भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता: वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा — फरवरी की रूपरेखा पर दोनों देश प्रतिबद्ध
सारांश
मुख्य बातें
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने गुरुवार, 13 अगस्त को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि भारत-अमेरिका प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर वार्ता जारी है और दोनों पक्ष फरवरी 2026 में तय रूपरेखा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। अग्रवाल ने कहा कि इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच नियमित संपर्क बना हुआ है।
वाणिज्य सचिव का बयान
अग्रवाल ने मीडिया से कहा, 'हमारा मानना है कि दोनों पक्ष फरवरी में जिस रूपरेखा पर सहमत हुए थे, उसे आगे बढ़ाने और अंतिम रूप देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि 'हम व्यापार समझौते को लेकर अमेरिकी पक्ष के साथ बातचीत कर रहे हैं और हमारा संपर्क लगातार बना हुआ है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका द्वारा लगाए गए नए टैरिफ और धारा 301 के तहत जारी जाँच ने द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में अनिश्चितता पैदा कर दी है।
टैरिफ और व्यापार अनिश्चितता
फिलहाल अमेरिका में धारा 301 के तहत चल रही जाँच के कारण भारत के निर्यात पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत शुल्क लगाया जा रहा है। यह जाँच कथित तौर पर जबरन श्रम से जुड़ी चिंताओं की पड़ताल कर रही है।
इसके अलावा, अमेरिकी सीनेट ने एक प्रतिबंध विधेयक पारित किया है, जिसके तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत सहित रूसी तेल के प्रमुख खरीदारों से आयातित वस्तुओं पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। पश्चिमी देशों का मानना है कि रूस से तेल आयात उसे यूक्रेन युद्ध के लिए वित्तीय संबल देता है। गौरतलब है कि जुलाई 2026 में भारत के कुल तेल आयात में रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक रही।
वाणिज्य सचिव ने इस विधेयक पर टिप्पणी करते हुए कहा, 'यह अमेरिका की विधायी प्रक्रिया है, जो अभी चल रही है और यह उनका आंतरिक मामला है।' उन्होंने इस मुद्दे पर आगे विस्तार से बात करने से इनकार कर दिया।
ऊर्जा आपूर्ति में विविधता
अग्रवाल ने बताया कि ईरान युद्ध शुरू होने और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के बाद भारत ने कच्चे तेल के आयात स्रोतों में उल्लेखनीय विविधता लाई है। पहले भारत 27 देशों से कच्चा तेल आयात करता था, जो अब बढ़कर 41 देशों तक पहुँच गया है। सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस निर्यात का परिवहन होर्मुज स्ट्रेट से होता है।
इसी प्रकार, तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के आयात स्रोत भी 6 देशों से बढ़कर 15 देशों तक पहुँच गए हैं। इनमें अमेरिका अब LNG आयात का एक बड़ा हिस्सा उपलब्ध कराता है — जो भारत-अमेरिका ऊर्जा साझेदारी की बढ़ती गहराई को दर्शाता है।
भारत की ऊर्जा निर्भरता और रणनीतिक चुनौती
भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरत का 85 प्रतिशत से अधिक आयात करता है। ऐसे में वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच आपूर्ति श्रृंखला को मज़बूत रखना और ऊर्जा के विविध स्रोत सुनिश्चित करना देश की प्राथमिकता बन गई है। यह ऐसे समय में है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में भारी अस्थिरता बनी हुई है और एकल स्रोत पर निर्भरता का जोखिम स्पष्ट रूप से सामने आ चुका है।
आने वाले हफ्तों में भारत-अमेरिका BTA वार्ता की दिशा काफी हद तक अमेरिकी विधायी प्रक्रिया और टैरिफ नीति पर निर्भर करेगी।