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क्या पंजाब के विधायक मनजिंदर सिंह लालपुरा को दलित महिला से मारपीट के मामले में चार साल की सजा मिली?

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क्या पंजाब के विधायक मनजिंदर सिंह लालपुरा को दलित महिला से मारपीट के मामले में चार साल की सजा मिली?

सारांश

पंजाब के तरनतारन में आम आदमी पार्टी के विधायक मनजिंदर सिंह लालपुरा को दलित महिला के साथ मारपीट के मामले में चार साल की सजा सुनाई गई। यह घटना 2013 की है, और अब उनके विधायकी पर संकट मंडरा रहा है। जानें इस मामले की पूरी कहानी और न्याय की लड़ाई।

मुख्य बातें

मनजिंदर सिंह लालपुरा को दलित महिला के साथ मारपीट का दोषी ठहराया गया।
सजा सुनाए जाने के बाद उन्हें पट्टी उप-जेल भेजा गया।
पीड़िता ने 13 साल तक न्याय की लड़ाई लड़ी।
इस घटना ने समाज में महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचारों की ओर ध्यान आकर्षित किया।
लालपुरा की विधायकी पर संकट मंडरा रहा है।

तरनतारन, 12 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। पंजाब की तरनतारन अदालत ने शुक्रवार को खडौर साहिब से आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक मनजिंदर सिंह लालपुरा को चार साल की सजा सुनाई है। उन्हें यह सजा दलित महिला के साथ मारपीट और छेड़छाड़ के 12 साल पुराने मामले में सुनाई गई है। यह घटना 3 मार्च 2013 की है, जब लालपुरा एक टैक्सी ड्राइवर हुआ करते थे।

अदालत ने 10 सितंबर को उन्हें दोषी ठहराया था। इस मामले में दोषी ठहराए गए 12 आरोपियों में से एक की मृत्यु हो चुकी है, जबकि आठ को गिरफ्तार किया गया था।

एससी समुदाय की महिला हरबिंदर कौर उस्मा 2013 में तरनतारन के गोइंदवाल रोड स्थित एक विवाह स्थल पर अपनी बहन के विवाह समारोह में शामिल होने गई थी।

आरोप है कि विवाह स्थल पर पहुंचे टैक्सी ड्राइवरों के समूह, जिसमें लालपुरा मुख्य आरोपी थे, ने जगह खाली न करने पर विवाद किया। इसके बाद तरनतारन पुलिस की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन उन्होंने भी पीड़िता और उसके परिवार पर लाठियां बरसाईं।

वीडियो वायरल होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए पीड़िता, उनकी चचेरी बहन (गवाह) और परिवार को अर्धसैनिक बलों की सुरक्षा प्रदान की थी।

पुलिस ने मामला आईपीसी की धारा 354 (महिला की गरिमा भंग करने के इरादे से हमला), 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 506 (आपराधिक धमकी), 148 (हथियारबंद दंगा) के अलावा एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज किया।

पीड़िता के वकील अमित धवन ने पत्रकारों को बताया कि सजा के बाद लालपुरा को पट्टी उप-जेल भेज दिया गया है। उन्होंने कहा, "पीड़िता 13 साल से न्याय की लड़ाई लड़ रही थी। इस दौरान उन्हें मौत की धमकियां भी मिलीं। आज उसे न्याय मिला है।"

पीड़ित महिला हरबिंदर कौर ने कहा, "मैं खुश हूं कि न्याय हुआ। उम्मीद है कि दोषी को सख्त सजा मिलेगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।" कोर्ट के इस फैसले के बाद लालपुरा की विधायकी पर संकट मंडरा रहा है।

दरअसल, दो साल से अधिक सजा पर सदस्यता समाप्त हो सकती है। 2022 चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के रमनजीत सिंह सिक्का को 16,491 वोटों से हराया था। उनके खिलाफ पहले से पांच आपराधिक मामले दर्ज हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो यह दर्शाता है कि कानून का शासन सभी पर समान रूप से लागू होता है। समाज में महिलाओं के प्रति हो रहे अत्याचारों के खिलाफ यह एक कदम है। हमें उम्मीद है कि यह निर्णय अन्य पीड़ितों को भी न्याय प्राप्त करने के लिए प्रेरित करेगा।
RashtraPress
9 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनजिंदर सिंह लालपुरा को सजा क्यों मिली?
उन्हें दलित महिला से मारपीट और छेड़छाड़ के 12 साल पुराने मामले में चार साल की सजा सुनाई गई।
क्या इस मामले में और भी आरोपी हैं?
हां, इस मामले में कुल 12 आरोपी थे, जिनमें से एक की मृत्यु हो चुकी है और आठ को गिरफ्तार किया गया है।
पीड़िता को न्याय मिलने में कितना समय लगा?
पीड़िता ने न्याय के लिए 13 साल तक संघर्ष किया।
क्या लालपुरा की विधायकी पर कोई खतरा है?
हां, दो साल से अधिक सजा पर उनकी सदस्यता समाप्त हो सकती है।
इस मामले का प्रभाव सामाजिक न्याय पर क्या है?
यह फैसला महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है और यह दर्शाता है कि कानून का शासन सभी पर लागू होता है।
राष्ट्र प्रेस
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