सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: हत्यारोपी को जमानत, कहा- 4 साल बिना ट्रायल हिरासत अनुच्छेद 21 का उल्लंघन
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 5 मई 2026 को एक ऐतिहासिक आदेश में स्पष्ट किया कि त्वरित और निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। इसी सिद्धांत को आधार बनाते हुए शीर्ष अदालत ने महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में दर्ज हत्या के एक मामले में आरोपी साहिल मनोज मचारे को जमानत प्रदान की, जो 1 नवंबर 2022 से न्यायिक हिरासत में था और अब तक एक भी गवाह का परीक्षण नहीं हो सका था।
मामले की पृष्ठभूमि
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने यह आदेश साहिल मनोज मचारे की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई करते हुए दिया। मचारे ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें मार्च 2026 में उनकी जमानत याचिका खारिज की गई थी। यह मामला कोल्हापुर जिले के शाहापुर थाने में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 और 34 के तहत दर्ज है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना कोल्हापुर के तारदाल गांव में एक पारिवारिक कार्यक्रम के दौरान हुई, जहाँ एक व्यक्ति पर धारदार हथियार से हमला किया गया और बाद में उसकी मृत्यु हो गई। एक प्रत्यक्षदर्शी ने मचारे की पहचान सह-आरोपी के रूप में की थी।
अदालत की मुख्य टिप्पणियाँ
सर्वोच्च न्यायालय ने पाया कि आरोपी 1 नवंबर 2022 से हिरासत में है और 2024 में आरोप तय होने के बाद भी आज तक एक भी गवाह का परीक्षण नहीं हुआ। पीठ ने कहा,