बॉम्बे हाईकोर्ट ने ड्रग्स मामले में केरल के छात्र को दी जमानत, जब्ती की वीडियोग्राफी न होना बना अहम मुद्दा
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 16 अगस्त 2026 को एनडीपीएस अधिनियम के तहत ड्रग्स रखने के आरोप में गिरफ्तार केरल के एक छात्र को जमानत प्रदान की। छात्र को 14 अक्टूबर 2024 को गिरफ्तार किया गया था और तब से वह पुणे जेल में बंद था — यानी करीब 1 साल 10 महीने की लंबी न्यायिक हिरासत। अदालत ने जमानत देते हुए न केवल लंबी कैद को आधार बनाया, बल्कि जब्ती प्रक्रिया में वीडियोग्राफी न होने पर भी गंभीर टिप्पणी की।
मामले का पूरा घटनाक्रम
पुलिस का दावा था कि छात्र — जो पुणे में उच्च शिक्षा के लिए आया था — के पास से 12 एलएसडी पेपर और एक स्टार आकार की एनडीएमए टैबलेट बरामद हुई थी। एलएसडी (लाइसर्जिक एसिड डाइएथिलैमाइड) एक मनोदैहिक पदार्थ है जो पेपर स्ट्रिप के रूप में पाया जाता है और एनडीपीएस अधिनियम के तहत प्रतिबंधित है। एफआईआर में पुलिस ने इन दोनों वस्तुओं की बरामदगी का उल्लेख किया था।
वीडियोग्राफी न होना बना निर्णायक बिंदु
बचाव पक्ष के वकील अली काशिफ खान देशमुख ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि नए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएस) के प्रावधानों के अनुसार, ड्रग्स की जब्ती की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी अनिवार्य है। उन्होंने कहा, 'जब किसी के पास से ड्रग्स बरामद होते हैं तो नए बीएनएस एक्ट के तहत पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी करवानी जरूरी है। यह पुलिस को किसी पर गलत तरीके से ड्रग्स रखने और बाद में यह दावा करने से रोकने के लिए है कि ड्रग्स उनके पास से बरामद हुए थे।' अदालत ने इस बिंदु को जमानत के संदर्भ में अहम माना।
लंबी हिरासत को मिला न्यायिक संज्ञान
वकील देशमुख ने बताया, 'गिरफ्तारी 14 अक्टूबर 2024 को हुई थी, जिसका मतलब है कि छात्र ने 1 साल और 10 महीने जेल में बिताए। उसे पुणे जेल में रखा गया था और जज ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि वह इतने लंबे समय से सलाखों के पीछे था।' यह ऐसे समय में आया है जब न्यायालय लंबे समय से विचाराधीन कैदियों की स्थिति को लेकर संवेदनशील रवैया अपना रहे हैं।
आम जनता और कानूनी व्यवस्था पर असर
यह मामला इस बात को रेखांकित करता है कि बीएनएस के तहत जब्ती प्रक्रिया में तकनीकी खामियाँ — जैसे वीडियोग्राफी का अभाव — अभियोजन पक्ष के लिए गंभीर बाधा बन सकती हैं। गौरतलब है कि यह पहला मामला नहीं है जहाँ प्रक्रियागत चूक ने एनडीपीएस मामले में जमानत का रास्ता खोला हो। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पुलिस को जब्ती प्रक्रिया में कड़े प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करना होगा, अन्यथा अदालतें ऐसे मामलों में संदेह का लाभ आरोपी को देती रहेंगी।
आगे क्या होगा
जमानत मिलने के बाद छात्र की रिहाई की प्रक्रिया शुरू होगी, हालाँकि एनडीपीएस मामले में मुकदमा जारी रहेगा। अदालत की टिप्पणी को देखते हुए यह मामला भविष्य में जब्ती प्रक्रिया संबंधी नजीर के रूप में उद्धृत किया जा सकता है।