मुंबई में एनसीबी की बड़ी कार्रवाई: आदतन ड्रग तस्कर राहुल शेडगे हिरासत में, तलोजा जेल भेजा गया
सारांश
मुख्य बातें
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने 27 मई 2026 को मुंबई में संगठित ड्रग तस्करी नेटवर्क के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई करते हुए आदतन अपराधी राहुल बालकृष्ण शेडगे को हिरासत में लिया। आरोपी को बाद में नवी मुंबई की तलोजा सेंट्रल जेल भेज दिया गया। यह गिरफ्तारी भारत सरकार के पीआईटी-एनडीपीएस डिवीजन के संयुक्त सचिव द्वारा 14 मई 2026 को जारी निरोध आदेश के तहत की गई।
मुख्य घटनाक्रम
एनसीबी के अनुसार, राहुल बालकृष्ण शेडगे वर्षों से ड्रग तस्करी और अवैध मादक पदार्थों के निर्माण में सक्रिय था। एनसीबी और राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) सहित विभिन्न जाँच एजेंसियाँ उसे अब तक चार बार गिरफ्तार कर चुकी हैं। अधिकारियों ने बताया कि आरोपी को रसायन विज्ञान की गहरी समझ है, जिसका उसने अवैध कारोबार में दुरुपयोग किया।
आपराधिक इतिहास: 2009 से 2025 तक
वर्ष 2009 में डीआरआई मुंबई ने शेडगे को पहली बार अल्प्राजोलम, नॉर्डाजेपाम, एम्फेटामिन और डाइजेपाम से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया था। जमानत मिलने के बाद भी उसने अपना अवैध कारोबार जारी रखा।
वर्ष 2012 में एनसीबी मुंबई ने उसे कई शहरों में फैले एक बड़े केटामाइन तस्करी मामले में पकड़ा। इसके बाद वर्ष 2018 में डीआरआई मुंबई ने उसे अवैध ड्रग्स निर्माण के प्रयास के आरोप में फिर गिरफ्तार किया — फिर भी वह नेटवर्क से जुड़ा रहा।
वर्ष 2025 में एनसीबी ने उसे एक ऐसे रसायन के अवैध निर्माण के मामले में गिरफ्तार किया जो केटामाइन बनाने की प्रक्रिया से ठीक एक चरण पहले का केमिकल था। जाँच एजेंसियों के अनुसार, शेडगे ने रायगढ़ जिले में एक रासायनिक प्रयोगशाला स्थापित की थी, जहाँ वह यह यौगिक तैयार कर रहा था।
कानूनी दाँव-पेच
एजेंसियों का कहना है कि शेडगे ने जानबूझकर एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के सीधे दायरे से बचने के लिए ऐसे रसायनों का उत्पादन किया जो तकनीकी रूप से प्रतिबंधित पदार्थ नहीं थे, लेकिन अंतिम ड्रग उत्पाद से केवल एक रासायनिक चरण दूर थे। यह तरीका कानूनी खामियों का सुनियोजित दोहन है, जो संगठित ड्रग सिंडिकेट की बढ़ती परिष्कृत कार्यप्रणाली को दर्शाता है।
एनसीबी का व्यापक अभियान
एनसीबी ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई संगठित ड्रग सिंडिकेट और आदतन अपराधियों के विरुद्ध चल रहे व्यापक अभियान का हिस्सा है। ब्यूरो ने '2047 तक नशा मुक्त भारत' के लक्ष्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। एनसीबी ने आम नागरिकों से अपील की है कि ड्रग्स से जुड़ी किसी भी सूचना को मानस राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन के टोल-फ्री नंबर 1933 पर साझा करें और आश्वस्त किया कि सूचनादाता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
आगे क्या होगा
पीआईटी-एनडीपीएस के तहत जारी निरोध आदेश के अंतर्गत शेडगे को फिलहाल तलोजा सेंट्रल जेल में रखा गया है। एनसीबी के अनुसार, उसकी लगातार आपराधिक गतिविधियों और बार-बार जमानत के बाद नेटवर्क में वापसी को देखते हुए इस बार निरोध का रास्ता अपनाया गया, जो सामान्य जमानत प्रक्रिया से अधिक प्रभावी माना जाता है।