26 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कोलकाता हिंसा: गिरफ्तार 14 में से एक भी छात्र नहीं, CM सुवेंदु अधिकारी का बड़ा खुलासा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कोलकाता हिंसा: गिरफ्तार 14 में से एक भी छात्र नहीं, CM सुवेंदु अधिकारी का बड़ा खुलासा

सारांश

कोलकाता में 24 जुलाई की नीट-विरोधी रैली के दौरान भड़की हिंसा में गिरफ्तार 14 लोगों में एक भी छात्र नहीं निकला। CM सुवेंदु अधिकारी ने इन्हें 'कट्टरपंथी तत्व' बताया जो छात्र बनकर रैली में घुसे थे। सभी पर नए सार्वजनिक सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई होगी।

मुख्य बातें

24 जुलाई को कोलकाता में नीट पेपर लीक विरोध रैली के दौरान पुलिसकर्मियों और पत्रकारों पर हमले हुए।
अब तक गिरफ्तार 14 लोगों में से कोई भी छात्र नहीं; पुलिस ने 70 संदिग्धों की पहचान की।
CM सुवेंदु अधिकारी ने गिरफ्तार व्यक्तियों को 'कट्टरपंथी तत्व' बताया जो छात्रों का भेष धरकर रैली में शामिल हुए थे।
सभी आरोपियों पर 'पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा और असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण अधिनियम, 2026' के तहत कार्रवाई होगी।
घटना के सिलसिले में 7 एफआईआर दर्ज; रैली सीजेपी और वामपंथी छात्र संगठनों ने आयोजित की थी।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने रविवार, 26 जुलाई को स्पष्ट किया कि 24 जुलाई को कोलकाता में नीट पेपर लीक और अन्य परीक्षा घोटालों के विरुद्ध आयोजित विरोध रैली के दौरान पुलिसकर्मियों और पत्रकारों पर हुए हमलों के सिलसिले में गिरफ्तार 14 लोगों में से कोई भी छात्र नहीं है। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी फुटेज और वीडियो साक्ष्यों के आधार पर पहचाने गए ये व्यक्ति कट्टरपंथी तत्व थे, जो छात्र कार्यकर्ताओं का भेष धारण कर रैली में घुसे थे।

गिरफ्तारियों का ब्यौरा

अधिकारियों के अनुसार, 11 आरोपियों को शनिवार रात तक हिरासत में लिया गया, जबकि शेष तीन को शनिवार रात से रविवार सुबह के बीच गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने अब तक रैली के दौरान हिंसा में शामिल 70 संदिग्धों की पहचान कर ली है। इस पूरे घटनाक्रम के संबंध में सात एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिनमें शहर पुलिस द्वारा स्वयं संज्ञान लेकर दर्ज किया गया एक सुओ मोटो मामला भी सम्मिलित है।

मुख्यमंत्री का बयान और कानूनी कार्रवाई

मीडियाकर्मियों से बात करते हुए मुख्यमंत्री अधिकारी ने कहा, 'उनका एकमात्र मकसद राज्य और देश में शांति भंग करना था।' उन्होंने बताया कि सभी गिरफ्तार व्यक्तियों के विरुद्ध हाल ही में लागू 'पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा और असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण अधिनियम, 2026' के तहत कार्रवाई की जाएगी, जिसमें हिंसक और असामाजिक गतिविधियों के लिए कड़े प्रावधान हैं।

हिंसा के पीछे का संदर्भ

यह रैली 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) और विभिन्न वामपंथी दलों के छात्र एवं युवा संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित की गई थी। मुख्यमंत्री के अनुसार, शुक्रवार की हिंसा राज्य में बड़ी संख्या में मौजूद 'खारिजी' (गैर-मान्यता प्राप्त) मदरसों की गतिविधियों की जाँच शुरू करने के भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेतृत्व वाली सरकार के फैसले के विरुद्ध कथित तौर पर भड़के गुस्से का परिणाम हो सकती है।

उन्होंने कहा, 'नई राज्य सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) प्रमाणपत्रों पर कलकत्ता उच्च न्यायालय के फैसले को लागू किया, सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध के विरुद्ध कानून लागू किया और ध्वनि नीति में नियम लागू किए। हो सकता है कि इन घटनाक्रमों से नाराज होकर उपद्रवियों के एक समूह ने यह शरारत की हो।'

आगे की कार्रवाई

पुलिस की जाँच जारी है और अधिक गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। गौरतलब है कि यह घटना ऐसे समय में हुई है जब नई राज्य सरकार अपने शुरुआती महीनों में कई संवेदनशील नीतिगत फैसले लागू कर रही है। कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सभी की नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

राजनीतिक रूप से सुविधाजनक तो है, लेकिन इसे स्वतंत्र जाँच से परखा जाना ज़रूरी है। खारिजी मदरसों और OBC नीति को हिंसा से जोड़ने की कोशिश सरकार के नैरेटिव को स्पष्ट करती है, पर इसका सत्यापन अदालत में होगा। असली सवाल यह है कि नीट जैसे राष्ट्रीय परीक्षा घोटाले पर उठी वैध छात्र आवाज़ को इस हिंसा के बहाने दबाने की कोशिश तो नहीं हो रही — यह जवाबदेही मीडिया और विपक्ष दोनों की है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

24 जुलाई की कोलकाता रैली में हिंसा क्यों हुई?
यह रैली नीट पेपर लीक और अन्य परीक्षा घोटालों के विरुद्ध आयोजित की गई थी। रैली के दौरान कुछ तत्वों ने पुलिसकर्मियों और पत्रकारों पर हमले किए, जिसके बाद व्यापक हिंसा भड़की। मुख्यमंत्री के अनुसार, हमलावर छात्रों का भेष धरकर रैली में शामिल हुए थे।
गिरफ्तार 14 लोग कौन हैं और क्या उनमें छात्र हैं?
CM सुवेंदु अधिकारी के अनुसार, गिरफ्तार 14 लोगों में से एक भी छात्र नहीं है। सीसीटीवी फुटेज और वीडियो साक्ष्यों के आधार पर इन्हें 'कट्टरपंथी तत्व' बताया गया है जो छात्र कार्यकर्ताओं की आड़ में रैली में शामिल हुए थे।
'पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम 2026' क्या है?
यह हाल ही में लागू किया गया राज्य कानून है जिसमें असामाजिक और हिंसक गतिविधियों के लिए कड़े दंड का प्रावधान है। सरकार इसी कानून के तहत हिंसा में शामिल सभी गिरफ्तार व्यक्तियों पर कार्रवाई करने की योजना बना रही है।
पुलिस ने अब तक कितने संदिग्धों की पहचान की है?
पुलिस ने रैली के दौरान हिंसा में शामिल 70 संदिग्धों की पहचान की है। इनमें से 14 को गिरफ्तार किया जा चुका है और 7 एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिनमें पुलिस का एक स्वतः संज्ञान मामला भी शामिल है।
CM अधिकारी ने हिंसा के पीछे क्या कारण बताए?
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंसा कथित तौर पर राज्य सरकार के खारिजी मदरसों की जाँच, OBC प्रमाणपत्र नियमों के क्रियान्वयन और ध्वनि नीति लागू करने जैसे फैसलों से नाराज़ तत्वों का गुप्त विरोध हो सकती है। हालाँकि, यह उनका अनुमान है और जाँच अभी जारी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 घंटे पहले
  2. 18 घंटे पहले
  3. कल
  4. 3 दिन पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 6 महीने पहले