29 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नीट-यूजी विरोध प्रदर्शन: कोलकाता अदालत ने 16 गिरफ्तार आरोपियों को ₹500 के बॉन्ड पर दी जमानत

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नीट-यूजी विरोध प्रदर्शन: कोलकाता अदालत ने 16 गिरफ्तार आरोपियों को ₹500 के बॉन्ड पर दी जमानत

सारांश

नीट-यूजी विरोध प्रदर्शन में 24 जुलाई को गिरफ्तार 16 आरोपियों को कोलकाता अदालत ने ₹500 के बॉन्ड पर जमानत दी — सर्वोच्च न्यायालय के आदेश और आपराधिक दोषसिद्धि के अभाव में। सरकारी वकीलों ने अंततः विरोध नहीं किया।

मुख्य बातें

कोलकाता की चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत ने 28 जुलाई को नीट-यूजी विरोध प्रदर्शन के 16 आरोपियों को ₹500 के मुचलके पर जमानत दी।
आरोपी 24 जुलाई की वामपंथी छात्र संगठनों की रैली में हुई अशांति के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए थे।
16 में से 5 आरोपियों का पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड था, लेकिन दोषसिद्धि का प्रमाण न होने पर सभी को जमानत मिली।
बचाव पक्ष ने सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश का हवाला दिया जिसमें आंदोलनकारियों पर कठोर कार्रवाई से रोका गया था।
सरकारी वकीलों ने अंततः जमानत का विरोध नहीं किया; केंद्रीय गृह मंत्रालय की नीति पर स्पष्ट दिशानिर्देश अदालत में पेश नहीं हो सके।

कोलकाता की चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत ने 28 जुलाई 2026 को नीट-यूजी प्रश्न पत्र लीक विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई अशांति के सिलसिले में गिरफ्तार 16 आरोपियों को ₹500 के मुचलके पर जमानत दे दी। 24 जुलाई को वामपंथी छात्र संगठनों की संयुक्त रैली में कथित गड़बड़ी के बाद पुलिस ने इन्हें हिरासत में लिया था।

मुख्य घटनाक्रम

मंगलवार को जब सभी 16 आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, तो शुरुआत में सरकारी वकीलों ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए न्यायिक हिरासत की माँग की। मजिस्ट्रेट ने पहले उन्हें 30 जुलाई तक हिरासत में रखने का आदेश दिया।

दोपहर की सुनवाई में बचाव पक्ष के वकीलों ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के उस कथित फैसले का उल्लेख किया, जिसके तहत देशभर में नीट आंदोलन से जुड़े मामले वापस लेने की बात कही गई थी। वकीलों ने बिहार और असम का उदाहरण दिया, हालाँकि इन राज्यों से कोई स्पष्ट दिशानिर्देश अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं हो सका।

बाद में, सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश की प्रति मिलने पर — जिसमें आंदोलनकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई से बचने का निर्देश दिया गया था — वकीलों ने उसी दिन पुनः सुनवाई का अनुरोध किया। मजिस्ट्रेट ने अनुरोध स्वीकार कर लिया।

आपराधिक रिकॉर्ड पर बहस

मजिस्ट्रेट ने जाँच अधिकारी से पूछा कि कितने आरोपियों का आपराधिक इतिहास है। जाँच अधिकारी ने बताया कि 16 में से 5 लोगों का पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड है। बचाव पक्ष ने तब सवाल उठाया कि क्या वे पाँचों अपने पिछले मामलों में दोषी ठहराए गए थे — इस पर कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिला। अदालत ने इस अस्पष्टता को देखते हुए सभी 16 आरोपियों को जमानत दे दी। सरकारी वकीलों ने अंततः जमानत का विरोध नहीं किया।

24 जुलाई की रैली और हिंसा के आरोप

24 जुलाई को एसएफआई सहित कई वामपंथी छात्र संगठनों ने नीट-यूजी प्रश्न पत्र लीक के विरोध में सीलदाह से एस्प्लेनेड तक जुलूस और धरना आयोजित किया था। कथित तौर पर इस दौरान विवादास्पद पोस्टर, प्लेकार्ड और देश-विरोधी नारे लगाए गए। रिपोर्टों के अनुसार, कवरेज के दौरान कई पत्रकारों पर भी हमले हुए। इन्हीं घटनाओं के आधार पर पुलिस ने 16 लोगों को गिरफ्तार किया था।

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की भूमिका

आरोपियों यासीन रहमान, राजा सेन और प्रशांत बागची के वकीलों ने सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश का विशेष उल्लेख किया, जिसमें नीट आंदोलन में गिरफ्तार लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई से परहेज करने का निर्देश था। मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट किया कि न्यायालय के अनुसार पूर्व में दोषसिद्ध व्यक्तियों पर यह छूट लागू नहीं होती — परंतु दोषसिद्धि का प्रमाण न मिलने पर सभी को राहत मिल गई।

आगे क्या होगा

यह मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है। गौरतलब है कि नीट-यूजी विवाद को लेकर देशभर में कई राज्यों में प्रदर्शन हो रहे हैं और केंद्र सरकार की नीति को लेकर विभिन्न अदालतों में सुनवाई जारी है। कोलकाता के इस फैसले का असर अन्य लंबित मामलों पर भी पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो देशभर में ऐसे लंबित मामलों को प्रभावित करेगा। पत्रकारों पर हमले के आरोपों की जाँच का भविष्य भी अब अनिश्चित दिखता है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता में नीट-यूजी विरोध प्रदर्शन के 16 आरोपियों को जमानत क्यों मिली?
चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश के आधार पर जमानत दी, जिसमें नीट आंदोलनकारियों पर कठोर कार्रवाई से बचने का निर्देश था। 16 में से 5 आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड था, लेकिन दोषसिद्धि का प्रमाण न मिलने पर सभी को ₹500 के बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया।
24 जुलाई की कोलकाता रैली में क्या हुआ था?
एसएफआई सहित कई वामपंथी छात्र संगठनों ने नीट-यूजी प्रश्न पत्र लीक के विरोध में सीलदाह से एस्प्लेनेड तक जुलूस निकाला था। कथित तौर पर विवादास्पद पोस्टर और देश-विरोधी नारे लगाए गए, और रिपोर्टों के अनुसार कई पत्रकारों पर हमले भी हुए।
सर्वोच्च न्यायालय ने नीट आंदोलनकारियों के बारे में क्या कहा था?
सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि नीट आंदोलन में शामिल लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई नहीं की जाए। हालाँकि न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन लोगों के पुराने मामलों में दोषसिद्धि हो चुकी है, उन पर यह छूट लागू नहीं होगी।
केंद्रीय गृह मंत्रालय की नीट मामलों पर क्या नीति बताई गई?
बचाव पक्ष के वकीलों ने दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देशभर में नीट आंदोलन से जुड़े मामले वापस लेने का फैसला किया है। हालाँकि अदालत में इस संबंध में कोई आधिकारिक दिशानिर्देश प्रस्तुत नहीं हो सका।
इस जमानत का देशभर के नीट विरोध मामलों पर क्या असर पड़ेगा?
कोलकाता अदालत का यह फैसला एक मिसाल के रूप में काम कर सकता है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश और दोषसिद्धि के अभाव में जमानत मिलने की यह नजीर अन्य राज्यों में लंबित नीट विरोध मामलों में भी बचाव पक्ष द्वारा उठाई जा सकती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 16 घंटे पहले
  2. कल
  3. 2 दिन पहले
  4. 2 दिन पहले
  5. 2 सप्ताह पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 5 महीने पहले