2 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बेलडांगा हिंसा मामले में 15 आरोपियों की सशर्त जमानत को एनआईए ने कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बेलडांगा हिंसा मामले में 15 आरोपियों की सशर्त जमानत को एनआईए ने कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी

सारांश

बेलडांगा हिंसा मामले में 15 आरोपियों को मिली सशर्त जमानत पर एनआईए ने कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी है। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी।

मुख्य बातें

एनआईए ने कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
15 आरोपियों को सशर्त जमानत मिली थी।
आरोपियों की जमानत सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के खिलाफ है।
हिंसा का कारण एक प्रवासी मजदूर की मौत थी।
अगली सुनवाई में निर्णय होगा कि जमानत बरकरार रहेगी या नहीं।

कोलकाता, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने सोमवार को बेलडांगा हिंसा मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। एजेंसी ने निचली अदालत के उस निर्णय को चुनौती दी है, जिसमें 15 आरोपियों को सशर्त जमानत दी गई थी।

एनआईए ने आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी करते हुए आरोपियों को जमानत प्रदान की गई। एजेंसी ने हाईकोर्ट में कहा कि निचली अदालत ऐसे मामलों में जमानत नहीं दे सकती जब जांच चल रही हो।

इन 15 आरोपियों को जमानत तब मिली, जब एजेंसी 90 दिनों के भीतर आरोप पत्र दाखिल करने में असफल रही। कानून के अनुसार, गिरफ्तार व्यक्तियों के खिलाफ एक निश्चित समय सीमा के भीतर आरोप पत्र दाखिल करना अनिवार्य होता है, लेकिन 90 दिन बीत जाने के बाद भी एनआईए ने न तो कोई अंतिम आरोप पत्र पेश किया और न ही किसी जांच से संबंधित रिपोर्ट। जांच की प्रगति के बारे में अदालत के सवालों का जवाब देने में भी एनआईए के अधिकारी नाकाम रहे।

इस स्थिति के कारण, गिरफ्तार लोगों के वकीलों ने जमानत के लिए अर्जी दी। विशेष अदालत ने 15 आरोपियों को 10,000 रुपए के मुचलके पर सशर्त जमानत दे दी।

इस मामले की सुनवाई मंगलवार को होगी, तब यह स्पष्ट होगा कि निचली अदालत का निर्णय बरकरार रहेगा या एनआईए को हाईकोर्ट के हस्तक्षेप से उन 15 लोगों की हिरासत पुनः प्राप्त होगी।

शनिवार को एनआईए की एक विशेष अदालत ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में इस वर्ष की शुरुआत में भड़की हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार 35 आरोपियों में से 15 को सशर्त जमानत दी थी।

वास्तव में, इस साल जनवरी में पड़ोसी राज्य झारखंड में एक प्रवासी मजदूर की मौत को लेकर बेलडांगा में हिंसा और दंगे जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई थी। जब उस प्रवासी मजदूर का शव बेलडांगा पहुंचा, तो तनाव और बढ़ गया।

स्थानीय प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उस प्रवासी मजदूर की झारखंड में धार्मिक और भाषाई कारणों से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। बेलडांगा में रेलवे और सड़कों को जाम करके विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।

पुलिस द्वारा जाम हटाने के प्रयास पर प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाकर्मियों पर घात लगाकर हमला कर दिया। कुछ पत्रकारों पर भी हमला किया गया, जिसमें से कुछ गंभीर रूप से घायल हो गए।

बाद में झारखंड पुलिस ने एक बयान जारी किया, जिसमें पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए प्रवासी मजदूर की मौत को आत्महत्या का मामला बताया गया।

क्रिकेटर से राजनेता बने और स्थानीय तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा सदस्य यूसुफ पठान को इस बात के लिए कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा कि जब पूरा इलाका जल रहा था, तब वे न तो उस इलाके में मौजूद थे और न ही राज्य में।

इसके बाद, पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की, जिसमें बेलडांगा में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की तैनाती और इस मामले की जांच एनआईए को सौंपने की मांग की गई।

यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जिसने कलकत्ता हाईकोर्ट की स्थिति से सहमति जताते हुए कहा कि यदि केंद्रीय गृह मंत्री इसे आवश्यक समझते हैं, तो वे एनआईए को इस मामले की जांच शुरू करने के लिए कह सकते हैं। अंततः, एनआईए ने इस मामले की जांच आरंभ कर दी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो कि न्याय व्यवस्था में विश्वास को प्रभावित कर सकता है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बेलडांगा हिंसा मामला क्या है?
यह मामला पश्चिम बंगाल के बेलडांगा में भड़की हिंसा से संबंधित है, जिसमें 15 आरोपियों को सशर्त जमानत दी गई थी।
एनआईए ने उच्च न्यायालय में क्या चुनौती दी है?
एनआईए ने निचली अदालत के निर्णय को चुनौती दी है, जिसमें 15 आरोपियों को जमानत दी गई थी।
इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
इस मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को होगी।
क्या आरोपियों को जमानत मिलना उचित था?
इस पर उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद ही स्पष्टता आएगी।
बेलडांगा हिंसा के पीछे का कारण क्या था?
यह हिंसा एक प्रवासी मजदूर की मृत्यु के बाद भड़की, जिसे धार्मिक और भाषाई कारणों से पीट-पीटकर हत्या का आरोप लगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 दिन पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले