मथुरा गेस्ट हाउस हत्याकांड: दोषी सुखवीर सिंह को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद
सारांश
मुख्य बातें
मथुरा के गोपी कृष्ण गेस्ट हाउस में 2 दिसंबर 2020 को एक युवती के साथ दुष्कर्म और 315 बोर के तमंचे से गोली मारकर हत्या करने के दोषी सुखवीर सिंह (31) को 22 मई को मथुरा की फास्ट ट्रैक कोर्ट (महिला अपराध) ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने दोषी पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया और जेल में बिताए गए समय को सजा में समायोजित करने का आदेश दिया।
मुख्य घटनाक्रम
अपर सत्र न्यायाधीश विजय कुमार सिंह, जो फास्ट ट्रैक कोर्ट के पीठासीन अधिकारी हैं, ने सुनवाई पूरी होने के बाद यह फैसला सुनाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, सुखवीर सिंह, निवासी नगला पोहपी, थाना रिफाइनरी, मथुरा, पीड़िता से लगभग छह वर्षों से प्रेम संबंध में था।
जब पीड़िता के परिवार ने उसकी शादी 10 दिसंबर 2020 को आजाद नगर, मथुरा के एक युवक से तय कर दी, तो अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी ने युवती को 'रास्ते से हटाने' की साजिश रची।
अपराध का तरीका
2 दिसंबर 2020 को जब युवती शादी का सामान खरीदने बाज़ार आई थी, तब सुखवीर सिंह ने व्हाट्सएप पर संपर्क कर उसे मथुरा बैराज मोड़ स्थित गोपी कृष्ण गेस्ट हाउस के कमरा नंबर 12 में बुलाया। वहाँ अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी ने पहले युवती के साथ जबरन दुष्कर्म किया, फिर उसे बाथरूम में ले जाकर छिपाकर लाए गए 315 बोर के तमंचे से उसकी कनपटी पर गोली मार दी। युवती की मौके पर ही मृत्यु हो गई।
फायरिंग की आवाज़ सुनकर गेस्ट हाउस में अफ़रा-तफ़री मच गई। भीड़ जुटने लगी तो आरोपी ने स्वयं पुलिस को फोन कर घटना की सूचना दी। पुलिस ने पहुँचकर कमरे का दरवाज़ा खुलवाया और सुखवीर सिंह को गिरफ़्तार कर लिया। बाथरूम में युवती का शव खून से लथपथ मिला। तलाशी में पुलिस को हत्या में इस्तेमाल तमंचा, खोखा कारतूस और आरोपी की जेब से चार जिंदा कारतूस बरामद हुए।
अदालत में सबूत और गवाह
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 11 गवाहों के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक रिपोर्ट और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पुष्टि की कि युवती की मृत्यु सिर में लगी गोली से हुई थी।
अदालत ने समस्त साक्ष्यों और दलीलों पर विचार करने के बाद सुखवीर सिंह को दोषी करार दिया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
आम जनता और महिला सुरक्षा पर असर
यह मामला इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि फास्ट ट्रैक कोर्ट (महिला अपराध) ने अपेक्षाकृत त्वरित गति से निर्णय सुनाया। गौरतलब है कि महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में त्वरित न्याय के लिए देशभर में स्थापित फास्ट ट्रैक अदालतें इस तरह के मामलों में सामाजिक दबाव के बीच जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही हैं।
क्या होगा आगे
अदालत के आदेश के अनुसार, सुखवीर सिंह की जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा। दोषी के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध है।