30 सितंबर 2026
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सुप्रीम कोर्ट का बंगाल पुलिस को झटका: मिलन प्रधान जमानत मामले में CJI ने गुरुवार सुनवाई से किया इनकार

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सुप्रीम कोर्ट का बंगाल पुलिस को झटका: मिलन प्रधान जमानत मामले में CJI ने गुरुवार सुनवाई से किया इनकार

सारांश

नंदीग्राम उपचुनाव से महज़ छह दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल पुलिस की तत्काल सुनवाई की अपील ठुकरा दी। CJI सूर्य कांत ने सोमवार की तारीख दी — यानी चुनाव के बाद। कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान अब 6 अक्टूबर के मतदान में हिस्सा लेने के लिए स्वतंत्र हैं।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 30 सितंबर 2026 को बंगाल पुलिस की गुरुवार-तत्काल सुनवाई की माँग अस्वीकार की।
CJI सूर्य कांत ने स्पष्ट कहा — सुनवाई सोमवार को होगी, जो 6 अक्टूबर के उपचुनाव के बाद है।
जस्टिस तीर्थंकर घोष ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को 20 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत दी है, जो उनके विरुद्ध दर्ज छह मामलों पर लागू है।
प्रधान 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े हत्या के दो मामलों में 18 सितंबर से हिरासत में थे।
नंदीग्राम उपचुनाव 6 अक्टूबर को; मतगणना 9 अक्टूबर ; कलकत्ता उच्च न्यायालय में अगली सुनवाई 11 अक्टूबर को।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 30 सितंबर 2026 को पश्चिम बंगाल पुलिस की उस माँग को ठुकरा दिया, जिसमें नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव के कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को दी गई अंतरिम जमानत के विरुद्ध गुरुवार को तत्काल सुनवाई की अपील की गई थी। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने स्पष्ट कहा कि इस मामले की सुनवाई सोमवार को होगी, गुरुवार को नहीं।

मामले की पृष्ठभूमि

कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल-न्यायाधीश पीठ के जस्टिस तीर्थंकर घोष ने मंगलवार को मिलन प्रधान को 20 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत प्रदान की थी। उच्च न्यायालय ने विशेष रूप से यह स्पष्ट किया कि यह राहत प्रधान को उपचुनाव लड़ने और अन्य उम्मीदवारों की तरह चुनाव प्रचार में स्वतंत्र रूप से भाग लेने के लिए दी जा रही है। यह अंतरिम जमानत उनके विरुद्ध दर्ज छह मामलों पर एक साथ लागू होगी, जैसा कि उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया।

गौरतलब है कि प्रधान को 18 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था और उनकी न्यायिक हिरासत 5 अक्टूबर तक जारी रहने वाली थी। वे पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चा सरकार के दौरान 2007 में नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े हत्या के दो पुराने मामलों में न्यायिक हिरासत में थे।

सर्वोच्च न्यायालय में क्या हुआ

पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने CJI के समक्ष तत्काल लिस्टिंग की माँग करते हुए तर्क दिया कि चुनाव के बाद सुनवाई होने पर याचिका व्यावहारिक रूप से निरर्थक हो जाएगी। उन्होंने कहा, 'उन्हें चुनाव के लिए जमानत दी गई है। क्या मैं कल मौका ले सकता हूँ? बस यही कह रहा हूँ।'

हालाँकि, CJI सूर्य कांत ने यह अनुरोध स्वीकार करने से मना कर दिया। उन्होंने कहा, 'हमारा बोर्ड बहुत लंबा है। हम निश्चित रूप से इसे खारिज कर देंगे, लेकिन हम इसे सोमवार को खारिज करेंगे, कल नहीं।' जब SG मेहता ने पुनः अनुरोध दोहराया, तो CJI ने दो टूक शब्दों में कहा, 'नहीं। सोमवार।'

