मथुरा कोर्ट का बड़ा फैसला: हत्या, लूट और दुष्कर्म के प्रयास में दोषी दिलीप को उम्रकैद
सारांश
मुख्य बातें
मथुरा के स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट (महिलाओं के विरुद्ध अपराध) ने 20 मई 2026 को 2017 के एक जघन्य मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी दिलीप को हत्या, दुष्कर्म के प्रयास, सशस्त्र लूट और अवैध हथियार रखने का दोषी ठहराया। अदालत ने उसे आजीवन कारावास और ₹1.30 लाख के जुर्माने की सजा सुनाई।
मुख्य घटनाक्रम: क्या हुआ था उस रात
3 मई 2017 की रात राजस्थान के भरतपुर जिले का निवासी 19 वर्षीय चंद्रशेखर अपनी चचेरी बहन खुशबू के साथ चंदौरी से लौट रहा था। कोसी कलां बस स्टैंड पर डीग जाने वाली बस का इंतजार करते समय दोनों ने दिलीप द्वारा दी गई लिफ्ट स्वीकार कर ली।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी ने डीग जाने का आश्वासन दिया, लेकिन कथित तौर पर आरटीओ चेकिंग पॉइंट से बचने का बहाना बनाकर वाहन को गोवर्धन मार्ग की ओर मोड़ लिया। आधी रात के आसपास उसने जाचोंडा और जुंसुती गाँवों के बीच एक वन क्षेत्र में गाड़ी रोक दी।
अपराध का विवरण: बंदूक की नोक पर लूट, फिर हत्या
अभियोजन पक्ष ने बताया कि दिलीप ने देसी पिस्तौल दिखाकर दोनों यात्रियों को धमकाया, उनके गहने और नकदी लूट ली और खुशबू के साथ यौन उत्पीड़न का प्रयास किया। जब चंद्रशेखर ने हस्तक्षेप करते हुए वाहन का शीशा तोड़कर आरोपी का सामना किया, तो हाथापाई हुई।
हाथापाई के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर चंद्रशेखर के सिर में गोली मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। इसके बाद दिलीप लूटा हुआ सामान लेकर फरार हो गया।
पुलिस जाँच और साक्ष्य
पुलिस ने दिलीप को गोवर्धन मोड़ के निकट गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के समय वह कथित तौर पर मृतक की चप्पल पहने हुए था और उसके पास लूटी गई रकम में से ₹5,200 बरामद हुए। उसके बयान के आधार पर पुलिस ने अपराध में इस्तेमाल किया गया अवैध हथियार और खाली कारतूस भी जब्त किए।
सरकारी वकील सुभाष चतुर्वेदी ने बताया कि पीड़िता खुशबू के प्रत्यक्षदर्शी बयान, फोरेंसिक साक्ष्य और फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) की रिपोर्ट ने दोष सिद्ध करने में निर्णायक भूमिका निभाई।
अदालत का फैसला: धाराएँ और सजा
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विजय कुमार सिंह ने दिलीप को निम्नलिखित धाराओं में दोषी ठहराया:
आईपीसी धारा 302 (हत्या) — आजीवन कारावास और ₹1.30 लाख जुर्माना; आईपीसी धारा 376/511 (दुष्कर्म का प्रयास); आईपीसी धारा 394 और 411 (सशस्त्र लूट और चोरी की संपत्ति रखना); शस्त्र अधिनियम धारा 3/25 (अवैध हथियार रखना)।
अदालत ने यह भी आदेश दिया कि न्यायिक हिरासत में बिताई गई अवधि सजा में समायोजित की जाए और कानूनी औपचारिकताएँ पूरी होते ही दिलीप को मथुरा जिला जेल स्थानांतरित किया जाए।
क्या होगा आगे
यह फैसला उत्तर प्रदेश में स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट की कार्यक्षमता का उदाहरण है, जो महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए गठित की गई हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में महिला सुरक्षा और न्याय की गति को लेकर बहस जारी है। पीड़ित परिवार को लगभग नौ वर्षों के लंबे न्यायिक संघर्ष के बाद न्याय मिला है।