मिली थी। इस मामले से जुड़े कारोबारी मनसुख हिरेन की बाद में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी। NIA ने जाँच में वाझे को मुख्य आरोपी के रूप में चिह्नित किया था, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर मुंबई पुलिस से बर्खास्त कर दिया गया था। यह ऐसे समय में आया है जब मामले के अधिकांश अन्य आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है और वाझे इस मामले में जेल में बचे अंतिम प्रमुख आरोपियों में से एक थे।
आगे की राह
अदालत ने स्पष्ट किया है कि जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन करने पर वाझे के विरुद्ध कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। चूँकि वाझे अन्य मामलों में भी आरोपी हैं, उनकी वास्तविक रिहाई उन मामलों में न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। मुकदमे की सुनवाई की अगली तारीख और गवाहों के बयान की प्रक्रिया इस हाई-प्रोफाइल मामले की दिशा तय करेगी।