सचिन वाजे की जमानत पर रोक बरकरार, बॉम्बे हाईकोर्ट में गुरुवार दोपहर 3 बजे होगी अगली सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे हाईकोर्ट में 7 अक्टूबर 2026 को एंटीलिया बम कांड और मनसुख हिरेन हत्या मामले में आरोपी बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे की जमानत को लेकर करीब दो घंटे तक सुनवाई हुई, जिसमें अदालत ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के तर्क सुने। अदालत ने तत्काल जमानत पर लगी रोक बरकरार रखते हुए अगली सुनवाई गुरुवार, 8 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे निर्धारित की है। इस प्रकार वाजे की रिहाई पर फिलहाल रोक जारी रहेगी।
मामले की पृष्ठभूमि
विशेष एनआईए अदालत ने 29 सितंबर 2026 को 2021 के एंटीलिया बम कांड मामले में वाजे को ₹1 लाख के निजी मुचलके और समान राशि की जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। एनआईए ने इस फैसले को तत्काल बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद हाईकोर्ट ने जमानत पर रोक लगा दी। वाजे 13 मार्च 2021 से हिरासत में हैं — यानी साढ़े पाँच वर्षों से अधिक समय से।
विशेष अदालत की जमानत में क्या था आधार
विशेष एनआईए अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि अभियोजन पक्ष वाजे के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आतंकवाद का प्रथम दृष्टया मामला स्थापित करने में विफल रहा है। अदालत की राय थी कि एंटीलिया के बाहर खड़ी एसयूवी से बरामद जिलेटिन की छड़ें — जिनमें डेटोनेटर नहीं थे — प्रथम दृष्टया प्रत्यक्ष आतंकवादी कृत्य या देश की आर्थिक सुरक्षा के लिए खतरा साबित नहीं होतीं।
जमानत की शर्तों के अनुसार, वाजे मुंबई, नवी मुंबई, रायगढ़, ठाणे और पालघर जिलों में प्रमुख गवाहों के बयान दर्ज होने तक प्रवेश नहीं कर सकते थे। इसके साथ ही उन्हें पासपोर्ट जमा करने और सात दिनों के भीतर प्रस्तावित निवास का विवरण देने का निर्देश था।
बचाव पक्ष का तर्क
वाजे के वकीलों ने सह-आरोपियों प्रदीप शर्मा और सुनील माने को पहले मिल चुकी जमानत का हवाला देते हुए समानता के आधार पर राहत देने की माँग की। उन्होंने यह भी बताया कि इस मामले में करीब 320 गवाह हैं और आरोपपत्र 14,000 से अधिक पन्नों का है, जिससे मुकदमे के शीघ्र पूरा होने की संभावना नहीं है — जो लंबी हिरासत के विरुद्ध एक स्थापित कानूनी आधार माना जाता है।
एंटीलिया कांड: घटनाक्रम की झलक
25 फरवरी 2021 को दक्षिण मुंबई स्थित उद्योगपति के आवास एंटीलिया के निकट विस्फोटक सामग्री से लदी एक एसयूवी खड़ी मिली थी, जिसमें एक धमकी भरा पत्र भी बरामद हुआ था। कारोबारी मनसुख हिरेन ने दावा किया था कि वह एसयूवी उनके कब्जे से चोरी हुई थी। 5 मार्च 2021 को हिरेन का शव ठाणे की एक खाड़ी में मिला। इसके कुछ दिनों बाद वाजे को गिरफ्तार किया गया।
एनआईए के अनुसार, वाजे ने अमीर लोगों में आतंक पैदा करने और उनसे जबरन वसूली के इरादे से विस्फोटक से लदी एसयूवी को एंटीलिया के पास खड़ा करने में भूमिका निभाई थी। विशेष एनआईए अदालत ने 1 अगस्त 2026 को वाजे समेत 10 आरोपियों के खिलाफ यूएपीए और हत्या समेत अन्य धाराओं के तहत आरोप तय कर दिए हैं।
आगे क्या होगा
गुरुवार की सुनवाई में हाईकोर्ट एनआईए की चुनौती पर आगे की दलीलें सुनेगा। अदालत का निर्णय यह तय करेगा कि जमानत पर रोक जारी रहेगी या हटाई जाएगी। यह मामला महाराष्ट्र पुलिस के उच्च अधिकारियों की भूमिका और यूएपीए के प्रयोग की सीमाओं को लेकर कानूनी दृष्टि से एक महत्त्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।