स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली विधानसभा 14-15 अगस्त को जनता के लिए खुलेगी, बिना पंजीकरण प्रवेश
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली की ऐतिहासिक विधानसभा इस बार स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 14 और 15 अगस्त को आम नागरिकों के लिए खुली रहेगी — और इसके लिए किसी पूर्व पंजीकरण की आवश्यकता नहीं होगी। शाम 5 बजे से रात 8 बजे तक चलने वाले इस विशेष आयोजन में इतिहास, संस्कृति और लोकतांत्रिक भागीदारी का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।
आयोजन का स्वरूप और समय
विधानसभा परिसर दोनों दिन सायं 5 बजे से रात्रि 8 बजे तक आगंतुकों के लिए खुला रहेगा। शाम के समय परिसर को विशेष रोशनी से सजाया जाएगा, जो इसे एक यादगार अनुभव बनाएगा। आधार कार्ड या कोई अन्य वैध सरकारी पहचान पत्र साथ लाना अनिवार्य होगा — इसके अलावा कोई और औपचारिकता नहीं है।
सांस्कृतिक और देशभक्ति कार्यक्रम
सीमा सुरक्षा बल (BSF) और केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) के बैंड देशभक्तिपूर्ण संगीत की प्रस्तुति देंगे। इसके साथ ही साहित्य कला परिषद द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे, जिनमें भारत की विविध कलात्मक परंपराओं की झलक मिलेगी। यह आयोजन राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक विविधता — दोनों का उत्सव मनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
विशिष्ट अतिथि और नेतृत्व
कार्यक्रम में दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, विधानसभा सदस्य और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे। स्पीकर गुप्ता ने कहा, 'स्वतंत्रता दिवस न केवल उन बलिदानों को याद करने का अवसर है जिन्होंने भारत की आज़ादी सुनिश्चित की, बल्कि नागरिकों के लिए उन लोकतांत्रिक संस्थानों के साथ अपने जुड़ाव को गहरा करने का भी अवसर है जो गणतंत्र को कायम रखते हैं।'
आम जनता पर असर
आगंतुकों को परिसर के भीतर स्थित ऐतिहासिक विधानसभा भवन और महत्वपूर्ण धरोहर स्थलों का भ्रमण करने का अवसर मिलेगा। वे दिल्ली के विधायी और लोकतांत्रिक इतिहास में इस संस्था की भूमिका के बारे में भी जान सकेंगे। यह पहल विशेष रूप से युवाओं को लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक मूल्यों के करीब लाने के लिए बनाई गई है।
लोकतांत्रिक संदेश
स्पीकर गुप्ता ने कहा कि विधानसभा के द्वार जनता के लिए खोलना इस सिद्धांत को दर्शाता है कि 'लोकतांत्रिक संस्थाएँ अंततः उन्हीं नागरिकों की होती हैं जिनकी वे सेवा करती हैं।' यह आयोजन स्वतंत्रता के उत्सव को एक लोकतांत्रिक संस्था के साथ प्रत्यक्ष जन सहभागिता का अवसर बनाने की दिशा में एक सार्थक कदम है।