कोलकाता: पूर्व TMC पार्षद शम्स इकबाल ₹70 लाख रंगदारी मामले में गिरफ्तार, KMC का 13वाँ केस
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता नगर निगम (KMC) के वार्ड नंबर 134 के पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) पार्षद शम्स इकबाल को रविवार देर रात एक स्थानीय व्यवसायी से ₹70 लाख की जबरन वसूली के आरोप में गिरफ्तार किया गया। पुलिस अधिकारियों ने सोमवार, 29 जून को यह जानकारी दी। इस गिरफ्तारी के साथ राज्य में सरकार बदलने के बाद से KMC के 13 पूर्व TMC पार्षद जबरन वसूली और इससे जुड़े आरोपों में गिरफ्तार हो चुके हैं।
मुख्य घटनाक्रम
गार्डन रीच इलाके के TMC नेता इकबाल को कोलकाता के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम का करीबी सहयोगी बताया जाता है। शिकायतकर्ता मोहम्मद शादाब ने गार्डन रीच पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई शिकायत में आरोप लगाया कि इकबाल और उसके साथियों ने जून 2023 से उनसे जबरन वसूली शुरू की। शादाब के अनुसार, उन्हें यह कहकर डराया गया कि इलाके में कारोबार जारी रखना है तो भुगतान अनिवार्य है।
शिकायत में यह भी दावा किया गया कि वसूली बार-बार हुई और कथित तौर पर बंदूक के बल पर भी रकम माँगी गई। शादाब का कहना है कि उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई, जिसके डर से उन्होंने पहले पुलिस से संपर्क नहीं किया।
एफआईआर और आरोप
शिकायत के आधार पर इकबाल के साथ उसके दो कथित साथियों — मोहम्मद फराज और फिरोज कुरैशी — के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है। इकबाल पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत जबरन वसूली और आपराधिक धमकी के आरोप हैं। इसके अलावा आर्म्स एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने बताया कि आरोपी इलाके में काफी प्रभावशाली थे।
अदालत में पेशी और आगे की कार्रवाई
इकबाल को सोमवार को शहर की अदालत में पेश किया जाना था। पुलिस आगे की पूछताछ के लिए उसकी हिरासत की माँग कर सकती है। अधिकारियों ने बताया कि अब और शिकायतकर्ता सामने आ रहे हैं, जो कहते हैं कि वे पहले भय के कारण चुप रहे।
KMC और राजनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि इकबाल ने अतीत में कई सार्वजनिक सभाओं में पूर्व मेयर फिरहाद हकीम के साथ मंच साझा किया था। हकीम के इस्तीफे के बाद KMC सिविक बोर्ड को फिलहाल एक प्रशासक चला रहा है और नए चुनाव होने तक यही व्यवस्था जारी रहेगी। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद पूर्व TMC पार्षदों के खिलाफ कार्रवाइयों की एक लंबी शृंखला सामने आई है — और 13वीं गिरफ्तारी इस प्रवृत्ति को और स्पष्ट करती है।
आगे क्या होगा
जाँच एजेंसियाँ अन्य संभावित शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज कर रही हैं। फराज और कुरैशी की गिरफ्तारी की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। मामले की सुनवाई आगे बढ़ने के साथ KMC में जवाबदेही को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ने की संभावना है।