29 सितंबर 2026
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नंदीग्राम उपचुनाव: कलकत्ता हाई कोर्ट ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को 20 अक्टूबर तक दी अंतरिम जमानत

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नंदीग्राम उपचुनाव: कलकत्ता हाई कोर्ट ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को 20 अक्टूबर तक दी अंतरिम जमानत

सारांश

कलकत्ता हाई कोर्ट ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को 20 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत दी — ताकि वे बराबरी के आधार पर प्रचार कर सकें। 2007 के हत्या मामलों में हिरासत में रहे प्रधान की गिरफ्तारी ममता बनर्जी की TMC समर्थन घोषणा के कुछ घंटों बाद हुई थी, जो बंगाल की बदलती राजनीति का संकेत है।

मुख्य बातें

कलकत्ता हाई कोर्ट ने 29 सितंबर को कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को 20 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत दी।
जमानत उनके विरुद्ध दर्ज सभी छह मामलों के संदर्भ में दी गई है।
प्रधान 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े दो हत्या के मामलों में न्यायिक हिरासत में थे।
शर्त: चुनाव प्रक्रिया समाप्त होते ही हल्दिया जिला न्यायालय में आत्मसमर्पण; प्रतिदिन दो बार पुलिस को फोन करना अनिवार्य।
नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों पर मतदान 6 अक्टूबर और मतगणना 9 अक्टूबर को होगी।
ममता बनर्जी की TMC ने कांग्रेस उम्मीदवार के समर्थन की घोषणा की थी, जिसके बाद TMC उम्मीदवार संचिता डे प्रधान ने नाम वापस लिया।

कलकत्ता हाई कोर्ट की जस्टिस तीर्थंकर घोष की सिंगल-जज बेंच ने मंगलवार, 29 सितंबर को नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को 20 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत प्रदान की, ताकि वे स्वतंत्र रूप से चुनाव प्रचार में हिस्सा ले सकें। पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर जिले की इस सीट पर उपचुनाव 6 अक्टूबर को होना निर्धारित है।

जमानत का आधार और अदालत का रुख

जस्टिस घोष की बेंच ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह अंतरिम जमानत इसलिए दी गई है ताकि मिलन प्रधान अन्य उम्मीदवारों की भाँति समान अवसर पर चुनाव प्रचार कर सकें। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह राहत उनके विरुद्ध दर्ज सभी छह मामलों के संदर्भ में दी गई है। इस मामले पर अगली सुनवाई 11 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।

गौरतलब है कि मिलन प्रधान 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े दो पुराने हत्या के मामलों में न्यायिक हिरासत में थे — ये मामले तत्कालीन लेफ्ट फ्रंट सरकार के कार्यकाल से संबंधित हैं। उनकी न्यायिक हिरासत की अवधि 5 अक्टूबर तक थी।

जमानत की शर्तें

अदालत ने अंतरिम जमानत देते हुए मिलन प्रधान पर कई कड़ी शर्तें भी लगाईं। चुनाव प्रक्रिया समाप्त होते ही उन्हें पूर्वी मिदनापुर जिले के हल्दिया जिला न्यायालय में आत्मसमर्पण करना होगा। इसके अतिरिक्त, उन्हें प्रतिदिन सुबह 8:30 बजे और रात 9:30 बजे संबंधित पुलिस स्टेशन को फोन कर जाँच अधिकारी से बात करनी होगी।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और गिरफ्तारी का संदर्भ

मिलन प्रधान को 18 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। यह गिरफ्तारी उस घोषणा के कुछ घंटों बाद हुई, जिसमें पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि उनका तृणमूल कांग्रेस (TMC) गुट नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन करेगा। यह घोषणा TMC उम्मीदवार संचिता डे प्रधान के नाटकीय रूप से नामांकन वापस लेने के बाद की गई थी।

