पालघर कोर्ट का फैसला: शक में भाई की कुल्हाड़ी से हत्या, राजेश डोल्हारे को 6 साल बाद उम्रकैद
सारांश
मुख्य बातें
पालघर के अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने महाराष्ट्र के एक बहुचर्चित हत्याकांड में शुक्रवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी राजेश रुपजी डोल्हारे को अपने सगे भाई की कुल्हाड़ी से निर्मम हत्या करने के जुर्म में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। न्यायाधीश एआर रहाणे ने आरोपी पर ₹10,500 का जुर्माना भी लगाया। यह मामला 7 मार्च 2020 की उस रात से जुड़ा है जब एक पारिवारिक गलतफहमी ने भाई को भाई का कातिल बना दिया।
घटनाक्रम: एक गलतफहमी ने ली जान
पुलिस जांच के अनुसार, तलासरी तहसील, जिला पालघर के आमगांव शिवपाड़ा निवासी राजेश डोल्हारे (35 वर्ष) और उसके सगे भाई वसंत रुपजी डोल्हारे के बीच खेती की जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा था। 7 मार्च 2020 को मृतक वसंत की बेटी और आरोपी के छोटे बेटे के बीच किसी बात पर कहासुनी हो गई। इस दौरान वसंत ने अपनी बेटी को समझाते हुए कहा कि 'मेरा एक ही भाई है, उसे मत रुलाओ।' आरोपी राजेश ने इस वाक्य को ताना समझ लिया और शक की आग में जलते हुए वसंत को घर के बाहर बुलाया और हाथ में मौजूद कुल्हाड़ी से कई वार करके उसकी हत्या कर दी।
जांच और अभियोजन की भूमिका
घटना की सूचना मिलते ही तलासरी पुलिस थाने ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत हत्या का मामला दर्ज किया। प्रारंभिक जांच तत्कालीन पुलिस उपनिरीक्षक सागर पाटिल ने की, जबकि आगे की जांच तत्कालीन पुलिस उपनिरीक्षक उमेश रोठे ने संभाली। ठोस साक्ष्य जुटाने के बाद तत्कालीन प्रभारी पुलिस निरीक्षक अजय वसावे ने पालघर के अपर जिला एवं सत्र न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान सरकारी वकील रेखा हिवराळे ने अभियोजन पक्ष की पैरवी की और कुल 11 गवाहों के बयान न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए।
न्यायालय का फैसला
सभी साक्ष्यों और गवाहों की गवाही का सूक्ष्म परीक्षण करने के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायालय, पालघर-1 की न्यायाधीश एआर रहाणे ने आरोपी राजेश रुपजी डोल्हारे को IPC धारा 302 के तहत दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास एवं ₹10,500 जुर्माने की सजा सुनाई। यह फैसला घटना के लगभग छह वर्ष बाद आया है। सहायक पुलिस उपनिरीक्षक मनोज पाटिल ने भी इस कार्यवाही में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आम जनता पर असर
यह मामला इस बात की कड़ी चेतावनी है कि पारिवारिक विवाद और गलतफहमी किस तरह अपूरणीय क्षति पहुँचा सकते हैं। ग्रामीण महाराष्ट्र में कृषि भूमि को लेकर होने वाले पारिवारिक झगड़े अक्सर हिंसक रूप ले लेते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में पारिवारिक हिंसा के मामलों पर न्यायिक सख्ती बढ़ रही है।
आगे की स्थिति
आरोपी के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध है। न्यायालय के इस फैसले को कानून प्रवर्तन एजेंसियों की प्रभावी जांच और अभियोजन पक्ष की मजबूत पैरवी की सफलता के रूप में देखा जा रहा है।