25 जुलाई 2026
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कोलकाता नीट पेपर लीक रैली: पुलिस-पत्रकारों पर हमला, 70 की पहचान; CM अधिकारी ने विधानसभा में दी जानकारी

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कोलकाता नीट पेपर लीक रैली: पुलिस-पत्रकारों पर हमला, 70 की पहचान; CM अधिकारी ने विधानसभा में दी जानकारी

सारांश

कोलकाता में नीट पेपर लीक विरोध रैली उस वक्त हिंसक हो गई जब पहचाने गए असामाजिक तत्वों ने पुलिस और पत्रकारों पर हमला किया। CM सुवेंदु अधिकारी ने विधानसभा में खुलासा किया कि 70 संदिग्धों की पहचान हो चुकी है और 7 FIR दर्ज हैं — नए सार्वजनिक सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई होगी।

मुख्य बातें

कोलकाता में 25 जुलाई को नीट पेपर लीक विरोध रैली के दौरान पुलिसकर्मियों और पत्रकारों पर हमला हुआ।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने विधानसभा में बताया कि हमलावर राजाबाजार, किडरपुर, पार्क सर्कस, गार्डन रीच और इकबालपुर से आए थे।
सीसीटीवी और वीडियो साक्ष्यों से 70 संदिग्धों की पहचान की गई है।
घटना में 6 पत्रकार गंभीर रूप से घायल ; कुल 7 एफआईआर दर्ज।
सभी मामले पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण अधिनियम, 2026 के तहत चलाए जाएंगे।
पुलिस को पहले से निर्देश था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर बल प्रयोग न करें; हिंसा के बावजूद पुलिस ने संयम बरता।

कोलकाता में नीट परीक्षा पेपर लीक के विरोध में शुक्रवार, 25 जुलाई को आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की संयुक्त रैली के दौरान पुलिसकर्मियों और मीडियाकर्मियों पर हमला करने वाले असामाजिक तत्वों की पहचान कर ली गई है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार को राज्य विधानसभा में बताया कि ये तत्व राजाबाजार, किडरपुर, पार्क सर्कस, गार्डन रीच और इकबालपुर के कुछ चुनिंदा इलाकों से आए थे।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री अधिकारी ने विधानसभा के छह दिवसीय विस्तारित बजट सत्र के समापन दिवस पर सदन को संबोधित करते हुए कहा कि सीसीटीवी फुटेज और वीडियो साक्ष्यों के आधार पर कुल 70 लोगों की पहचान की गई है, जो शुक्रवार की उपद्रवी गतिविधियों में सीधे तौर पर शामिल थे। उन्होंने बताया कि इस मामले में अब तक कुल सात एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें शुक्रवार की घटना के संबंध में एक और एफआईआर हाल ही में जोड़ी गई है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, रैली में शामिल कई लोग न तो छात्र थे और न ही नीट परीक्षा से उनका कोई संबंध था। सीजेपी ने स्वयं स्वीकार किया कि वामपंथी छात्र एवं युवा संगठन भी इस विरोध प्रदर्शन में सम्मिलित हुए थे।

पुलिस और पत्रकारों पर हमला

अधिकारी ने बताया कि डोरिना क्रॉसिंग पर उपद्रवियों ने पुलिसकर्मियों पर पानी की बोतलें और जूते फेंके। हमले में कई पत्रकार घायल हुए, जिनमें से छह पत्रकार गंभीर रूप से घायल बताए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस को पहले से सख्त निर्देश थे कि किसी भी शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक आंदोलन पर बल प्रयोग न किया जाए, फिर भी हिंसा भड़काने के प्रयास जारी रहे।

सरकार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री अधिकारी ने कहा कि असामाजिक तत्वों का मुख्य उद्देश्य तनाव और हिंसा फैलाकर सुर्खियाँ बटोरना था। उनका इरादा था कि पुलिस लाठीचार्ज या आंसू गैस का प्रयोग करे, जिससे स्थिति और बिगड़े। उन्होंने कहा कि सौभाग्यवश पुलिस इस उकसावे में नहीं आई, हालाँकि हमले जारी रहे।

