कोलकाता हिंसा: गिरफ्तार 14 में से एक भी छात्र नहीं, CM सुवेंदु अधिकारी का बड़ा खुलासा
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने रविवार, 26 जुलाई को स्पष्ट किया कि 24 जुलाई को कोलकाता में नीट पेपर लीक और अन्य परीक्षा घोटालों के विरुद्ध आयोजित विरोध रैली के दौरान पुलिसकर्मियों और पत्रकारों पर हुए हमलों के सिलसिले में गिरफ्तार 14 लोगों में से कोई भी छात्र नहीं है। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी फुटेज और वीडियो साक्ष्यों के आधार पर पहचाने गए ये व्यक्ति कट्टरपंथी तत्व थे, जो छात्र कार्यकर्ताओं का भेष धारण कर रैली में घुसे थे।
गिरफ्तारियों का ब्यौरा
अधिकारियों के अनुसार, 11 आरोपियों को शनिवार रात तक हिरासत में लिया गया, जबकि शेष तीन को शनिवार रात से रविवार सुबह के बीच गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने अब तक रैली के दौरान हिंसा में शामिल 70 संदिग्धों की पहचान कर ली है। इस पूरे घटनाक्रम के संबंध में सात एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिनमें शहर पुलिस द्वारा स्वयं संज्ञान लेकर दर्ज किया गया एक सुओ मोटो मामला भी सम्मिलित है।
मुख्यमंत्री का बयान और कानूनी कार्रवाई
मीडियाकर्मियों से बात करते हुए मुख्यमंत्री अधिकारी ने कहा, 'उनका एकमात्र मकसद राज्य और देश में शांति भंग करना था।' उन्होंने बताया कि सभी गिरफ्तार व्यक्तियों के विरुद्ध हाल ही में लागू 'पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा और असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण अधिनियम, 2026' के तहत कार्रवाई की जाएगी, जिसमें हिंसक और असामाजिक गतिविधियों के लिए कड़े प्रावधान हैं।
हिंसा के पीछे का संदर्भ
यह रैली 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) और विभिन्न वामपंथी दलों के छात्र एवं युवा संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित की गई थी। मुख्यमंत्री के अनुसार, शुक्रवार की हिंसा राज्य में बड़ी संख्या में मौजूद 'खारिजी' (गैर-मान्यता प्राप्त) मदरसों की गतिविधियों की जाँच शुरू करने के भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेतृत्व वाली सरकार के फैसले के विरुद्ध कथित तौर पर भड़के गुस्से का परिणाम हो सकती है।
उन्होंने कहा, 'नई राज्य सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) प्रमाणपत्रों पर कलकत्ता उच्च न्यायालय के फैसले को लागू किया, सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध के विरुद्ध कानून लागू किया और ध्वनि नीति में नियम लागू किए। हो सकता है कि इन घटनाक्रमों से नाराज होकर उपद्रवियों के एक समूह ने यह शरारत की हो।'
आगे की कार्रवाई
पुलिस की जाँच जारी है और अधिक गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। गौरतलब है कि यह घटना ऐसे समय में हुई है जब नई राज्य सरकार अपने शुरुआती महीनों में कई संवेदनशील नीतिगत फैसले लागू कर रही है। कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सभी की नज़रें टिकी हैं।