मथुरा कोर्ट का बड़ा फैसला: हत्या, लूट और दुष्कर्म के प्रयास में दोषी दिलीप को उम्रकैद

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मथुरा कोर्ट का बड़ा फैसला: हत्या, लूट और दुष्कर्म के प्रयास में दोषी दिलीप को उम्रकैद

सारांश

नौ साल के इंतजार के बाद मथुरा की स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 2017 की उस रात का हिसाब चुकाया — जब एक झूठी लिफ्ट ने एक भाई की जान ले ली और उसकी बहन को आजीवन जख्म दिए। दोषी दिलीप को उम्रकैद और ₹1.30 लाख जुर्माने की सजा मिली।

मुख्य बातें

मथुरा स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 20 मई 2026 को 2017 के मामले में दोषी दिलीप को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
दोषी पर आईपीसी धारा 302 (हत्या), 376/511 (दुष्कर्म का प्रयास), 394, 411 (लूट) और शस्त्र अधिनियम के तहत दोष सिद्ध।
अदालत ने ₹1.30 लाख का जुर्माना भी लगाया और न्यायिक हिरासत की अवधि सजा में समायोजित करने का आदेश दिया।
घटना 3 मई 2017 को हुई थी — आरोपी ने झूठी लिफ्ट देकर 19 वर्षीय चंद्रशेखर की गोली मारकर हत्या की और उसकी बहन खुशबू के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया।
पीड़िता के प्रत्यक्षदर्शी बयान और FSL रिपोर्ट ने दोष सिद्धि में निर्णायक भूमिका निभाई।

मथुरा के स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट (महिलाओं के विरुद्ध अपराध) ने 20 मई 2026 को 2017 के एक जघन्य मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी दिलीप को हत्या, दुष्कर्म के प्रयास, सशस्त्र लूट और अवैध हथियार रखने का दोषी ठहराया। अदालत ने उसे आजीवन कारावास और ₹1.30 लाख के जुर्माने की सजा सुनाई।

मुख्य घटनाक्रम: क्या हुआ था उस रात

3 मई 2017 की रात राजस्थान के भरतपुर जिले का निवासी 19 वर्षीय चंद्रशेखर अपनी चचेरी बहन खुशबू के साथ चंदौरी से लौट रहा था। कोसी कलां बस स्टैंड पर डीग जाने वाली बस का इंतजार करते समय दोनों ने दिलीप द्वारा दी गई लिफ्ट स्वीकार कर ली।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी ने डीग जाने का आश्वासन दिया, लेकिन कथित तौर पर आरटीओ चेकिंग पॉइंट से बचने का बहाना बनाकर वाहन को गोवर्धन मार्ग की ओर मोड़ लिया। आधी रात के आसपास उसने जाचोंडा और जुंसुती गाँवों के बीच एक वन क्षेत्र में गाड़ी रोक दी।

अपराध का विवरण: बंदूक की नोक पर लूट, फिर हत्या

अभियोजन पक्ष ने बताया कि दिलीप ने देसी पिस्तौल दिखाकर दोनों यात्रियों को धमकाया, उनके गहने और नकदी लूट ली और खुशबू के साथ यौन उत्पीड़न का प्रयास किया। जब चंद्रशेखर ने हस्तक्षेप करते हुए वाहन का शीशा तोड़कर आरोपी का सामना किया, तो हाथापाई हुई।

हाथापाई के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर चंद्रशेखर के सिर में गोली मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। इसके बाद दिलीप लूटा हुआ सामान लेकर फरार हो गया।

पुलिस जाँच और साक्ष्य

पुलिस ने दिलीप को गोवर्धन मोड़ के निकट गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के समय वह कथित तौर पर मृतक की चप्पल पहने हुए था और उसके पास लूटी गई रकम में से ₹5,200 बरामद हुए। उसके बयान के आधार पर पुलिस ने अपराध में इस्तेमाल किया गया अवैध हथियार और खाली कारतूस भी जब्त किए।

सरकारी वकील सुभाष चतुर्वेदी ने बताया कि पीड़िता खुशबू के प्रत्यक्षदर्शी बयान, फोरेंसिक साक्ष्य और फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) की रिपोर्ट ने दोष सिद्ध करने में निर्णायक भूमिका निभाई।

