कोलकाता अशांति: पुलिस ने 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया, दो अंडाल से पकड़े गए
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता पुलिस ने 25 जुलाई 2026 को 11 लोगों को गिरफ्तार किया, जिन पर 24 जुलाई को एस्प्लेनेड में हुए जुलूस के दौरान अशांति फैलाने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए लोगों में से कोई भी छात्र नहीं था।
गिरफ्तारियों का ब्यौरा
गिरफ्तार 11 आरोपियों में से दो — मोहम्मद अफरोज (निवासी: राजाबागान, मेतियाब्रुज) और मोहम्मद आजाद (निवासी: गार्डन रीच) — को पश्चिम बर्धमान जिले के अंडाल से पकड़ा गया। पुलिस को सूचना मिली थी कि दोनों राज्य से फरार होने की फिराक में थे। वीडियो फुटेज के आधार पर अफरोज की पहचान की गई और शुक्रवार से उसकी तलाश जारी थी।
इसके अलावा, अरशद अली (50), एमहर्स्ट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन क्षेत्र के निवासी को भी गिरफ्तार किया गया। जोरासांको पुलिस थाना क्षेत्र से इरफान खुर्शीद, मोहम्मद आलमगीर, इमरान अहमद और खालिद रजा — चार लोगों को हिरासत में लिया गया। तिलजाला से मोहम्मद मोइनुद्दीन, बेनियापुकुर से जमीर अहमद, और कराया से मोहसिन खान तथा दीपक भौमिक को भी गिरफ्तार किया गया।
मुख्यमंत्री की चेतावनी और विधानसभा बयान
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शुक्रवार की रात अशांति फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। उनकी चेतावनी के 24 घंटे के भीतर ये गिरफ्तारियाँ की गईं। शनिवार सुबह उन्होंने राज्य विधानसभा में बयान देते हुए कहा कि जुलूस में शामिल 70 लोगों की पहचान कर ली गई है, जो न तो छात्र हैं और न ही किसी छात्र संगठन के सदस्य।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा, 'सबने देखा कि पुलिस ने संयम बरता। यही आदेश था। वे किसी भी जाल में नहीं फंसे। जुलूस निकल रहा था। डोरिना क्रॉसिंग पहुंचने के बाद वहां से जूते और बोतलें फेंकी जाने लगीं। पत्रकारों को निशाना बनाया गया। वे पुलिस से लाठीचार्ज करवाना चाहते थे, हंगामा खड़ा करना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें ऐसा मौका नहीं दिया। छह पत्रकार गंभीर रूप से घायल हो गए। उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।'
घटना की पृष्ठभूमि
24 जुलाई को शिक्षा में भ्रष्टाचार और नीट पेपर लीक के विरोध में एस्प्लेनेड, कोलकाता में एक जुलूस निकाला गया था। आरोप है कि जुलूस के दौरान पुलिस पर हमले का प्रयास किया गया और पत्रकारों को भी निशाना बनाया गया। इस घटना में सात मामले दर्ज किए गए हैं — छह हेयर स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में और एक एंटाली में।
कानूनी कार्रवाई
आरोपियों पर गुंडागर्दी विरोधी अधिनियम भी लगाया गया है। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने इस मामले में राज्य विधानसभा द्वारा हाल ही में पारित कानून को पहली बार लागू किया है। मुख्यमंत्री अधिकारी ने मोहम्मद अफरोज को 'कुख्यात बदमाश' बताते हुए उन पाँच आरोपियों में शामिल किया, जिनका नाम उन्होंने शुक्रवार की अशांति के संदर्भ में लिया था।
आगे क्या
पुलिस के अनुसार, वीडियो फुटेज के आधार पर पहचाने गए शेष 70 संदिग्धों के खिलाफ जाँच जारी है। राज्य सरकार का रुख स्पष्ट है कि नीट-विरोधी प्रदर्शन की आड़ में हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।