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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने NDPS मामले में पुलिस जांच पर उठाए सवाल, DGP को नोटिस

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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने NDPS मामले में पुलिस जांच पर उठाए सवाल, DGP को नोटिस

सारांश

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर के NDPS मामले में उस पुलिस अधिकारी द्वारा जांच किए जाने पर सवाल उठाया जिसने खुद नालिश दर्ज कराई थी। DGP को शपथ पत्र सहित जवाब देने का निर्देश; याचिका में महिला को फंसाने की साजिश और नाबालिग को 10 घंटे थाने में बैठाने का आरोप।

मुख्य बातें

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने NDPS मामले में पुलिस की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए और DGP को नोटिस जारी किया।
जांच अधिकारी शैलेंद्र सिंह ने कथित तौर पर स्वयं देहाती नालिश दर्ज कराई और उसी मामले की जांच भी की — कोर्ट ने इस पर आपत्ति जताई।
मामला बिलासपुर के सरकंडा थाना क्षेत्र में 2,925 क्लोनाजेपाम (रिवोट्रिल) गोलियों की बरामदगी से जुड़ा है।
याचिका में आरोप है कि 14 वर्षीय नाबालिग को बिना एफआईआर के 10 घंटे थाने में बैठाए रखा गया।
याचिकाकर्ताओं ने फोरेंसिक जांच के लिए बच्चे का मोबाइल उपलब्ध कराने की पेशकश की है।
अगली सुनवाई 24 अगस्त को निर्धारित है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर के एक NDPS (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस) मामले में पुलिस की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने DGP को शपथ पत्र सहित विस्तृत जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त को निर्धारित है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह प्रकरण बिलासपुर के सरकंडा थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहाँ कथित तौर पर 2,925 क्लोनाजेपाम (रिवोट्रिल) गोलियाँ बरामद होने के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह मामला एक पारिवारिक विवाद की आड़ में एक महिला को फंसाने की साजिश के तहत बनाया गया है।

गौरतलब है कि कथित प्रतिबंधित दवाओं वाला पॉलीथिन बैग सीधे महिला को नहीं मिला था। याचिका के अनुसार, करीब 14 वर्षीय एक नाबालिग बच्चे को पतंग उड़ाते समय यह बैग घर की छत पर मिला। बच्चे ने मोबाइल पर दवाओं की जानकारी जुटाने के बाद अपनी माँ को इसकी सूचना दी। परिवार का दावा है कि बैग को अनचाही वस्तु समझकर सीढ़ियों के पास कचरे के स्थान पर रख दिया गया था।

कोर्ट की मुख्य आपत्तियाँ

हाईकोर्ट ने एक बुनियादी प्रक्रियागत सवाल उठाया — पुलिस अधिकारी शैलेंद्र सिंह, जिन्होंने कथित तौर पर स्वयं देहाती नालिश दर्ज कराई और जिसके आधार पर एफआईआर हुई, उन्हीं को उसी मामले की जांच करने और चार्जशीट पेश करने की अनुमति कैसे दी गई? यह प्रश्न जांच की निष्पक्षता और पुलिस प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सीधा प्रहार करता है।

कोर्ट ने DGP को जांच अधिकारी शैलेंद्र सिंह के पिछले आचरण के संबंध में भी व्यक्तिगत शपथ पत्र के साथ विस्तृत जानकारी देने का निर्देश दिया है।

नाबालिग के साथ कथित व्यवहार

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि 14 वर्षीय बच्चे के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं होने के बावजूद उसे पुलिस थाने ले जाकर 10 घंटे तक बैठाए रखा गया। यदि यह आरोप सही है, तो यह नाबालिगों के अधिकारों से जुड़े कानूनी प्रावधानों के लिहाज से गंभीर प्रश्न उठाता है।

याचिकाकर्ताओं की माँगें

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से माँग की है कि दवाओं के स्रोत, बैग को छत पर रखने वाले व्यक्ति की पहचान, संबंधित लोगों की भूमिका और महिला की गिरफ्तारी की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने बच्चे का मोबाइल फोन भी फोरेंसिक जांच के लिए उपलब्ध कराने की पेशकश की है।

आगे क्या होगा

कोर्ट ने मामले में संबंधित पक्ष को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से या वकील के माध्यम से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। 24 अगस्त की सुनवाई में DGP का जवाब और याचिकाकर्ताओं के दावों की पड़ताल केंद्र में रहेगी। यह मामला छत्तीसगढ़ में पुलिस जांच प्रक्रिया की जवाबदेही के व्यापक सवाल को भी सामने लाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसी ने जांच की और चार्जशीट भी पेश की — यह प्रक्रियागत खामी अकेले इस मामले की नहीं, बल्कि व्यापक पुलिस व्यवस्था की कमज़ोरी को उजागर करती है। NDPS जैसे सख्त कानून, जहाँ ज़मानत मिलना ही कठिन होता है, में जांच अधिकारी की निष्पक्षता सर्वोपरि होनी चाहिए। नाबालिग को बिना किसी कानूनी आधार के 10 घंटे थाने में रोकने का आरोप यदि सही है, तो यह किशोर न्याय कानून का स्पष्ट उल्लंघन है। हाईकोर्ट का हस्तक्षेप ज़रूरी था, लेकिन असली परीक्षा यह है कि DGP का जवाब जवाबदेही की दिशा में ठोस कदम उठाता है या महज़ औपचारिकता बनकर रह जाता है।
RashtraPress
23 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने NDPS मामले में क्या सवाल उठाए हैं?
हाईकोर्ट ने पूछा कि जिस पुलिस अधिकारी शैलेंद्र सिंह ने खुद देहाती नालिश दर्ज कराई, उन्हें उसी मामले की जांच और चार्जशीट पेश करने की अनुमति कैसे दी गई। कोर्ट ने DGP को शपथ पत्र सहित जवाब देने का निर्देश दिया है।
बिलासपुर NDPS मामले में क्या बरामद हुआ था?
बिलासपुर के सरकंडा थाना क्षेत्र में 2,925 क्लोनाजेपाम (रिवोट्रिल) गोलियाँ बरामद होने के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह बैग घर की छत पर एक 14 वर्षीय नाबालिग को मिला था, न कि सीधे महिला को।
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से क्या माँग की है?
याचिकाकर्ताओं ने दवाओं के स्रोत, बैग को छत पर रखने वाले की पहचान और महिला की गिरफ्तारी की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच की माँग की है। उन्होंने बच्चे का मोबाइल फोन फोरेंसिक जांच के लिए देने की भी पेशकश की है।
नाबालिग बच्चे के साथ क्या हुआ बताया गया है?
याचिका के अनुसार, 14 वर्षीय बच्चे के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं होने के बावजूद उसे पुलिस थाने ले जाकर 10 घंटे तक बैठाए रखा गया। यह आरोप नाबालिगों के अधिकारों से जुड़े कानूनी प्रावधानों पर गंभीर सवाल उठाता है।
इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त को निर्धारित है। उस तारीख तक DGP को शपथ पत्र सहित जवाब और जांच अधिकारी के पिछले आचरण का विवरण प्रस्तुत करना होगा।
राष्ट्र प्रेस
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