नीट-यूजी विरोध प्रदर्शन: कोलकाता अदालत ने 16 गिरफ्तार आरोपियों को ₹500 के बॉन्ड पर दी जमानत
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता की चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत ने 28 जुलाई 2026 को नीट-यूजी प्रश्न पत्र लीक विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई अशांति के सिलसिले में गिरफ्तार 16 आरोपियों को ₹500 के मुचलके पर जमानत दे दी। 24 जुलाई को वामपंथी छात्र संगठनों की संयुक्त रैली में कथित गड़बड़ी के बाद पुलिस ने इन्हें हिरासत में लिया था।
मुख्य घटनाक्रम
मंगलवार को जब सभी 16 आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, तो शुरुआत में सरकारी वकीलों ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए न्यायिक हिरासत की माँग की। मजिस्ट्रेट ने पहले उन्हें 30 जुलाई तक हिरासत में रखने का आदेश दिया।
दोपहर की सुनवाई में बचाव पक्ष के वकीलों ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के उस कथित फैसले का उल्लेख किया, जिसके तहत देशभर में नीट आंदोलन से जुड़े मामले वापस लेने की बात कही गई थी। वकीलों ने बिहार और असम का उदाहरण दिया, हालाँकि इन राज्यों से कोई स्पष्ट दिशानिर्देश अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं हो सका।
बाद में, सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश की प्रति मिलने पर — जिसमें आंदोलनकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई से बचने का निर्देश दिया गया था — वकीलों ने उसी दिन पुनः सुनवाई का अनुरोध किया। मजिस्ट्रेट ने अनुरोध स्वीकार कर लिया।
आपराधिक रिकॉर्ड पर बहस
मजिस्ट्रेट ने जाँच अधिकारी से पूछा कि कितने आरोपियों का आपराधिक इतिहास है। जाँच अधिकारी ने बताया कि 16 में से 5 लोगों का पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड है। बचाव पक्ष ने तब सवाल उठाया कि क्या वे पाँचों अपने पिछले मामलों में दोषी ठहराए गए थे — इस पर कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिला। अदालत ने इस अस्पष्टता को देखते हुए सभी 16 आरोपियों को जमानत दे दी। सरकारी वकीलों ने अंततः जमानत का विरोध नहीं किया।
24 जुलाई की रैली और हिंसा के आरोप
24 जुलाई को एसएफआई सहित कई वामपंथी छात्र संगठनों ने नीट-यूजी प्रश्न पत्र लीक के विरोध में सीलदाह से एस्प्लेनेड तक जुलूस और धरना आयोजित किया था। कथित तौर पर इस दौरान विवादास्पद पोस्टर, प्लेकार्ड और देश-विरोधी नारे लगाए गए। रिपोर्टों के अनुसार, कवरेज के दौरान कई पत्रकारों पर भी हमले हुए। इन्हीं घटनाओं के आधार पर पुलिस ने 16 लोगों को गिरफ्तार किया था।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की भूमिका
आरोपियों यासीन रहमान, राजा सेन और प्रशांत बागची के वकीलों ने सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश का विशेष उल्लेख किया, जिसमें नीट आंदोलन में गिरफ्तार लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई से परहेज करने का निर्देश था। मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट किया कि न्यायालय के अनुसार पूर्व में दोषसिद्ध व्यक्तियों पर यह छूट लागू नहीं होती — परंतु दोषसिद्धि का प्रमाण न मिलने पर सभी को राहत मिल गई।
आगे क्या होगा
यह मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है। गौरतलब है कि नीट-यूजी विवाद को लेकर देशभर में कई राज्यों में प्रदर्शन हो रहे हैं और केंद्र सरकार की नीति को लेकर विभिन्न अदालतों में सुनवाई जारी है। कोलकाता के इस फैसले का असर अन्य लंबित मामलों पर भी पड़ सकता है।