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कोलकाता में BJP की तिरंगा रैली: 24 जुलाई की अशांति के विरोध में सियालदह से जादवपुर तक मार्च

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कोलकाता में BJP की तिरंगा रैली: 24 जुलाई की अशांति के विरोध में सियालदह से जादवपुर तक मार्च

सारांश

नीट-यूजी पेपर लीक विरोध की आड़ में 24 जुलाई को कोलकाता में भड़की हिंसा के बाद BJP सड़कों पर उतरी। सियालदह से जादवपुर तक तिरंगा रैलियाँ, 16 गिरफ्तारियाँ और पत्रकारों पर हमले — बंगाल में राजनीतिक तापमान तेज़ी से बढ़ रहा है।

मुख्य बातें

BJP ने 27 जुलाई को कोलकाता में दो तिरंगा रैलियाँ निकालीं — सियालदह से एस्प्लेनेड और गोलपार्क से जादवपुर ।
रैली में राज्य मंत्री तापस रॉय , विधायक सजल घोष और नेता शंकुदेव पांडा शामिल रहे।
24 जुलाई को SFI व वामपंथी छात्र संगठनों के जुलूस में पुलिस पर बोतलें-जूते फेंके गए; पुलिस ने लाठीचार्ज किया।
महिला पत्रकारों सहित कई मीडियाकर्मियों के उत्पीड़न के आरोप सामने आए।
कोलकाता पुलिस ने अब तक 16 लोगों को गिरफ्तार किया; और गिरफ्तारियाँ अपेक्षित।
BJP ने CPI(M) , INC और TMC पर उपद्रवियों को संगठित करने का आरोप लगाया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने 27 जुलाई, सोमवार को कोलकाता में दो बड़ी तिरंगा रैलियाँ निकालीं — 24 जुलाई को वामपंथी छात्र संगठनों के आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा और अशांति के विरोध में। एक जुलूस मध्य कोलकाता के सियालदह से एस्प्लेनेड तक और दूसरा दक्षिण कोलकाता के गोलपार्क से जादवपुर तक निकाला गया।

मुख्य घटनाक्रम

सियालदह से निकला जुलूस दोपहर 3:30 बजे के बाद राष्ट्रीय ध्वज के साथ आगे बढ़ा। इसमें राज्य मंत्री तापस रॉय, BJP विधायक सजल घोष, पार्टी नेता शंकुदेव पांडा, तमोग्ना घोष और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल रहे। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री के अपमान के विरोध में नारे लगाए और गिरफ्तार उपद्रवियों को कड़ी सजा देने की माँग की।

BJP नेताओं की प्रतिक्रिया

BJP विधायक सजल घोष ने आरोप लगाया कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)], भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने मिलकर 24 जुलाई की अशांति फैलाने वाले उपद्रवियों को तैयार किया था। उन्होंने कहा कि नीट-यूजी पेपर लीक आंदोलन की आड़ में राष्ट्रविरोधी गतिविधियाँ बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।

राज्य मंत्री तापस रॉय ने आरोप लगाया कि छात्रों को गुमराह कर हिंसा भड़काई जा रही है और देश को बाँटने की कोशिश हो रही है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कांग्रेस शासन के दौरान 53 बार प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएँ हुई थीं। रॉय ने कहा कि पुलिस और मीडिया को निशाना बनाने वालों का सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए।

24 जुलाई की अशांति: क्या हुआ था

शुक्रवार, 24 जुलाई को स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और अन्य वामपंथी छात्र संगठनों ने नीट-यूजी पेपर लीक के विरोध में और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को लेकर सियालदह से एस्प्लेनेड तक जुलूस निकाला था। जुलूस के एस्प्लेनेड पहुँचने पर पुलिस पर बोतलें और जूते फेंके गए, जिसके जवाब में पुलिस ने लाठीचार्ज किया। ड्यूटी पर तैनात कई पत्रकारों को परेशान किया गया और महिला पत्रकारों के उत्पीड़न के आरोप भी सामने आए।

प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई

शुक्रवार शाम को तत्कालीन मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने SSKM अस्पताल जाकर घायल पत्रकारों और फोटो पत्रकारों से मुलाकात की। अस्पताल से लौटने के बाद उन्होंने कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया और हमलावरों की पहचान करने का वादा किया।

कोलकाता पुलिस के सूत्रों के अनुसार, शनिवार से गिरफ्तारियाँ शुरू हो गईं और अब तक 16 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि आगे और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं।

आगे क्या

गिरफ्तारियों का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। BJP की इन रैलियों ने पश्चिम बंगाल में राजनीतिक तनाव को और गहरा कर दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब नीट-यूजी विवाद को लेकर देशभर में विपक्षी दलों और छात्र संगठनों का आंदोलन चल रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि वामपंथी और विपक्षी दल परीक्षा प्रणाली की विफलता को केंद्र की जवाबदेही से जोड़ रहे हैं। पत्रकारों पर हमले — जिनकी पुष्टि अस्पताल दौरों से होती है — इस विवाद में एक गंभीर आयाम जोड़ते हैं जिसे राजनीतिक बयानबाज़ी में दबाया नहीं जाना चाहिए। असली सवाल यह है कि 16 गिरफ्तारियाँ क्या सभी पक्षों पर समान रूप से लागू होती हैं, या यह चुनिंदा कार्रवाई है — इसका जवाब जाँच की पारदर्शिता से ही मिलेगा।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

24 जुलाई को कोलकाता में क्या हुआ था?
24 जुलाई को SFI और वामपंथी छात्र संगठनों ने नीट-यूजी पेपर लीक के विरोध में सियालदह से एस्प्लेनेड तक जुलूस निकाला। एस्प्लेनेड पहुँचने पर पुलिस पर बोतलें और जूते फेंके गए, पुलिस ने लाठीचार्ज किया और कई पत्रकारों के उत्पीड़न के आरोप सामने आए।
BJP की तिरंगा रैली में कौन-कौन शामिल थे?
रैली में राज्य मंत्री तापस रॉय, BJP विधायक सजल घोष, पार्टी नेता शंकुदेव पांडा और तमोग्ना घोष सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल रहे। सियालदह से एस्प्लेनेड और गोलपार्क से जादवपुर — दो अलग-अलग जुलूस निकाले गए।
24 जुलाई की अशांति में अब तक कितनी गिरफ्तारियाँ हुई हैं?
कोलकाता पुलिस के सूत्रों के अनुसार अब तक 16 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। शनिवार से शुरू हुई गिरफ्तारियों का सिलसिला जारी है और आगे और गिरफ्तारियाँ होने की संभावना बताई जा रही है।
BJP ने 24 जुलाई की हिंसा के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया?
BJP विधायक सजल घोष ने CPI(M), कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उन्होंने मिलकर उपद्रवियों को तैयार किया। पार्टी ने नीट आंदोलन की आड़ में राष्ट्रविरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए कड़ी सजा की माँग की।
पत्रकारों पर हमले के बाद क्या कार्रवाई हुई?
तत्कालीन मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शुक्रवार शाम SSKM अस्पताल जाकर घायल पत्रकारों से मुलाकात की और कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया। पुलिस ने शनिवार से गिरफ्तारियाँ शुरू कर दीं और हमलावरों की पहचान की प्रक्रिया जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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