कुल सात मामलों की सुनवाई नवगठित पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण अधिनियम, 2026 के तहत की जाएगी, जिसमें राज्य में उपद्रव, असामाजिक गतिविधियों और भ्रष्टाचार को रोकने के कड़े प्रावधान हैं।

आम जनता और मीडिया पर असर

पत्रकारों पर हमले ने मीडिया जगत में गहरी चिंता उत्पन्न की है। यह ऐसे समय में आया है जब नीट पेपर लीक विवाद पहले से ही पूरे देश में छात्रों और अभिभावकों में आक्रोश का कारण बना हुआ है। गौरतलब है कि विरोध प्रदर्शन में उन लोगों की मौजूदगी, जिनका नीट से कोई सीधा संबंध नहीं था, इस घटनाक्रम को और अधिक जटिल बनाती है।

क्या होगा आगे

पहचाने गए 70 संदिग्धों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई अपेक्षित है। पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम, 2026 के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई की प्रक्रिया शुरू होगी। राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि समन्वित उकसावे की कोशिश थी — जो नीट के असली मुद्दे को पृष्ठभूमि में धकेल देती है। नवगठित सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम, 2026 के तहत कार्रवाई का निर्णय राज्य सरकार को कड़े कानूनी हथियार देता है, लेकिन यह सवाल भी उठाता है कि इस कानून का दायरा भविष्य में वैध विरोध प्रदर्शनों पर कैसे लागू होगा। मीडिया की सुरक्षा और प्रेस की स्वतंत्रता के लिहाज़ से छह पत्रकारों का गंभीर रूप से घायल होना एक अलग और गंभीर चिंता है, जिस पर स्वतंत्र जाँच ज़रूरी है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता नीट पेपर लीक रैली में क्या हुआ?
25 जुलाई को कोलकाता में नीट पेपर लीक के विरोध में आयोजित सीजेपी की रैली के दौरान असामाजिक तत्वों ने पुलिसकर्मियों और पत्रकारों पर हमला किया। डोरिना क्रॉसिंग पर पुलिस पर पानी की बोतलें और जूते फेंके गए, जिसमें छह पत्रकार गंभीर रूप से घायल हुए।
CM सुवेंदु अधिकारी ने विधानसभा में क्या कहा?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार को विधानसभा के बजट सत्र के समापन दिवस पर बताया कि सीसीटीवी और वीडियो फुटेज से 70 संदिग्धों की पहचान हो चुकी है। उन्होंने कहा कि हमलावर राजाबाजार, किडरपुर, पार्क सर्कस, गार्डन रीच और इकबालपुर से आए थे और उनका उद्देश्य पुलिस को उकसाकर हिंसा का तमाशा खड़ा करना था।
इस मामले में कितनी FIR दर्ज हुई हैं और किस कानून के तहत कार्रवाई होगी?
अब तक इस मामले में कुल सात एफआईआर दर्ज की गई हैं। सभी सात मामलों की सुनवाई नवगठित पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण अधिनियम, 2026 के तहत होगी, जिसमें उपद्रव और भ्रष्टाचार रोकने के कड़े प्रावधान हैं।
क्या रैली में शामिल सभी लोग नीट के छात्र थे?
नहीं। मुख्यमंत्री अधिकारी और सीजेपी दोनों ने स्वीकार किया कि रैली में कई ऐसे लोग भी शामिल थे जो न तो छात्र थे और न ही नीट परीक्षा से उनका कोई संबंध था। वामपंथी छात्र व युवा संगठनों के सदस्य भी प्रदर्शन में सम्मिलित हुए।
पत्रकारों पर हमले के बाद क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
पहचाने गए 70 संदिग्धों के विरुद्ध पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम, 2026 के तहत कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होगी। राज्य सरकार ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी करने के संकेत दिए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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