चुनावी समय-सीमा और कानूनी दाँव

नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव 6 अक्टूबर को निर्धारित है और मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। इस पूरे मामले में कलकत्ता उच्च न्यायालय की अगली सुनवाई 11 अक्टूबर को तय है — यानी चुनाव परिणाम आने के दो दिन बाद और अंतरिम जमानत की अवधि समाप्त होने से नौ दिन पहले।

यह ऐसे समय में आया है जब नंदीग्राम पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर केंद्रबिंदु बन गया है। 2021 के विधानसभा चुनाव में यही सीट मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की हार का गवाह बनी थी और अब यह उपचुनाव राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय में सोमवार को सुनवाई के समय तक उपचुनाव हो चुके होंगे, जिससे बंगाल पुलिस की याचिका की व्यावहारिक प्रासंगिकता पर CJI की टिप्पणी सटीक साबित होती दिखती है। विधि विशेषज्ञों के अनुसार, एक बार मतदान संपन्न हो जाने के बाद तत्कालीन राहत की माँग स्वतः निरर्थक हो जाती है। कलकत्ता उच्च न्यायालय में 11 अक्टूबर की सुनवाई यह तय करेगी कि प्रधान की जमानत की अगली स्थिति क्या होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन व्यावहारिक रूप से इसके निहितार्थ गहरे हैं — चुनाव से पहले जमानत रद्द न होने से मिलन प्रधान मैदान में बने रहेंगे। CJI की यह टिप्पणी कि 'हम इसे सोमवार को खारिज करेंगे' राज्य सरकार की याचिका की कमज़ोरी को रेखांकित करती है। असली सवाल यह है कि क्या चुनाव के बाद इस याचिका की कोई प्रासंगिकता बचती है, या यह पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा राजनीतिक रूप से संवेदनशील चुनाव से पहले दबाव बनाने की एक असफल कोशिश के रूप में दर्ज होगी। न्यायपालिका का यह रुख स्पष्ट संकेत है कि अदालतें चुनावी कार्यक्रम की आड़ में तात्कालिकता की माँगों को हल्के में नहीं लेतीं।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मिलन प्रधान को अंतरिम जमानत क्यों दी गई?
कलकत्ता उच्च न्यायालय के जस्टिस तीर्थंकर घोष ने मिलन प्रधान को 20 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत दी ताकि वे नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में भाग ले सकें और अन्य उम्मीदवारों की तरह स्वतंत्र रूप से प्रचार कर सकें। यह राहत उनके विरुद्ध दर्ज सभी छह मामलों पर लागू है।
सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल पुलिस की तत्काल सुनवाई की माँग क्यों नहीं मानी?
CJI सूर्य कांत ने कहा कि शीर्ष अदालत का बोर्ड पहले से ही बहुत भरा हुआ है और मामले को सोमवार को सूचीबद्ध किया जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि याचिका को खारिज किया जाएगा, लेकिन गुरुवार को नहीं।
नंदीग्राम उपचुनाव कब है और इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव 6 अक्टूबर 2026 को है और मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। कलकत्ता उच्च न्यायालय में इस मामले की अगली सुनवाई 11 अक्टूबर को है, जो अंतरिम जमानत की अवधि समाप्त होने से नौ दिन पहले होगी।
मिलन प्रधान किन मामलों में हिरासत में थे?
मिलन प्रधान पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चा सरकार के दौरान 2007 में नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े हत्या के दो पुराने मामलों में न्यायिक हिरासत में थे। उन्हें 18 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था और उनकी न्यायिक हिरासत 5 अक्टूबर तक जारी रहने वाली थी।
इस मामले का नंदीग्राम उपचुनाव पर क्या असर पड़ेगा?
सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई सोमवार को होगी, जो 6 अक्टूबर के उपचुनाव के बाद है, इसलिए मिलन प्रधान मतदान तक अंतरिम जमानत पर बने रहेंगे और चुनाव प्रचार में भाग ले सकेंगे। चुनाव परिणाम आने के बाद याचिका की व्यावहारिक प्रासंगिकता काफी सीमित हो जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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