अदालत का फैसला: धाराएँ और सजा

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विजय कुमार सिंह ने दिलीप को निम्नलिखित धाराओं में दोषी ठहराया:

आईपीसी धारा 302 (हत्या) — आजीवन कारावास और ₹1.30 लाख जुर्माना; आईपीसी धारा 376/511 (दुष्कर्म का प्रयास); आईपीसी धारा 394 और 411 (सशस्त्र लूट और चोरी की संपत्ति रखना); शस्त्र अधिनियम धारा 3/25 (अवैध हथियार रखना)।

अदालत ने यह भी आदेश दिया कि न्यायिक हिरासत में बिताई गई अवधि सजा में समायोजित की जाए और कानूनी औपचारिकताएँ पूरी होते ही दिलीप को मथुरा जिला जेल स्थानांतरित किया जाए।

क्या होगा आगे

यह फैसला उत्तर प्रदेश में स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट की कार्यक्षमता का उदाहरण है, जो महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए गठित की गई हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में महिला सुरक्षा और न्याय की गति को लेकर बहस जारी है। पीड़ित परिवार को लगभग नौ वर्षों के लंबे न्यायिक संघर्ष के बाद न्याय मिला है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो न्याय संभव है। असली सवाल यह है कि ऐसे अनगिनत मामले जहाँ पीड़िता गवाही देने में सक्षम नहीं होती या साक्ष्य कमज़ोर होते हैं, वहाँ व्यवस्था कितनी कारगर है।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मथुरा कोर्ट ने दिलीप को किस मामले में उम्रकैद दी?
मथुरा स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दिलीप को 3 मई 2017 की रात हुई हत्या, सशस्त्र लूट और दुष्कर्म के प्रयास के मामले में दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और ₹1.30 लाख जुर्माने की सजा सुनाई। उसने यात्रियों को झूठी लिफ्ट देकर लूटा, युवती के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया और विरोध करने पर युवक की गोली मारकर हत्या की।
इस मामले में पीड़ित कौन थे और घटना कब हुई?
घटना 3 मई 2017 को हुई थी। पीड़ित राजस्थान के भरतपुर जिले के निवासी 19 वर्षीय चंद्रशेखर और उसकी चचेरी बहन खुशबू थे, जो कोसी कलां बस स्टैंड से डीग जाने की प्रतीक्षा कर रहे थे। चंद्रशेखर की हत्या मौके पर ही हो गई थी।
दोषी दिलीप को किन-किन धाराओं में सजा मिली?
अदालत ने दिलीप को आईपीसी धारा 302 (हत्या), धारा 376/511 (दुष्कर्म का प्रयास), धारा 394 और 411 (सशस्त्र लूट और चोरी की संपत्ति रखना) तथा शस्त्र अधिनियम की धारा 3/25 (अवैध हथियार रखना) के तहत दोषी ठहराया। हत्या की धारा में आजीवन कारावास और ₹1.30 लाख जुर्माना लगाया गया।
दोष सिद्धि में कौन से साक्ष्य निर्णायक रहे?
सरकारी वकील सुभाष चतुर्वेदी के अनुसार, पीड़िता खुशबू का प्रत्यक्षदर्शी बयान, FSL रिपोर्ट और फोरेंसिक साक्ष्य दोष सिद्धि में निर्णायक रहे। इसके अलावा गिरफ्तारी के समय दोषी के पास मृतक की चप्पल, ₹5,200 नकद और बाद में बरामद अवैध हथियार व खाली कारतूस भी अहम साक्ष्य थे।
स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट क्या होती है और यह मामला इसमें क्यों सुना गया?
स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट महिलाओं के विरुद्ध अपराधों — विशेषकर दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न के मामलों — में त्वरित सुनवाई और शीघ्र न्याय के लिए गठित विशेष अदालतें हैं। यह मामला इसमें इसलिए सुना गया क्योंकि इसमें एक महिला के साथ दुष्कर्म का प्रयास भी शामिल था।
राष्ट्र प्रेस
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