3 जुलाई 2026
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पालघर कोर्ट का फैसला: शक में भाई की कुल्हाड़ी से हत्या, राजेश डोल्हारे को 6 साल बाद उम्रकैद

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पालघर कोर्ट का फैसला: शक में भाई की कुल्हाड़ी से हत्या, राजेश डोल्हारे को 6 साल बाद उम्रकैद

सारांश

एक वाक्य की गलतफहमी ने भाई को भाई का कातिल बना दिया। पालघर कोर्ट ने छह साल बाद राजेश डोल्हारे को आजीवन कारावास सुनाया — 11 गवाहों और पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर। खेती के पुराने विवाद और एक पल की शक की आग ने एक परिवार को हमेशा के लिए तोड़ दिया।

मुख्य बातें

पालघर अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने आरोपी राजेश रुपजी डोल्हारे को आजीवन कारावास और ₹10,500 जुर्माने की सजा सुनाई।
घटना 7 मार्च 2020 की है, जब राजेश ने शक में अपने सगे भाई वसंत रुपजी डोल्हारे की कुल्हाड़ी से हत्या की थी।
मामला IPC धारा 302 के तहत तलासरी पुलिस थाने में दर्ज किया गया था।
अभियोजन पक्ष ने 11 गवाहों के बयान और ठोस साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए।
न्यायाधीश एआर रहाणे ने घटना के लगभग 6 वर्ष बाद यह फैसला सुनाया।

पालघर के अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने महाराष्ट्र के एक बहुचर्चित हत्याकांड में शुक्रवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी राजेश रुपजी डोल्हारे को अपने सगे भाई की कुल्हाड़ी से निर्मम हत्या करने के जुर्म में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। न्यायाधीश एआर रहाणे ने आरोपी पर ₹10,500 का जुर्माना भी लगाया। यह मामला 7 मार्च 2020 की उस रात से जुड़ा है जब एक पारिवारिक गलतफहमी ने भाई को भाई का कातिल बना दिया।

घटनाक्रम: एक गलतफहमी ने ली जान

पुलिस जांच के अनुसार, तलासरी तहसील, जिला पालघर के आमगांव शिवपाड़ा निवासी राजेश डोल्हारे (35 वर्ष) और उसके सगे भाई वसंत रुपजी डोल्हारे के बीच खेती की जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा था। 7 मार्च 2020 को मृतक वसंत की बेटी और आरोपी के छोटे बेटे के बीच किसी बात पर कहासुनी हो गई। इस दौरान वसंत ने अपनी बेटी को समझाते हुए कहा कि 'मेरा एक ही भाई है, उसे मत रुलाओ।' आरोपी राजेश ने इस वाक्य को ताना समझ लिया और शक की आग में जलते हुए वसंत को घर के बाहर बुलाया और हाथ में मौजूद कुल्हाड़ी से कई वार करके उसकी हत्या कर दी।

जांच और अभियोजन की भूमिका

घटना की सूचना मिलते ही तलासरी पुलिस थाने ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत हत्या का मामला दर्ज किया। प्रारंभिक जांच तत्कालीन पुलिस उपनिरीक्षक सागर पाटिल ने की, जबकि आगे की जांच तत्कालीन पुलिस उपनिरीक्षक उमेश रोठे ने संभाली। ठोस साक्ष्य जुटाने के बाद तत्कालीन प्रभारी पुलिस निरीक्षक अजय वसावे ने पालघर के अपर जिला एवं सत्र न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान सरकारी वकील रेखा हिवराळे ने अभियोजन पक्ष की पैरवी की और कुल 11 गवाहों के बयान न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए।

न्यायालय का फैसला

सभी साक्ष्यों और गवाहों की गवाही का सूक्ष्म परीक्षण करने के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायालय, पालघर-1 की न्यायाधीश एआर रहाणे ने आरोपी राजेश रुपजी डोल्हारे को IPC धारा 302 के तहत दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास एवं ₹10,500 जुर्माने की सजा सुनाई। यह फैसला घटना के लगभग छह वर्ष बाद आया है। सहायक पुलिस उपनिरीक्षक मनोज पाटिल ने भी इस कार्यवाही में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आम जनता पर असर

यह मामला इस बात की कड़ी चेतावनी है कि पारिवारिक विवाद और गलतफहमी किस तरह अपूरणीय क्षति पहुँचा सकते हैं। ग्रामीण महाराष्ट्र में कृषि भूमि को लेकर होने वाले पारिवारिक झगड़े अक्सर हिंसक रूप ले लेते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में पारिवारिक हिंसा के मामलों पर न्यायिक सख्ती बढ़ रही है।

आगे की स्थिति

आरोपी के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध है। न्यायालय के इस फैसले को कानून प्रवर्तन एजेंसियों की प्रभावी जांच और अभियोजन पक्ष की मजबूत पैरवी की सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

भले ही इसमें समय लगे।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पालघर भाई हत्याकांड में क्या हुआ था?
7 मार्च 2020 को पालघर जिले के आमगांव शिवपाड़ा में आरोपी राजेश रुपजी डोल्हारे ने अपने सगे भाई वसंत रुपजी डोल्हारे की कुल्हाड़ी से कई वार कर हत्या कर दी थी। यह घटना एक पारिवारिक बातचीत की गलतफहमी के कारण हुई, जिसे आरोपी ने ताना समझ लिया।
राजेश डोल्हारे को क्या सजा मिली?
पालघर के अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने राजेश रुपजी डोल्हारे को IPC धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और ₹10,500 जुर्माने की सजा सुनाई। न्यायाधीश एआर रहाणे ने यह फैसला 11 गवाहों की गवाही और ठोस साक्ष्यों के आधार पर दिया।
हत्या की वजह क्या थी?
पुलिस जांच के अनुसार दोनों भाइयों के बीच खेती की जमीन को लेकर पहले से विवाद था। 7 मार्च 2020 को मृतक ने अपनी बेटी को समझाते हुए एक वाक्य कहा, जिसे आरोपी ने गलतफहमी में अपने प्रति ताना समझ लिया और हत्या कर दी।
इस मामले में कितने गवाह थे और जांच किसने की?
अभियोजन पक्ष ने कुल 11 गवाहों के बयान न्यायालय में दर्ज कराए। जांच तत्कालीन पुलिस उपनिरीक्षक सागर पाटिल और उमेश रोठे ने की, जबकि सरकारी वकील रेखा हिवराळे ने मुकदमे की पैरवी की।
फैसला आने में इतना समय क्यों लगा?
घटना मार्च 2020 में हुई थी और फैसला जुलाई 2026 में आया — लगभग छह वर्ष बाद। भारतीय न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्य संकलन, आरोपत्र दाखिल करना और सभी गवाहों की गवाही दर्ज करने में समय लगता है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के मामलों में।
राष्ट्र प्रेस
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