कोलकाता नीट विरोध हिंसा: पुलिस-मीडिया पर हमले में दो और गिरफ्तार, कुल 16 हिरासत में
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता में 24 जुलाई 2026 को नीट पेपर लीक के विरोध में निकाली गई रैली के दौरान पुलिसकर्मियों और पत्रकारों पर हुई हिंसा के मामले में 27 जुलाई को दो और लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिससे इस मामले में कुल गिरफ्तारियों की संख्या 16 हो गई है। अधिकारियों के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर पहचान कर यह कार्रवाई की गई।
नए गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
सोमवार सुबह हिरासत में लिए गए दोनों आरोपियों की पहचान वकार आज़म (35), निवासी करया, पार्क सर्कस (दक्षिण-पूर्व कोलकाता) और जावेद अख्तर (32), निवासी गार्डन रीच (कोलकाता का दक्षिणी बाहरी इलाका) के रूप में हुई है। दोनों को उसी दिन बाद में कोलकाता की निचली अदालत में पेश किया गया, जहाँ सरकारी वकील ने उनकी पुलिस हिरासत की माँग की।
इससे पहले, शनिवार शाम से रविवार दोपहर के बीच 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया था — ये सभी सीसीटीवी और वीडियो साक्ष्य के आधार पर चिह्नित किए गए थे।
मुख्य घटनाक्रम: 24 जुलाई की हिंसा
24 जुलाई 2026 की दोपहर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और कुछ छात्र व युवा संगठनों की संयुक्त रैली के दौरान तनाव भड़क उठा। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने पुलिसकर्मियों पर कांच की बोतलें, पत्थर, ईंटें, बांस की लाठियाँ और जूते फेंके।
घटना की कवरेज कर रहे कई मीडियाकर्मी भी इस हमले की चपेट में आए और घायल हो गए — उनमें से कुछ को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में नीट परीक्षा पेपर लीक को लेकर छात्र आंदोलन तेज़ हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने रविवार दोपहर मीडिया से बात करते हुए कहा, "उनका एकमात्र उद्देश्य राज्य और देश में शांति भंग करना था। इन सभी लोगों के खिलाफ हाल ही में लागू किए गए 'पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा और असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण अधिनियम, 2026' के तहत कार्रवाई की जाएगी।"
अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि अब तक गिरफ्तार किए गए 14 लोगों में से कोई भी छात्र नहीं था। उनके अनुसार, सीसीटीवी और वीडियो साक्ष्य के आधार पर पहचाने गए ये लोग कथित तौर पर कट्टरपंथी थे, जिन्होंने शुक्रवार की रैली में शामिल होने के बाद छात्र कार्यकर्ताओं का रूप धारण कर शहर में अशांति फैलाने की कोशिश की।
नया कानून और कानूनी कार्रवाई
सभी 16 आरोपियों के खिलाफ 'पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा और असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण अधिनियम, 2026' के तहत मामला दर्ज किया जाएगा, जिसे मुख्यमंत्री ने पिछले हफ्ते लागू किया था। इस अधिनियम में असामाजिक और हिंसक गतिविधियों के विरुद्ध सख्त दंडात्मक प्रावधान हैं।
गौरतलब है कि यह कानून अपेक्षाकृत नया है और इस मामले में इसका पहली बार बड़े पैमाने पर प्रयोग किया जा रहा है, जो इसकी व्यावहारिक परीक्षा भी मानी जा रही है।
आगे क्या होगा
जाँच एजेंसियाँ सीसीटीवी फुटेज की जाँच जारी रखे हुए हैं और अधिकारियों ने संकेत दिया है कि और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं। नीट पेपर लीक विवाद राष्ट्रीय स्तर पर जारी है और इस पृष्ठभूमि में कोलकाता की यह घटना राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़े करती है।