सुप्रीम कोर्ट का बंगाल पुलिस को झटका: मिलन प्रधान जमानत मामले में CJI ने गुरुवार सुनवाई से किया इनकार
सारांश
मुख्य बातें
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 30 सितंबर 2026 को पश्चिम बंगाल पुलिस की उस माँग को ठुकरा दिया, जिसमें नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव के कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को दी गई अंतरिम जमानत के विरुद्ध गुरुवार को तत्काल सुनवाई की अपील की गई थी। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने स्पष्ट कहा कि इस मामले की सुनवाई सोमवार को होगी, गुरुवार को नहीं।
मामले की पृष्ठभूमि
कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल-न्यायाधीश पीठ के जस्टिस तीर्थंकर घोष ने मंगलवार को मिलन प्रधान को 20 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत प्रदान की थी। उच्च न्यायालय ने विशेष रूप से यह स्पष्ट किया कि यह राहत प्रधान को उपचुनाव लड़ने और अन्य उम्मीदवारों की तरह चुनाव प्रचार में स्वतंत्र रूप से भाग लेने के लिए दी जा रही है। यह अंतरिम जमानत उनके विरुद्ध दर्ज छह मामलों पर एक साथ लागू होगी, जैसा कि उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया।
गौरतलब है कि प्रधान को 18 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था और उनकी न्यायिक हिरासत 5 अक्टूबर तक जारी रहने वाली थी। वे पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चा सरकार के दौरान 2007 में नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े हत्या के दो पुराने मामलों में न्यायिक हिरासत में थे।
सर्वोच्च न्यायालय में क्या हुआ
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने CJI के समक्ष तत्काल लिस्टिंग की माँग करते हुए तर्क दिया कि चुनाव के बाद सुनवाई होने पर याचिका व्यावहारिक रूप से निरर्थक हो जाएगी। उन्होंने कहा, 'उन्हें चुनाव के लिए जमानत दी गई है। क्या मैं कल मौका ले सकता हूँ? बस यही कह रहा हूँ।'
हालाँकि, CJI सूर्य कांत ने यह अनुरोध स्वीकार करने से मना कर दिया। उन्होंने कहा, 'हमारा बोर्ड बहुत लंबा है। हम निश्चित रूप से इसे खारिज कर देंगे, लेकिन हम इसे सोमवार को खारिज करेंगे, कल नहीं।' जब SG मेहता ने पुनः अनुरोध दोहराया, तो CJI ने दो टूक शब्दों में कहा, 'नहीं। सोमवार।'
चुनावी समय-सीमा और कानूनी दाँव
नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव 6 अक्टूबर को निर्धारित है और मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। इस पूरे मामले में कलकत्ता उच्च न्यायालय की अगली सुनवाई 11 अक्टूबर को तय है — यानी चुनाव परिणाम आने के दो दिन बाद और अंतरिम जमानत की अवधि समाप्त होने से नौ दिन पहले।
यह ऐसे समय में आया है जब नंदीग्राम पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर केंद्रबिंदु बन गया है। 2021 के विधानसभा चुनाव में यही सीट मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की हार का गवाह बनी थी और अब यह उपचुनाव राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय में सोमवार को सुनवाई के समय तक उपचुनाव हो चुके होंगे, जिससे बंगाल पुलिस की याचिका की व्यावहारिक प्रासंगिकता पर CJI की टिप्पणी सटीक साबित होती दिखती है। विधि विशेषज्ञों के अनुसार, एक बार मतदान संपन्न हो जाने के बाद तत्कालीन राहत की माँग स्वतः निरर्थक हो जाती है। कलकत्ता उच्च न्यायालय में 11 अक्टूबर की सुनवाई यह तय करेगी कि प्रधान की जमानत की अगली स्थिति क्या होगी।