यह ऐसे समय में आया है जब इस वर्ष की शुरुआत में हुए विधानसभा चुनावों में ममता बनर्जी की हार के बाद राज्य में विपक्षी एकता की नई कोशिशें देखी जा रही हैं। TMC के इस समर्थन को राज्य में विपक्षी खेमे को पुनर्गठित करने की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम माना जा रहा है।

नंदीग्राम उपचुनाव क्यों हो रहा है

विधानसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल के मौजूदा मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर — दोनों सीटों से चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी। बाद में उन्होंने भवानीपुर सीट अपने पास रखने का निर्णय लिया, जिससे नंदीग्राम सीट रिक्त हो गई और उपचुनाव अनिवार्य हो गया।

नंदीग्राम के साथ-साथ मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर विधानसभा सीट पर भी 6 अक्टूबर को मतदान होगा और मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। इन दोनों सीटों के नतीजे राज्य की राजनीतिक दिशा का संकेत देंगे।

आगे क्या होगा

अब मिलन प्रधान 20 अक्टूबर तक स्वतंत्र रूप से चुनाव प्रचार कर सकेंगे। 11 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई में अदालत उनकी जमानत की स्थिति की समीक्षा करेगी। चुनाव परिणाम आने के बाद उनके आत्मसमर्पण की शर्त लागू होगी, जो इस मामले के आगे के कानूनी घटनाक्रम को निर्धारित करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यही वह बिंदु है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है। कलकत्ता हाई कोर्ट का यह हस्तक्षेप दरअसल एक संवैधानिक संतुलन का काम करता है — यह सुनिश्चित करना कि चुनावी प्रतिस्पर्धा न्यायिक हिरासत के ज़रिए विकृत न हो। असली सवाल यह है कि 2007 के पुराने मामले अब तक लंबित क्यों हैं, और क्या इनका उपयोग राजनीतिक रूप से संवेदनशील समय पर किया जा रहा है — यह जाँच का विषय है, निष्कर्ष का नहीं।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मिलन प्रधान को अंतरिम जमानत क्यों दी गई?
कलकत्ता हाई कोर्ट ने मिलन प्रधान को इसलिए अंतरिम जमानत दी ताकि वे नंदीग्राम उपचुनाव में अन्य उम्मीदवारों की तरह स्वतंत्र रूप से चुनाव प्रचार कर सकें। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह राहत उनके विरुद्ध दर्ज सभी छह मामलों के संदर्भ में है।
मिलन प्रधान किन मामलों में हिरासत में थे?
मिलन प्रधान 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े दो पुराने हत्या के मामलों में न्यायिक हिरासत में थे, जो तत्कालीन लेफ्ट फ्रंट सरकार के कार्यकाल से संबंधित हैं। उनकी न्यायिक हिरासत की अवधि 5 अक्टूबर तक थी।
नंदीग्राम में उपचुनाव क्यों हो रहा है?
पश्चिम बंगाल के मौजूदा मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने विधानसभा चुनावों में नंदीग्राम और भवानीपुर — दोनों सीटें जीती थीं। भवानीपुर सीट अपने पास रखने के उनके निर्णय के कारण नंदीग्राम सीट रिक्त हो गई, जिससे उपचुनाव अनिवार्य हो गया।
नंदीग्राम उपचुनाव में TMC का क्या रुख है?
ममता बनर्जी के तृणमूल कांग्रेस गुट ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान का समर्थन करने की घोषणा की है। इसके बाद TMC उम्मीदवार संचिता डे प्रधान ने नाटकीय रूप से अपना नाम वापस ले लिया।
नंदीग्राम उपचुनाव में मतदान और मतगणना कब होगी?
नंदीग्राम और मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर विधानसभा सीट पर मतदान 6 अक्टूबर को होगा और मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। मिलन प्रधान को चुनाव प्रक्रिया समाप्त होते ही हल्दिया जिला न्यायालय में आत्मसमर्पण करना होगा।
राष्ट्र प्रेस
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