बॉम्बे हाईकोर्ट ने ड्रग्स केस में केरल छात्र को दी जमानत, वीडियोग्राफी न होने पर उठाए अहम सवाल
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे हाईकोर्ट ने एनडीपीएस अधिनियम के तहत ड्रग्स रखने के आरोप में 14 अक्टूबर 2024 को गिरफ्तार किए गए केरल के एक छात्र को लगभग 1 साल 10 महीने बाद जमानत प्रदान की। पुणे में उच्च शिक्षा के लिए आए इस छात्र को पुणे जेल में रखा गया था, और अदालत ने जमानत देते समय उसकी असाधारण रूप से लंबी न्यायिक हिरासत को प्रमुख आधार माना।
मामले का पूरा घटनाक्रम
अभियोजन पक्ष के अनुसार, पुलिस ने छात्र के पास से 12 एलएसडी पेपर और एक स्टार आकार की एनडीएमए टैबलेट बरामद करने का दावा किया था। एलएसडी एक मादक पदार्थ है जो कागज़ के रूप में उपलब्ध होता है और एनडीपीएस अधिनियम के तहत प्रतिबंधित है। गिरफ्तारी के बाद से छात्र पुणे जेल में बंद था और उसे जमानत नहीं मिल पा रही थी।
अदालत की अहम टिप्पणी — वीडियोग्राफी पर सवाल
जमानत आदेश में बॉम्बे हाईकोर्ट ने जब्ती प्रक्रिया में वीडियोग्राफी न होने को एक महत्वपूर्ण बिंदु के रूप में रेखांकित किया। छात्र के वकील अली काशिफ खान देशमुख ने बताया कि नए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएस) के प्रावधानों के तहत ड्रग्स की बरामदगी की संपूर्ण प्रक्रिया की वीडियोग्राफी अनिवार्य है। उन्होंने कहा, 'यह पुलिस को किसी पर गलत तरीके से ड्रग्स रखने और बाद में यह दावा करने से रोकने के लिए है कि ड्रग्स उनके पास से बरामद हुए थे।'
अदालत ने इस प्रक्रियागत चूक को जमानत देने के निर्णय में एक अहम कारक माना। यह ऐसे समय में आया है जब पुलिस की जब्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को लेकर न्यायपालिका की निगरानी बढ़ रही है।
लंबी हिरासत — न्यायालय की चिंता
वकील देशमुख ने स्पष्ट किया कि अदालत ने इस तथ्य पर विशेष ध्यान दिया कि छात्र 14 अक्टूबर 2024 से जेल में था — यानी करीब 1 साल 10 महीने। न्यायाधीश ने इस बात को दर्ज किया कि आरोपी इतने लंबे समय से सलाखों के पीछे था, जो स्वयं में जमानत का आधार बन सकता है, विशेषकर जब जाँच प्रक्रिया में खामियाँ हों।
गौरतलब है कि एनडीपीएस मामलों में जमानत मिलना आमतौर पर कठिन होता है क्योंकि इन मामलों में कड़े प्रावधान लागू होते हैं। ऐसे में लंबी हिरासत और प्रक्रियागत खामियों को मिलाकर अदालत का यह निर्णय उल्लेखनीय है।
बीएनएस और वीडियोग्राफी का कानूनी महत्व
नए बीएनएस अधिनियम के लागू होने के बाद से जब्ती प्रक्रिया में वीडियोग्राफी की अनिवार्यता एक महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय के रूप में स्थापित हुई है। यह प्रावधान आरोपी के मूल अधिकारों की रक्षा और पुलिस जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लाया गया था। इस मामले में उस प्रावधान का पालन न होना अभियोजन पक्ष के लिए एक कमज़ोर कड़ी साबित हुई।
आगे क्या होगा
जमानत मिलने के बाद छात्र जेल से बाहर आ सकेगा, हालाँकि मुकदमा अभी जारी रहेगा। यह मामला भविष्य में एनडीपीएस केसों में वीडियोग्राफी की अनिवार्यता को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।