कोलकाता: कैमैक स्ट्रीट केस में गिरफ्तार तौकीर आलम पर हिरासत यातना का आरोप, SSKM में भर्ती
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता के कैमैक स्ट्रीट मामले में गिरफ्तार आरोपी मोहम्मद तौकीर आलम के साथ पुलिस हिरासत में कथित यातना का गंभीर मामला सामने आया है। 1 सितंबर 2026 को इस संबंध में कोलकाता पुलिस को औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसकी प्रति मानवाधिकार आयोगों को भी भेजी गई है।
गिरफ्तारी और कथित यातना का घटनाक्रम
शिकायत के अनुसार, मोहम्मद तौकीर आलम को 28 अगस्त को कोलकाता पुलिस की एंटी राउडी सेक्शन ने कथित तौर पर अवैध तरीके से गिरफ्तार किया। आरोप है कि गिरफ्तारी के बाद उन्हें शेक्सपियर सरणी पुलिस स्टेशन में हिरासत के दौरान प्रताड़ित किया गया।
तौकीर आलम के भाई का आरोप है कि हिरासत में हुई कथित मारपीट के कारण उनके सिर में गंभीर चोटें आईं, जिसके चलते चार टांके लगाने पड़े। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया।
मामले की कानूनी पृष्ठभूमि
अधिवक्ता अरका कुमार नाग के अनुसार, कैमैक स्ट्रीट प्रकरण में शेक्सपियर सरणी पुलिस स्टेशन में केस नंबर 146/2026 दर्ज किया गया था, जिसके तहत घटनास्थल से कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने दावा किया कि जिन धाराओं के तहत यह मामला दर्ज हुआ है, वे सभी सात वर्ष से कम की सज़ा वाले अपराधों से संबंधित हैं।
अधिवक्ता का यह भी आरोप है कि 28 अगस्त को की गई अतिरिक्त गिरफ्तारी में गिरफ्तार व्यक्ति को कथित हिरासत यातना के कारण एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
शिकायत में क्या माँगें रखी गई हैं
दर्ज शिकायत में तीन प्रमुख माँगें रखी गई हैं — इस पूरे मामले की स्वतंत्र जाँच, शेक्सपियर सरणी पुलिस स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखना, और संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड का संरक्षण। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में पुलिस हिरासत में मौत और उत्पीड़न के मामलों पर मानवाधिकार निकाय सक्रिय हैं।
पुलिस की प्रतिक्रिया
अब तक कोलकाता पुलिस की ओर से हिरासत में यातना के इन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। मानवाधिकार आयोगों को शिकायत की प्रति भेजे जाने के बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई की प्रतीक्षा है।
आगे क्या होगा
मानवाधिकार आयोगों द्वारा संज्ञान लिए जाने की स्थिति में कोलकाता पुलिस को जवाब देना होगा। सीसीटीवी फुटेज और मेडिकल रिकॉर्ड इस मामले में निर्णायक साक्ष्य बन सकते हैं। आरोपों की सत्यता की पुष्टि स्वतंत्र जाँच के बाद ही हो सकेगी।