बॉम्बे हाईकोर्ट ने सचिन वाजे की जमानत रद्द की, NIA की अपील मंजूर; एंटीलिया-हिरेन मामला
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 5 नवंबर 2026 को एंटीलिया बम धमकी और मनसुख हिरेन हत्याकांड मामले में पूर्व मुंबई पुलिस अधिकारी सचिन वाजे की जमानत रद्द कर दी। जस्टिस जीएस कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की खंडपीठ ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की अपील स्वीकार करते हुए विशेष अदालत के 29 सितंबर के उस आदेश को पलट दिया, जिसमें वाजे को जमानत दी गई थी।
मामले की पृष्ठभूमि
फरवरी 2021 में उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित आवास एंटीलिया के बाहर जिलेटिन की छड़ों से भरी एक SUV खड़ी मिली थी। इसके कुछ ही दिन बाद उस वाहन के मालिक मनसुख हिरेन का शव मिला। NIA ने जांच में आरोप लगाया कि वाजे ने कथित तौर पर यह पूरी साजिश रची थी ताकि खुद को इसे सुलझाने वाला 'सुपरकॉप' के रूप में प्रस्तुत किया जा सके। एजेंसी के अनुसार, जब हिरेन ने साजिश की जिम्मेदारी लेने से इनकार किया तो उसे कथित तौर पर रास्ते से हटा दिया गया।
NIA की दलीलें
NIA की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने खंडपीठ को बताया कि विशेष अदालत ने जमानत देते समय गलत आदेश पारित किया था। उन्होंने यह भी कहा कि एंटीलिया की सुरक्षा में तैनात कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए थे, जो मामले की गंभीरता को उजागर करते हैं। एजेंसी का तर्क था कि जबरन वसूली और आतंकवादी साजिश की आड़ में यह कृत्य किया गया, जो गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के दायरे में आता है।
वाजे के बचाव पक्ष के तर्क
वाजे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वीएम थोराट ने एनआईए की दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि भले ही एजेंसी की पूरी कहानी स्वीकार की जाए, अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा हासिल करने के लिए डर का माहौल बनाना UAPA की धारा 15 के तहत आतंकवादी कृत्य नहीं माना जा सकता।
थोराट ने तर्क दिया कि जिलेटिन की छड़ों में डेटोनेटर नहीं था, इसलिए एक परिवार को डराने की यह कोशिश आम जनता में आतंक फैलाने की श्रेणी में नहीं आती। उन्होंने यह भी दलील दी कि मनसुख हिरेन की हत्या को आतंकवादी कृत्य के बजाय सबूत नष्ट करने की कार्रवाई के रूप में देखा जाना चाहिए। बचाव पक्ष ने वाजे की करीब पाँच साल की हिरासत और सह-आरोपियों के साथ समानता के आधार पर भी जमानत की माँग की थी।
हाईकोर्ट का फैसला
दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद जस्टिस कुलकर्णी और जस्टिस गोखले की खंडपीठ ने NIA की अपील को मंजूर करते हुए विशेष अदालत के जमानत आदेश को 5 नवंबर 2026 को रद्द कर दिया। गौरतलब है कि यह मामला पाँच साल से अधिक समय से चल रहा है और इसमें अब तक ट्रायल कोर्ट से लेकर उच्च न्यायालय तक कई कानूनी दौर देखे जा चुके हैं।
आगे क्या होगा
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद वाजे को पुनः न्यायिक हिरासत में रहना होगा। बचाव पक्ष के पास अब सर्वोच्च न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध है। NIA का मुकदमा विशेष UAPA अदालत में आगे जारी रहेगा, जहाँ ट्रायल की प्रक्रिया अभी भी जारी है।