नंदीग्राम उपचुनाव: कलकत्ता हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की अंतरिम राहत रद्द की
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच ने शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के उम्मीदवार मिलन प्रधान को एकल पीठ द्वारा दी गई अंतरिम सुरक्षा वापस ले ली। यह संरक्षण उन्हें किसी नए मामले में गिरफ्तारी या पुलिस कार्रवाई से राहत के रूप में दिया गया था। डिवीजन बेंच के इस निर्णय के बाद 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव से पहले प्रधान की कानूनी स्थिति और अनिश्चित हो गई है।
मामले की पृष्ठभूमि
मिलन प्रधान को 18 सितंबर 2026 की शाम गिरफ्तार किया गया था। वे फिलहाल दो अलग-अलग मामलों में न्यायिक हिरासत में हैं। वर्ष 2007 के एक हत्या के मामले में उन्हें 3 अक्टूबर तक, और दूसरे मामले में 5 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में रखने का आदेश दिया गया है।
गौरतलब है कि उनकी गिरफ्तारी के दिन ही पूर्व मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने उपचुनाव में प्रधान का समर्थन करने की घोषणा की थी। इससे कुछ समय पहले TMC उम्मीदवार संचिता डे प्रधान ने अपना नामांकन वापस ले लिया था, जिसे विपक्षी एकजुटता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया था।
एकल पीठ का आदेश और सरकार की चुनौती
गुरुवार, 24 सितंबर को न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने आदेश दिया था कि 12 अक्टूबर तक पश्चिम बंगाल पुलिस उन दो मामलों के अतिरिक्त — जिनमें प्रधान पहले से हिरासत में हैं — कोई नया मामला दर्ज नहीं करेगी और न ही किसी नए मामले में उन्हें गिरफ्तार दिखाएगी।
एकल पीठ के इस आदेश के तत्काल बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने मुख्य न्यायाधीश रवींद्र विठ्ठलराव घुगे और न्यायमूर्ति ओम नारायण राय की डिवीजन बेंच के समक्ष इसे चुनौती दी।
डिवीजन बेंच का निर्णय और अदालत की टिप्पणियाँ
शुक्रवार को सुनवाई के उपरांत डिवीजन बेंच ने एकल पीठ का आदेश वापस लेते हुए प्रधान को दी गई अंतरिम सुरक्षा समाप्त कर दी। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश घुगे ने यह सवाल उठाया कि एकल पीठ ने किस कानूनी प्रावधान के अंतर्गत यह राहत प्रदान की थी।
मुख्य न्यायाधीश ने यह भी पूछा कि प्रधान ने अग्रिम जमानत (एंटिसिपेटरी बेल) के स्थान पर अंतरिम संरक्षण की याचिका क्यों दायर की। अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव लड़ना मिलन प्रधान का अधिकार है, किंतु कानून का उल्लंघन करके नहीं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'कानून की नजर में सभी समान हैं। चुनाव लड़ने से कोई व्यक्ति विशेष नहीं हो जाता। वीआईपी और आम नागरिक में कोई अंतर नहीं है।'
उपचुनाव की तारीखें और राजनीतिक संदर्भ
नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव 6 अक्टूबर 2026 को होंगे, जबकि मतगणना 9 अक्टूबर को निर्धारित है। यह उपचुनाव ऐसे समय में हो रहा है जब विपक्षी एकता की रणनीति और सत्तारूढ़ दल के बीच सीधा टकराव चल रहा है।
डिवीजन बेंच के इस निर्णय के बाद यह देखना होगा कि प्रधान चुनाव प्रक्रिया में किस रूप में भाग ले पाते हैं — क्योंकि उनकी हिरासत की अवधि मतदान की तारीख के आस-पास तक जारी रहेगी।